मामला परबत्ता में प्रति आंगनबाड़ी केंद्र 1500 रुपये की अवैध उगाही का
आइसीडीएस में भ्रष्टाचार के आरोप पर डीएम के कड़े रुख से सच सामने आने की उम्मीद
मामला डीएम दरबार तक पहुंचने के बाद सेविकाओं को मुंह बंद रखने की मिली हिदायत
विभाग के डीपीओ ने कहा, अवैध उगाही मामले की तह तक जाकर होगी जांच
खगड़िया : परबत्ता सीडीपीओ द्वारा प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र से प्रति महीने 1500 रुपये की अवैध उगाही प्रकरण की दोबारा जांच होगी. विभाग के डीपीओ सियाराम सिंह ने कहा कि जल्द ही प्रखंड मुख्यालय पहुंच कर संबंधित पक्षांे से आवश्यक पूछताछ की जायेगी. बता दें कि डीएम के निर्देश बाद कुछ दिन पूर्व डीपीओ ने परबत्ता मंे बैठक के दौरान मामले की जांच की थी. लेकिन गहन जांच की जरूरत को देखते हुए अभी कई बिंदुओं पर छानबीन बाकी है.
इधर, मामला गरम होते देख सेविकाओं को मुंह नहीं खोलने की हिदायत दी जा रही है. लेकिन दबी जुबान से चर्चा का बाजार गरम है. चर्चा की मानें तो लोग यही कह रहे हैं आखिर एक ना एक दिन भेद खुलना ही था. इन सारे घटनाक्रम के बीच लोगों को यह भी अंदेशा है कि आरोप के घेरे में आई सीडीपीओ के रहते कहीं सच परदे के पीछे गुम ना हो जाये.
केंद्र निरीक्षण के नाम पर खानापूरी: बाल विकास परियोजना विभाग की फाइलों में आंगनबाड़ी केंद्र भले ही दनादन चल रहे हो लेकिन जमीनी हकीकत बड़ी डरावनी है.
सूत्रों की मानंे तो आंगनबाड़ी केंद्र निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ती की जाती है. कागज पर निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंप कर कमीशन की आड़ में सरकारी राशि का गोलमाल किया जाता है. इतना ही नहीं डीएम को भेजे गये शिकायती पत्र में कहा गया है कि सीडीपीओ ने अवैध वसूली के लिये एक सेविका पति को लगा रखा है. जो मेधा सूची निकलते ही आवेदिका से संपर्क कर बहाली के नाम पर वसूली करते हैं.
इतना ही नहीं बाहरी व्यक्ति दिन भर कार्यालय में बैठ कर सरकारी फाइलों को निबटाते हैं. यहां तक कि सीडीपीओ के साथ निरीक्षण, क्रय पंजी पर हस्ताक्षर में गोलमाल किया जाता है. कुल मिला कर परबत्ता बाल विकास परियोजना कार्यालय में सुधार की सख्त जरूरत है ताकि सरकार की योजना को धरातल पर सफल बनाया जा सके.
