सुंदर सड़क आज भी सपना

अनदेखी. मथुरापुरवासी सीएम से लेकर जनप्रतिनिधियों तक से लगायी गुहार एक अदद सड़क के लिए तरस रहे हैं मथुरापुर पंचायत की अधिकांश आबादी, कब तक होगा जीर्णोद्धार मथुरापुर के बिचला टोलावासी एक अदद सड़क के लिए वर्षों से तरस रहे हैं. वार्ड सदस्य कमल किशोर पासवान के घर से कपिलदेव महतो के घर तक जाने […]

अनदेखी. मथुरापुरवासी सीएम से लेकर जनप्रतिनिधियों तक से लगायी गुहार

एक अदद सड़क के लिए तरस रहे हैं मथुरापुर पंचायत की अधिकांश आबादी, कब तक होगा जीर्णोद्धार
मथुरापुर के बिचला टोलावासी एक अदद सड़क के लिए वर्षों से तरस रहे हैं. वार्ड सदस्य कमल किशोर पासवान के घर से कपिलदेव महतो के घर तक जाने वाली इस सड़क की स्थिति बहुत खराब है. सड़क में गड्ढा है या गड्ढे में सड़क इस बात का अंदाजा लगाना कठिन है. ग्राम पंचायत अंतर्गत स्थित इस सड़क को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा पंचायत जनप्रतिनिधियों से गुहार लगायी गयी पर मामला जस का तस है.
खगड़िया : स्थानीय मथुरापुर के बिचला टोलावासी एक अदद सड़क के लिए वर्षों से तरस रहे हैं. वार्ड सदस्य कमल किशोर पासवान के घर से कपिलदेव महतो के घर तक जाने वाली इस सड़क की स्थिति बहुत खराब है. सड़क में गड्ढा है या गड्ढे में सड़क इस बात का अंदाजा लगाना कठिन है. ग्राम पंचायत अंतर्गत स्थित इस सड़क को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा पंचायत जनप्रतिनिधियों से गुहार लगायी गयी पर मामला जस का तस है. यह सर्वे का सड़क है. सड़क पूरी तरह अतिक्रमण से मुक्त है. फिर ऐसा क्या है कि सड़क के जीर्णोद्धार में रोड़ा अटका है.
मुख्यमंत्री से भी की गयी फरियाद
स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर सांसद से मिली निराशा के बाद ग्रामीणों ने यह ठान लिया कि अब जिला स्तर से इस सड़क का जीर्णोंद्धार नहीं हो सकता है. इस लिए आगे मुख्यमंत्री से गुहार लगायी. समाज सेवी कुणाल कुमार सिंह ने न्याय के साथ विकास के महापुरुष नीतीश कुमार के जनता दरबार में जाकर सड़क का मुद्दा उठाते हुए आवेदन दिया लेकिन फिर भी सड़क नहीं बन पायी.
जिला स्तर से निरीक्षण रिपोर्ट फाइलों में दबा
बताते चलें कि मुख्यमंत्री से गुहार लगाने के बाद जिला स्तर से कई बार पदाधिकारी उक्त सड़क के निरीक्षण को लेकर पहुंचे. परंतु कागजी घोड़ा दौड़ते दौड़ते दम तोड़ दिया लेकिन सड़क का प्राक्कलन तक नहीं बन पाया. जीर्णोद्धार तो दूर की कौड़ी ही साबित हुई.
बीना पिये ही डगमागाते हैं लोग
आश्चर्य कि सड़क की स्थिति ऐसी है कि इस सड़क पर चलते वक्त बुढ़े ही नहीं जवान और बच्चे भी डगमाते रहते हैं. सड़क पर चलते वक्त लगता है कि लोग शराब पीकर डगमगा रहे हैं.
शादी ब्याह भी हुआ मुश्किल
इस सड़क के दोनों किनारे बसे लोग मध्यम वर्ग के हैं. गरीबों की संख्या बहुत कम है. लोग चाहे तो अपने स्तर से भी सड़क का निर्माण कर सकते है. परंतु, मध्यम वर्ग की जिद है कि प्रजातंत्र की एक दिन जीत होगी. एक दिन सड़क का निर्माण होगा. हालांकि इस जद्दोजहद के कारण यहां के इस सड़क पर चलने वालों को कई तरह की कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है. लोग अपनी बेटी का ब्याह अपने घर से नहीं करते हैं. किसी बच्ची की शादी करना हो तो यहां तो ननिहाल से करना पड़ता है. या फिर जिला मुख्यालय के किसी होटल को बुक करना पड़ता है.
पंचायत चुनाव में सबक सिखाएगी जनता
बिचला टोला के लोगों ने ठान लिया है कि इस बार पंचायत चुनाव में तथाकथित नेताओं को सबक सिखानी है. इस बात को भांप कर कई प्रत्याशी इस मोहल्ले में प्रवेश तक नहीं करते हैं. वहीं, कई ऐसे भी प्रत्याशी हैं जो इस सड़क को लेकर कोई बात करने में परहेज करते नजर आते हैं. वे इस मुद्दे से बचने की भरसक कोशिश करते है.
सड़क के लिये इंतजार कब तक
यह सड़क अब भी अपने उद्धारक का तलाश कर रहा है. यह अभी काल के गाल में है परंतु, इस सड़क से गुजरने वालों के जुबान पर एक ही सवाल रहता है कि आखिर इस सड़क का उद्धारक कौन बनेगा? जिला प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों की नींद कब खुलेगी.
एमएलसी, विधायक और सांसद से गुहार बेकार
इस सड़क को लेकर कई बार स्थानीय एमएलसी, विधायक और सांसद से भी मिलकर सड़क के जीर्णोंद्धार की बात की गयी. परंतु ऐसा लगता है कि यह सड़क किसी बड़ी राजनीतिक ताने बाने की वजह किसी ने भी अभिरूची नहीं दिखायी. इन नेताओं ने सिर्फ आश्वासन का घूंट ही पिलाने का काम किये. परिणाम ढाक के तीन पात वाली साबित हुआ.

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