माधवपुर में क्या होगा मतदाताओं का रुख
परबत्ता : प्रखंड के माधवपुर पंचायत को प्रशासन के द्वारा नंबर वन पंचायत में गिना जाता है. पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के बाद से विधिवत रूप से चौथी बार पंचायत चुनाव में मतदान 14 मई को है. मुंगेर जिला की सीमा से सटे माधवपुर परबत्ता प्रखंड का इकलौता पंचायत है, जो जीएन बांध की सुरक्षा चक्र से बाहर है. यह मात्र तीन गांवों का पंचायत है. जिसमें माधवपुर, विष्णुपुर व मुरादपुर शामिल हैं. यहां के लोगों की अधिकांश खेती मुंगेर जिला में होता है.
इस वजह से यहां के किसानों को खेती में कई प्रकार की परेशानियां भी होती है, लेकिन दियारा क्षेत्र की उपजाऊ मिट्टी वाले जमीन पर इतना फसल लगता है कि किसान इन परेशानियों को परे रखकर खेती तथा पशुपालन में लगे रहते हैं. पुराने जमाने में अपने वीरता, शौर्य व विद्वता की वजह से चर्चा में रहने वाले इस क्षेत्र को ऐसा लगता है कि गत कुछ वर्षों से किसी की नजर लग गयी है.
अब इस पंचायत का जिक्र अक्सर गलत कारणों से होने लगा है.
माधवपुर के युवावर्ग को शायद अपने गांव के वीर सैनिक उमेश प्रसाद सिंह का नाम पता नहीं है, जिन्होंने 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में भाग लिया और युद्ध जीतकर लौटते हुए कई बहुमूल्य चीजें अपने साथ लाये जो गांव के जन पुस्तकालय में आज भी संग्रहित है. मुरादपुर के शहीद धनंजय झा जिन्होंने कारगिल युद्ध में देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिये.
चुनाव परिवर्तन या विश्वास का : माधवपुर में गत तीन चुनावों में पंचायत के मतदाताओं ने मुखिया पद के लिए एक ही परिवार पर भरोसा जताया था.
वर्ष 2001 में हुए पंचायत चुनाव में मुखिया पद के लिए जनार्दन सिंह निर्वाचित हुए. वहीं 2006 तथा 2011 के पंचायत चुनावों में यह पद महिला के लिए आरक्षित होने पर जनार्दन सिंह की माता शांति देवी लगातार दो बार निर्वाचित हुई. इस बार के पंचायत चुनाव 2016 में मुखिया पद के लिए नौ प्रत्याशी मैदान में हैं.
