आखिर कैसे परोसें बच्चों की थाल में दाल

गोगरी : प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविकाएं इन दिनों मुश्किल में हैं. उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि बच्चों की थाली में दाल कैसे परोसे. दरअसल आइसीडीएस द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार के लिए प्रतिकिलो दाल का रेट 50 रुपया मिलता है. फिलहाल दाल का बाजार भाव 80 रुपया प्रति किलो […]

गोगरी : प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविकाएं इन दिनों मुश्किल में हैं. उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि बच्चों की थाली में दाल कैसे परोसे. दरअसल आइसीडीएस द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार के लिए प्रतिकिलो दाल का रेट 50 रुपया मिलता है. फिलहाल दाल का बाजार भाव 80 रुपया प्रति किलो से अधिक है.

30 से 35 रुपया प्रतिकिलो का अंतर सेविकाओं के जेब पर भारी पड़ रहा है. पोषाहार को रोक नहीं सकती और विभाग घाटे की भरपाई करने में असमर्थ है, जबकि महीने की हर 15 तारीख को बंटने वाले टीएचआर में विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहते हैं. ऐसी स्थिति में अध्ययनरत बच्चे,

गर्भवती व धातृ महिलाओं को दिये जाने वाली दाल में कटौती होने पर हंगामा भी होता है. सेविकाओं से लेकर सहायिकाएं भी टेक होम राशन बांटने में फजीहत झेलती है. चना दाल के बदले दूसरा दाल भी नहीं दिया जा सकता. ऐसी परिस्थिति में सेविकाएं या तो लाभुकों को मात्रा से कम दाल देगी या फिर अपने जेब से पैसा लगाकर इसकी भरपाई करेगी. टीएचआर के अलावा प्रत्येक दिन आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को पोषाहार भी देना है. जिसमें चना दाल वाली खिचड़ी भी दी जाती है. एक दर्जन से अधिक सेविकाएं इस समस्या से सीडीपीओ कार्यालय को अवगत करा चुकी है.

रेट का समय-समय पर होना चाहिये निर्धारण
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सियाराम सिंह ने इस संबंध में बताया कि महंगाई बढ़ी है. रेट का समय-समय पर निर्धारण होना चाहिए. इसके लिए बैठक भी सीडीपीओ के साथ हुई है. निकट भविष्य में रेट निर्धारण की बैठक कर आइसीडीएस निदेशालय को रिपोर्ट की जायेगी.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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