फोटो है.2 व 3 में कैप्सन: प्रवचन करते बाबा व उपस्थित श्रद्धालु अलौली. सत्संग सबसे बड़ा यज्ञ है, इससे बड़ा कोई यज्ञ नहीं, भक्ति की शुरुआत कहां से होगी, कहा नहीं जा सकता है. सभी अपने-अपने स्तर से भक्ति की शुरुआत करते हैं. भक्ति की शुरुआत सत्संग में बैठने से ही होती है. उक्त बातें शनिवार को हाइस्कूल अलौली परिसर में महर्षि मेहीं परमहंस महाराज के परम शिष्य महुआ सहरसा आश्रम के बाबा अरविंद ने कहीं. उन्होंने कहा कि सत्संग में बैठ कर ध्यान से सुनना दूसरी भक्ति है. सत्संग के प्रति भावनात्मक प्रेम रखना, सत्संग से प्रेरणा, ज्ञान मिलता है. बिना गुरु ज्ञान पाना संभव नहीं है. गुरु सात किस्म के होते है. बारी बारी से उसकी चर्चा विस्तार से की. कहा कि सेवा से ही फल मिलता है. वहीं उन्होंने सत्संग में बैठे सभी भक्तों को ओम नम: शिवाय के उच्चारण का अर्थ समझाया. उक्त दो दिवसीय सत्संग का आयोजन महर्षि मेंही सत्संग समिति अलौली द्वारा आयोजित किया गया. मौके पर आयोजक राजेश कुमार आर्य, ओम प्रकाश सुमन, सुरेंद्र यादव,गजेंद्र मंडल, रवींद्र साह, किरण पौधार, रामानंद पौधार, महावीर यादव आदि उपस्थित थे.
सत्संग से बड़ा कोई यज्ञ नहीं : बाबा अरविंद
फोटो है.2 व 3 में कैप्सन: प्रवचन करते बाबा व उपस्थित श्रद्धालु अलौली. सत्संग सबसे बड़ा यज्ञ है, इससे बड़ा कोई यज्ञ नहीं, भक्ति की शुरुआत कहां से होगी, कहा नहीं जा सकता है. सभी अपने-अपने स्तर से भक्ति की शुरुआत करते हैं. भक्ति की शुरुआत सत्संग में बैठने से ही होती है. उक्त बातें […]
