अंग्रेजों की संपत्ति लूटकर आजादी की लड़ाई लड़ते थे ब्रह्मदेव चौधरी

स्वतंत्रता सेनानी ब्रह्मदेव चौधरी ने अंग्रेजों की संपत्ति लूटकर आज़ादी की लड़ाई को तेज किया. उन्होंने हतियार लूटे, मालगाड़ी और जहाजों से संपत्ति जुटाई. उनकी असाधारण कहानी पढ़ें.

भारत माता को अंग्रेजी हुकूमत की जंजीरों से आजादी दिलाने के लिए स्वतंत्रता सेनानी ब्रह्मदेव चौधरी ने पूरी जवानी संघर्ष और यातनाओं के बीच बितायी. जिले के कई क्रांतिकारियों ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी, लेकिन सदर प्रखंड के संसारपुर गांव निवासी लाखो चौधरी के पुत्र ब्रह्मदेव चौधरी की अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष की कहानी अलग रही.


स्वर्गीय ब्रह्मदेव चौधरी के पुत्र दीपक कुमार, पुत्रवधू रश्मि सिंह (अधिवक्ता), पोती आस्था कुमारी और पोता शुभ कुमार हैं

वर्ष 1900 में जन्मे ब्रह्मदेव चौधरी बचपन से ही पढ़ाई में तेज थे. अंग्रेजी शासन के अत्याचारों को करीब से देखने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गये. चौथम थाना क्षेत्र के पिपरा गांव निवासी महेंद्र चौधरी तथा मानसी के धन्ना-माधव के साथ उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभायी. इसकी भनक ब्रिटिश अधिकारियों को लग गयी और अंग्रेजों ने उन्हें हाजिर होने का फरमान जारी किया. इसके बावजूद वे अंग्रेजों की नजर से बचकर आजादी की लड़ाई में जुटे रहे.

अंग्रेजों के हथियार और संपत्ति लूटकर आंदोलन में करते थे इस्तेमाल

स्वतंत्रता सेनानी ब्रह्मदेव चौधरी के पुत्र दीपक ने बताया कि उनके पिता अंग्रेजों की संपत्ति लूटकर उसी के खिलाफ संघर्ष में उसका इस्तेमाल करते थे. अंग्रेजों की मालगाड़ी और पानी वाले जहाज से संपत्ति लूटकर धन एकत्रित किया जाता था, ताकि स्वतंत्रता आंदोलन में उसका उपयोग किया जा सके.

उन्होंने बताया कि अंग्रेजी हुकूमत का मुकाबला करने के लिए ब्रह्मदेव चौधरी ने सबसे पहले हथियार जुटाने शुरू किये. दोस्तों के साथ मिलकर उन्होंने अंग्रेज सिपाहियों से चार दर्जन से अधिक हथियार लूट लिये थे. बाद में इसकी भनक अंग्रेज पुलिस को लग गयी और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी शुरू कर दी गयी.

गिरफ्तारी नहीं हुई तो माता-पिता को भेज दिया जेल

अंग्रेजों की हथियार लूटने के बाद ब्रह्मदेव चौधरी अपने साथियों के साथ गुप्त ठिकाने पर छिप गये थे. अंग्रेज सिपाही उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रहे थे. जब वे नहीं मिले तो अंग्रेज अधिकारियों ने उनके माता-पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

माता-पिता की गिरफ्तारी की जानकारी मिलने पर ब्रह्मदेव चौधरी अंग्रेज पुलिस के सामने हाजिर हो गये. उन्होंने माता-पिता को छोड़ने की शर्त रखी. इसके बाद अंग्रेज अधिकारियों ने उन्हें 11 दिनों तक हाजत में रखकर यातनाएं दीं. इसकी जानकारी ग्रामीणों को मिली तो लोगों ने उन्हें जेल भेजने की मांग को लेकर विरोध किया. इसके बाद ब्रह्मदेव चौधरी को जेल भेज दिया गया.

सहयोगी को फांसी, ब्रह्मदेव चौधरी को मिली आजीवन कारावास की सजा

परिजनों के अनुसार, अंग्रेजों ने ब्रह्मदेव चौधरी के सहयोगी महेंद्र चौधरी को फांसी की सजा सुनायी, जबकि ब्रह्मदेव चौधरी को आजीवन कारावास की सजा दी गयी. जेल में उन्हें अपर डिवीजन के बंदी का दर्जा दिया गया था.

बताया जाता है कि प्रत्येक रविवार को कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें भागलपुर केंद्रीय जेल से गांव लाया जाता था. इसी दौरान महात्मा गांधी के बिहार आने की जानकारी उन्हें मिली. महात्मा गांधी को ब्रह्मदेव चौधरी के संघर्ष की जानकारी हुई तो वे उनके परिजनों से मिलने पहुंचे.

स्वतंत्रता सेनानी पेंशन लेने से कर दिया था इनकार

ब्रह्मदेव चौधरी मातृभूमि के प्रति अपने समर्पण के लिए आज भी याद किये जाते हैं. परिजनों के अनुसार, उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों को मिलने वाली पेंशन लेने से इनकार कर दिया था. उनका कहना था कि देश के लिए किया गया कर्तव्य किसी लाभ की अपेक्षा से नहीं किया गया था.

उनके पुत्र ने बताया कि ब्रह्मदेव चौधरी केवल अंग्रेजी हुकूमत से ही नहीं लड़ते थे, बल्कि अंग्रेजों की मदद या उन्हें सूचना देने वाले लोगों का भी विरोध करते थे. बताया कि 22 मई 2002 को 102 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया.

धन्ना-माधव स्मारक के जीर्णोद्धार की मांग

इधर, आजादी की लड़ाई में सदर प्रखंड के माड़र गांव निवासी अमर शहीद प्रभु नारायण सिंह और मानसी के वीर शहीद धन्ना-माधव ने भी अपना बलिदान दिया था. हर वर्ष 13 अगस्त को इनका शहादत दिवस मनाया जाता है.

अमर शहीद धन्ना-माधव निर्माण समिति के संयुक्त सचिव सह महासचिव सिकंदर आजाद ने बताया कि सांसद राजेश वर्मा को पत्र लिखकर अमर शहीद धन्ना-माधव स्मारक के जीर्णोद्धार की मांग की गयी है, लेकिन अब तक इस दिशा में पहल नहीं हो सकी है.

मौके पर समिति के अध्यक्ष छेदी सिंह, सचिव अभय कुमार गुड्डू, कोषाध्यक्ष प्रेम कुमार यशवंत, धर्मेंद्र पौद्दार, प्रमोद कुमार सिंह, रूपेश कुमार पौद्दार, सागर मुकेश, विजय कुमार सिंह सहित अन्य लोग मौजूद थे.


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By Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

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