Khagaria Flood News: गोगरी (खगड़िया). मानसून के सक्रिय होते ही खगड़िया जिले में बाढ़ की आशंका गहराने लगी है. गंगा नदी के जलस्तर में पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. हर साल बाढ़ की मार झेलने वाले गोगरी अंचल में इस बार समय रहते तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. राहत शिविरों की पहचान से लेकर सरकारी नावों की तैनाती और मेडिकल टीमों की व्यवस्था तक प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं.
सोमवार को गोगरी के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) रघुनन्दन आनंद और अंचलाधिकारी (सीओ) आमिर हुसैन ने संयुक्त रूप से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर चिन्हित आश्रय स्थलों और प्रस्तावित कम्युनिटी किचन का निरीक्षण किया. अधिकारियों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर जमीनी हालात की जानकारी भी ली.
बाढ़ से पहले हर स्तर पर तैयारियों की समीक्षा
निरीक्षण के दौरान सीओ आमिर हुसैन रामपुर पहुंचे, जहां उन्होंने मुखिया कृष्णानंद यादव और सरपंच नूर आलम से मुलाकात कर संभावित बाढ़ की स्थिति और स्थानीय चुनौतियों पर चर्चा की.
सीओ ने कहा कि निरीक्षण का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर बाढ़ पूर्व तैयारियों की समीक्षा करना और संभावित समस्याओं की पहचान कर समय रहते समाधान सुनिश्चित करना है. उनका कहना था कि राहत और बचाव कार्य तभी प्रभावी होंगे, जब सभी विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधि मिलकर काम करेंगे.
हर साल हजारों लोग होते हैं प्रभावित
प्रशासन के अनुसार गोगरी अंचल की आधा दर्जन से अधिक पंचायतों के तीन दर्जन से ज्यादा वार्ड हर वर्ष बाढ़ की चपेट में आते हैं. इन इलाकों में हजारों लोगों का जनजीवन प्रभावित होता है. कई गांव ऐसे भी हैं, जहां बाढ़ के दौरान सड़क संपर्क पूरी तरह टूट जाता है और लोगों के लिए नाव ही एकमात्र सहारा बन जाती है.
इसी स्थिति को देखते हुए इस बार प्रशासन ने पहले से ही सरकारी नावों की तैनाती की तैयारी पूरी कर ली है, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके.
हर पंचायत में बनेंगे राहत केंद्र
बाढ़ की स्थिति बनने पर लोगों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक पंचायत में कम से कम दो स्थानों को राहत केंद्र के रूप में चिह्नित किया जा रहा है.
इन राहत शिविरों में स्वच्छ पेयजल, शौचालय, बिजली और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई है. साथ ही स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया गया है कि प्रत्येक राहत केंद्र पर मेडिकल टीम उपलब्ध रहे, ताकि किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके.
मवेशियों के लिए भी अलग तैयारी
बाढ़ के दौरान केवल लोगों को सुरक्षित रखना ही चुनौती नहीं होती, बल्कि पशुधन की सुरक्षा भी बड़ी जिम्मेदारी होती है. इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पशुपालन विभाग के साथ समन्वय कर पशुचारा और पशु चिकित्सा की व्यवस्था शुरू कर दी है.
बाढ़ प्रभावित पंचायतों में चारा गोदामों की पहचान की जा रही है, जहां पर्याप्त मात्रा में भूसा और अन्य पशुचारा उपलब्ध कराया जाएगा.
राहत सामग्री का भी किया जा रहा इंतजाम
जिला प्रशासन ने संभावित आपदा को देखते हुए आवश्यक राहत सामग्री का भंडारण भी शुरू कर दिया है. जरूरत पड़ने पर प्रभावित परिवारों को पॉलीथिन शीट, चावल, दाल, मिट्टी तेल, माचिस, क्लोरीन टैबलेट और प्राथमिक उपचार किट उपलब्ध कराई जाएगी.
साथ ही जिला स्तर पर बाढ़ निगरानी केंद्र को सक्रिय कर दिया गया है. जल संसाधन विभाग प्रतिदिन गंगा नदी के जलस्तर की निगरानी कर रिपोर्ट जारी कर रहा है, जबकि आपदा प्रबंधन टीम को अलर्ट मोड में रखा गया है.
Khagaria Flood News: प्रशासन ने लोगों से मांगा सहयोग
बीडीओ रघुनन्दन आनंद और सीओ आमिर हुसैन ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं होते. पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है.
उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे बाढ़ संभावित क्षेत्रों के लोगों को पहले से जागरूक करें और राहत एवं बचाव कार्यों में प्रशासन का सहयोग करें, ताकि किसी भी आपात स्थिति में जान-माल का नुकसान कम से कम हो.
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