Gogri Flood Health Risk: गोगरी. गंगा के जलस्तर में धीरे-धीरे कमी आने लगी है, लेकिन गोगरी में बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. पानी घटने के साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में अब गाद, दलदल, जलजमाव और सड़ांध की समस्या सामने आने लगी है. इससे प्रभावित क्षेत्रों में संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ने की चिंता प्रशासन के सामने है.
गोगरी के रामपुर, बन्नी, इटहरी के भुड़िया दियारा, आश्रम, कटघरा, गोगरी, बौरना तथा नगर परिषद क्षेत्र के मीरगंज, शारदा नगर समेत कई वार्डों में बाढ़ का पानी निकलने के बाद गंदगी और कीचड़ जमा है. कई घरों से पानी निकलना शुरू हुआ है, लेकिन फर्श और दीवारों में सीलन बनी हुई है. कच्चे मकानों के कमजोर होने से उनके क्षतिग्रस्त होने का खतरा भी बना हुआ है.
बाढ़ के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बैठक
बाढ़ के बाद संभावित बीमारियों से बचाव को लेकर शुक्रवार को गोगरी के टायसेम भवन में एसडीओ संजय कुमार की अध्यक्षता में बैठक हुई. इसमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी शामिल हुए.
बैठक में गोगरी सीओ मो. आमिर हुसैन, बीडीओ रघुनंदन आनंद, राजस्व पदाधिकारी सुजीत कुमार, अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. चंद्रप्रकाश, प्रबंधक रूपक कुमार समेत कई पदाधिकारी और कर्मी मौजूद रहे.
एसडीओ ने कहा कि गंगा के जलस्तर में कमी के बाद निचले इलाकों और सड़कों पर जगह-जगह जलजमाव, कीचड़ और गंदगी जमा हो गयी है. ऐसे हालात में मच्छर जनित और जलजनित बीमारियों के फैलने की आशंका है. उन्होंने संभावित स्वास्थ्य जोखिम को देखते हुए संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिये.
ब्लीचिंग और फॉगिंग कराने का निर्देश
प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों, सड़कों, नालियों और जलजमाव वाले स्थानों पर ब्लीचिंग पाउडर और चूने का छिड़काव कराने का निर्देश दिया है. मच्छरों के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए प्रभावित गांवों और वार्डों में नियमित फॉगिंग कराने को भी कहा गया है.
पेयजल को लेकर चापाकलों के क्लोरीनेशन की व्यवस्था करने और जरूरत पड़ने पर टैंकर से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीम के माध्यम से ओआरएस, हैलोजन की गोलियां और प्राथमिक दवाएं उपलब्ध कराने की तैयारी भी की जा रही है.
स्कूलों और जलजमाव पर भी फोकस
बैठक में बाढ़ प्रभावित विद्यालयों को जल्द से जल्द सुचारू रूप से संचालित करने और जलजमाव वाले स्थानों से पानी की निकासी कराने पर भी जोर दिया गया.
प्रशासन के अनुसार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता, स्वास्थ्य, पेयजल और राहत कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है. पानी घटने के साथ ही सफाई और संक्रमण की रोकथाम को प्राथमिकता दी जा रही है.
पानी घटा तो सामने आयी गाद और सड़ांध
बाढ़ का पानी निकलने के बाद कई इलाकों में गाद और दलदल की समस्या बढ़ गयी है. पानी जमा रहने के कारण सड़न और बदबू भी फैल रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार कीड़े-मकोड़ों और जहरीले जीवों का प्रकोप भी बढ़ा है.
ग्रामीणों ने प्रभावित इलाकों में जल्द सफाई कराने, चूना और ब्लीचिंग पाउडर का पर्याप्त छिड़काव कराने तथा मेडिकल कैंप की व्यवस्था बढ़ाने की मांग की है. उनका कहना है कि बाढ़ के दौरान पानी से जूझने के बाद अब गंदगी और संक्रमण से बचाव एक नई चुनौती बन गया है.
Gogri Flood Health Risk: बाढ़ के बाद चुनौती अब सफाई और स्वास्थ्य की
गंगा का जलस्तर कम होने के साथ बाढ़ का पानी भले ही पीछे हट रहा हो, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में जमा गाद, दूषित पानी और सड़ांध के कारण लोगों की परेशानी बनी हुई है. ऐसे में आने वाले दिनों में सफाई, सुरक्षित पेयजल, मच्छर नियंत्रण और स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी महत्वपूर्ण होगी.
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