सड़क हादसे में घायल वन विभाग के कर्मी बिट्टू कुमार की पटना में मौत, परिवार पर टूटना दुखों का पहाड़

खगड़िया जिले में सड़क दुर्घटना में वन विभाग के निजी कर्मी बिट्टू कुमार की इलाज के दौरान मौत हो गई. तेज रफ्तार अज्ञात वाहन की टक्कर से घायल हुए बिट्टू को बेहतर इलाज के लिए पटना ले जाया गया था, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया. इस घटना से उनके छोटे बच्चों और दिव्यांग पत्नी के सामने आजीविका का गहरा संकट खड़ा हो गया है.

खगड़िया जिले के अलौली थाना क्षेत्र अंतर्गत कामाथान गांव निवासी एवं वन विभाग के निजी कर्मी बिट्टू कुमार (32 वर्ष) की सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद इलाज के दौरान दर्दनाक मौत हो गई. बुधवार शाम ड्यूटी पर जाते समय किसी अज्ञात वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी थी. परिजनों द्वारा बेहतर इलाज के लिए उन्हें पटना के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां गुरुवार को उन्होंने अंतिम सांस ली.

अज्ञात वाहन ने मारी टक्कर, प्राथमिक उपचार के बाद पटना रेफर

घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार:

  • हादसे का वक्त: बुधवार शाम कामाथान निवासी भूदेव पासवान के 32 वर्षीय पुत्र बिट्टू कुमार अपनी ड्यूटी पर जाने के लिए घर से निकले थे.
  • अज्ञात वाहन का कहर: रास्ते में किसी तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उन्हें कुचल दिया. स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत पास के अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी नाजुक हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया.
  • इलाज के दौरान मौत: पटना के एक निजी अस्पताल में गुरुवार को इलाज के दौरान बिट्टू कुमार ने दम तोड़ दिया.

सदर अस्पताल में हुआ पोस्टमार्टम, लोजपा (आर) जिलाध्यक्ष ने दी आर्थिक सहायता

घटना के बाद परिजन शव को खगड़िया सदर अस्पताल लाए, जहां पुलिस द्वारा पोस्टमार्टम कराया गया:

  • नेताओं और ग्रामीणों का तांता: बिट्टू कुमार लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के एससी-एसटी (SC-ST) प्रकोष्ठ के अलौली प्रखंड अध्यक्ष के भाई थे.
  • सांत्वना और मदद: घटना की सूचना मिलते ही लोजपा (रामविलास) के जिलाध्यक्ष मनीष कुमार सदर अस्पताल पहुंचे. उन्होंने शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया और पार्टी की तरफ से तत्काल आर्थिक सहयोग प्रदान किया.

दिव्यांग पत्नी और दो मासूम बच्चों के सिर से उठा साया

मृतक बिट्टू कुमार ही अपने पूरे परिवार के अकेले कमाऊ सदस्य थे:

  • 5 साल पहले हुई थी शादी: ग्रामीणों ने बताया कि बिट्टू की शादी लगभग 5 वर्ष पूर्व हुई थी. उनके दो छोटे-छोटे मासूम बच्चे हैं.
  • आजीविका का संकट: बिट्टू की पत्नी दिव्यांग हैं. परिवार का पूरा भरण-पोषण बिट्टू के वन विभाग के निजी वेतन से ही चलता था. उनके असमय निधन से मासूम बच्चों और दिव्यांग पत्नी के सामने जीवन-यापन का गहरा संकट खड़ा हो गया है.

इस दुखद घटना के बाद कामाथान गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और ग्रामीण पीड़ित परिवार को संभालने में लगे हैं.


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By Prabhat khabar news desk

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