खगड़िया जिले के बेलदौर प्रखंड में करोड़ों रुपये की लागत से बन रही 'मुख्यमंत्री ग्रामीण पथ योजना' की सड़क निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितता और घोर लापरवाही का मामला सामने आया है. चौढ़ली से गांधी नगर-इतमादी को जोड़ने वाली इस महत्वपूर्ण सड़क के निर्माण में तकनीकी मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.
दो वर्षों से अधूरा निर्माण, पहली ही बारिश में खुली पोल
ग्रामीणों का आरोप है कि इतमादी पंचायत के स्थानीय जनप्रतिनिधि की देखरेख में पिछले लगभग दो वर्षों से इस सड़क का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, लेकिन अब तक यह कार्य पूरा नहीं हो पाया है:
- जलजमाव की समस्या: जो हिस्सा बनकर तैयार भी हुआ है, वह पहली ही बारिश में जलजमाव की समस्या से जूझने लगा है.
- गुणवत्ता पर सवाल: निर्माण कार्य में घटिया सामग्री के इस्तेमाल और मनमानी का आरोप भी ग्रामीणों ने लगाया है.
पुल और सड़क का लेवल बिगड़ा, बाढ़ में संपर्क टूटने का खतरा
स्थानीय ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि निर्माण के दौरान बेहद ही बुनियादी तकनीकी चूक की गई है:
- लेवलिंग में गड़बड़ी: चौढ़ली गांव के समीप बने उच्च स्तरीय पुल के हिसाब से सड़क का लेवल नहीं रखा गया है. इसके कारण बारिश का पानी सीधे सड़क पर जमा होने लगा है.
- हजारों की आबादी पर संकट: बाढ़ और बरसात के मौसम में गांधी नगर, इतमादी और सहरौन पंचायत के निवासियों के लिए यही मार्ग प्रखंड मुख्यालय तक पहुँचने का इकलौता जरिया है. यदि यह रास्ता जलमग्न हो जाता है, तो हजारों लोगों का आवागमन पूरी तरह ठप हो जाएगा.
रास्ता अधूरा, ग्रामीणों ने की दोबारा निर्माण और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि चौढ़ली जमींदारी बांध से लेकर पुल तक पहुँचने वाले एप्रोच मार्ग को अब तक अधर में छोड़ दिया गया है:
- जांच की मांग: ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और ग्रामीण कार्य विभाग से इस पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की गुहार लगाई है.
- कार्रवाई की अपील: गुणवत्ता की समीक्षा कर दोषी पाई जाने वाली निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों/जनप्रतिनिधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा सड़क का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुसार दोबारा कराया जाए.
(नोट: इस संबंध में संबंधित विभाग के अधिकारियों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क स्थापित न होने के कारण उनका पक्ष शामिल नहीं किया जा सका है.)
