हरियाली के अभाव में विलख रहा है कृषि कार्यालय

फोटो है 8 में खगडि़या. कृषि क्षेत्र में फरकिया का नाम एशिया के तर्ज पर जाना जाता है, क्योंकि यहां सर्वाधिक मक्के की उपज होती है. लेकिन जिस कृषि कार्यालय से करोड़ों रुपये कृषि क्षेत्र में खर्च किये जाते हैं. वहीं कृषि कार्यालय खुद हरियाली के अभाव में आज भी विलख रहा है. कृषि कार्यालय […]

फोटो है 8 में खगडि़या. कृषि क्षेत्र में फरकिया का नाम एशिया के तर्ज पर जाना जाता है, क्योंकि यहां सर्वाधिक मक्के की उपज होती है. लेकिन जिस कृषि कार्यालय से करोड़ों रुपये कृषि क्षेत्र में खर्च किये जाते हैं. वहीं कृषि कार्यालय खुद हरियाली के अभाव में आज भी विलख रहा है. कृषि कार्यालय ही उजरा हुआ नजर आ रहा है तो क्षेत्र के खेतों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है. वैसे भी इस बार क्षेत्र के किसानों को खाद व यूरिया के लिए नाकों चने चबाने पड़ रह हैं. एक तरफ किसानों के खेत सूखे -सूखे नजर आ रहे हैं तो दूसरी तरफ कृषि कार्यालय पूरा सूखा सूखा दिखता है. परिसर में सिर्फ भेड़, बकरी तथा पशु नजर आते हैं. इधर एक कृषक राम बली सिंह ने बताया कि कृषि कार्यालय के समक्ष क्यारी बना फुलों का वृक्ष रहना अति आवश्यक है. जहां कृषक को हरा भरा वृक्ष व फुल को देख मन प्रफुल्लित हो सके. उन्होंने बताया कि बीते एक दशक से कृषि कार्यालय की यही दशा है. जहां हरियालियों के अभाव में कृषि कार्यालय नहीं बल्कि पशु कार्यालय दिखाई पड़ता है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >