गोगरी में बाढ़ का पानी उतरते ही महामारी का खतरा बढ़ा, गंदगी और सड़े पानी से लोग परेशान, ब्लीचिंग छिड़काव की मांग तेज

गोगरी प्रखंड में बाढ़ का पानी घटने के साथ ही गांवों में गंदगी और सड़े पानी की समस्या खड़ी हो गई है. इससे डायरिया और हैजा जैसी जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. ग्रामीण तत्काल ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव की मांग कर रहे हैं.

गोगरी प्रखंड के रामपुर समेत गोगरी, बौरना, बन्नी और इटहरी पंचायतों में करीब एक माह से फैला बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे उतर रहा है. पानी घटने के बाद गांवों में जगह-जगह गंदगी और जलजमाव की स्थिति बनी हुई है. सड़े पानी और दुर्गंध के बीच लोगों को अब जलजनित बीमारियों के फैलने का डर सताने लगा है. ग्रामीणों ने प्रभावित इलाकों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराने की मांग की है.

गंदगी और सड़े पानी से बीमारी का डर

रामपुर, इटहरी और बौरना पंचायत के ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का पानी घटने के बाद घरों और आसपास गंदा पानी जमा है. कई जगह पानी सड़ने से दुर्गंध फैल रही है. ऐसे माहौल में डायरिया, हैजा समेत जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में स्थानीय स्तर से लेकर जिला पदाधिकारी तक कई बार ब्लीचिंग छिड़काव कराने की मांग की गयी है.

मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ा

जलजमाव के कारण मच्छरों की संख्या भी काफी बढ़ गयी है. ग्रामीणों के अनुसार कई जगह साफ पेयजल की समस्या बनी हुई है और लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं. इससे पेट संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है. बाढ़ से पहले ही परेशान लोगों को अब बीमारी फैलने की चिंता सताने लगी है.

स्वास्थ्य विभाग ने शुरू कराया ब्लीचिंग का छिड़काव

गोगरी रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. चंद्रप्रकाश ने बताया कि जिला स्तर से ब्लीचिंग पाउडर उपलब्ध कराया गया है. बाढ़ प्रभावित पंचायतों के मुखिया को जरूरत के अनुसार ब्लीचिंग का वितरण किया जा रहा है. मुखिया के स्तर से पंचायत के प्रभावित इलाकों में ब्लीचिंग का छिड़काव कराया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग जलजनित बीमारियों की रोकथाम को लेकर सतर्क है. प्रभावित बस्तियों में ब्लीचिंग पाउडर, चूना और हैलोजन टैबलेट के वितरण और छिड़काव का काम कराया जा रहा है.

रामपुर और बौरना में अब भी चल रहा सामुदायिक किचन

गोगरी प्रखंड से होकर बहने वाली गंगा और गंडक के जलस्तर में लगातार कमी आ रही है. स्थिति में सुधार के बाद प्रशासन ने प्रमुख राहत केंद्रों को छोड़कर अन्य सामुदायिक किचन बंद करने का निर्णय लिया है. हालांकि रामपुर और बौरना में अभी भी सामुदायिक किचन संचालित हो रहे हैं. यहां सैकड़ों बाढ़ पीड़ित परिवार पहुंचकर भोजन कर रहे हैं.

बाढ़ से मवेशियों के चारे का भी संकट

बाढ़ के कारण खेतों में लगी फसल के साथ मवेशियों का चारा भी डूब गया था. ग्रामीण अब सूखे चारे की मदद से किसी तरह पशुओं को पाल रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि घर के आसपास अब भी जलजमाव है और पानी से दुर्गंध निकल रही है. राशन और जरूरी सामान लाने में भी परेशानी हो रही है. ऐसे में पानी की निकासी और नियमित छिड़काव नहीं हुआ तो बीमारी का खतरा और बढ़ सकता है.

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लेखक के बारे में

By रणवीर कुमार

रणवीर कुमार प्रिंट माध्यम में 13 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. गोगरी (खगड़िया) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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