बिना रजस्ट्रिेशन के चल रहे कोचिंग संस्थान

बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे कोचिंग संस्थान फोटो लगा देंगेखगड़िया में शिक्षा विभाग के नियम-कायदे नहीं रखते कोई मायने कुकुरमुत्ते की तरह खुल गये कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई से ज्यादा कमाई पर ध्यानपरदे के पीछे हो रहे कई खेल, रजिस्ट्रेशन के प्रति शिक्षा विभाग नहीं ले रहा दिलचस्पी प्रतिनिधि, खगड़ियाशिक्षा विभाग के निर्देश को ताक […]

बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे कोचिंग संस्थान फोटो लगा देंगेखगड़िया में शिक्षा विभाग के नियम-कायदे नहीं रखते कोई मायने कुकुरमुत्ते की तरह खुल गये कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई से ज्यादा कमाई पर ध्यानपरदे के पीछे हो रहे कई खेल, रजिस्ट्रेशन के प्रति शिक्षा विभाग नहीं ले रहा दिलचस्पी प्रतिनिधि, खगड़ियाशिक्षा विभाग के निर्देश को ताक पर रख कर शहर में 100 से अधिक कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं. बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे इन कोचिंग संस्थानों को तीन बार शिक्षा विभाग रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कह चुका है, लेकिन अब तक एक मात्र आवेदन आया है. पूर्व में विभाग द्वारा रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू किये जाने के बाद आंदोलन की सुगबुगाहट के बाद विभाग कान में तेल डाल कर सोया हुआ है. जिला शिक्षा पदाधिकारी की बातों से बेबसी साफ झलकती है. डीइओ ने कहा कि पूर्व में विभाग ने विभिन्न कोचिंग संस्थानों को तीन बार रजिस्ट्रेशन के लिए समय सीमा बढ़ा चुका है. पर, प्राइवेट कोचिंग संचालकों ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ली. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जब सरकार का स्पष्ट दिशा निर्देश है तो फिर उस पर अमल क्यों नहीं हो पाया है? परीक्षा पास कराने तक का लिया जाता है ठेका शहर की गलियों में रोज खुल रहे कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई से ज्यादा कमाई पर ध्यान रहता है. शटर वाले दुकानों में चल रहे कोचिंग में परेशानियों के अंबार के बीच विद्यार्थी पढ़ने को विवश हैं. न पेयजल की व्यवस्था न रोशनी का प्रबंध. कहीं भी बोर्ड लगाया और शुरू हो जाता है वसूली का खेल. न रजिस्ट्रेशन का झंझट और न ही सरकारी नियम कायदे की कोई फिक्र. सूत्रों की मानें तो कई कोचिंग संस्थानों में कागजी प्रक्रिया से लेकर परीक्षा पास करवाने तक का ठेका लिया जाता है. शहर में अच्छे कोचिंग भी हैं, लेकिन विद्यार्थी की बढ़ती संख्याओं व प्रचार-प्रसार के बल पर कई कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं. शिक्षा विभाग की चुप्पी से कोचिंग संस्थानों के खुलने का सिलसिला जारी है. बैनर पोस्टर में किये जा रहे बड़े-बड़े दावे शहर में प्रवेश करने के साथ ही इन संस्थानों के बड़े बड़े बैनर पोस्टर दिखने लगते हैं. इस पर बड़े-बड़े दावे, परीक्षा पास करने सहित कई चीजों की गारंटी अंकित रहते हैं. क्या आपको पता है कि बड़े-बड़े दावे तथा परीक्षा पास कराने की गारंटी देने ये कोचिंग संस्थान वैध है या फिर अवैध. अगर जानकारी नहीं हो तो यहां बता दें कि शहर ही नहीं गांवों-देहातों में चलने वाले अधिकतर कोचिंग संस्थान अवैध रूप से चल रहे हैं. कारण विभाग द्वारा जिले में चलने वाले अधिकांश कोचिंग संस्थानों का रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया है. रजिस्ट्रेशन के बिना चलने वाले कोचिंग संस्थानों में मानकों की घोर अनदेखी की जा रही है. ऐसे संस्थानों में पठन-पाठन के साथ तमाम सुविधाओं को नजर अंदाज किया जाता है. कोचिंग एक्ट है लागूराज्य भर में कोचिंग एक्ट 2010 लागू है. इस एक्ट के प्रावधान के मुताबिक बिना पंजीयन के एक ही कोचिंग संस्थान नहीं चलना है. पंजीयन की अवधि तीन वर्ष रखी गयी है. कोचिंग एक्ट की शर्तों के मुताबिक संस्थान नहीं चलाने वाले पर जुर्माना भी लगाना है. जानकारी के अनुसार कोचिंग संस्थान आरंभ करने पूर्व संचालक को रजिस्ट्रेशन कराने हेतु आवेदन देना पड़ता है. जिसकी जांच होती है. सभी बिंदुओं पर जांच में खरे उतरने वाले संस्थानों का पंजीयन होता है.रजिस्ट्रेशन के लिए तय पैमाना कोचिंग संस्थान के भौतिक संरचना, कमरे, बेंच-डेस्क, छात्र-छात्राओं की संख्या के अनुरूप जगह, छात्रों के बैठने की जगह, शौचालय, पेयजल व्यवस्था, छात्रों के लिए कॉमन रूप की उपलब्ध है अथवा नहीं तथा वर्गवार शिक्षण शुल्क सहित शिक्षकों की योग्यता की जांच होती है. इसके बाद ही कोचिंग संस्थान का पंजीयन होता है. पहले भी कई बार कोचिंग संस्थानों को पत्र भेज कर रजिस्ट्रेशन के लिए कहा गया था, लेकिन अब तक कुछ खास नहीं हो पाया है. अब सरकार के निर्देश का इंतजार है. डॉ ब्रज किशोर सिंह, डीइओ

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