खगड़िया : शारदीय नवरात्र के अवसर पर संहौली दुर्गास्थान में भव्य शिवचर्चा का आयोजन किया गया. शिव भक्त गुरू भाई गणेश सिंह के नेतृत्व में आयोजित शिव चर्चा में गुरू भाई विपिन ,विनय, सेठजी, शिवजी, गुरुभाई सहित कई गुरु बहना शिरोमणि, बीणा, शांति मालती ने जगत गुरू शिव की महिमा का बखान किया. शिव भक्तों को गुरू बहन शिरोमणी ने बताया कि जगत गुरू शिव की शिष्यता ही अब एक मात्र विकल्प है, शिव जन-जन के गुरू है. इनको अपनाकर जीवन को सफल बना सकते है.
सन्हौली दुर्गा मंदिर में शिव चर्चा का आयोजन
खगड़िया : शारदीय नवरात्र के अवसर पर संहौली दुर्गास्थान में भव्य शिवचर्चा का आयोजन किया गया. शिव भक्त गुरू भाई गणेश सिंह के नेतृत्व में आयोजित शिव चर्चा में गुरू भाई विपिन ,विनय, सेठजी, शिवजी, गुरुभाई सहित कई गुरु बहना शिरोमणि, बीणा, शांति मालती ने जगत गुरू शिव की महिमा का बखान किया. शिव भक्तों […]

उन्होंने बताया कि वर्त्तमान समय में मानवीय गुण प्राय: लुप्त हो गया है. मानवीय गुण के अभाव में आज सत्मार्ग का राह गुरू से ही संभव है. बिना गुरू, प्राणी, खासकर मानव अपनी पूर्णता को प्राप्त नहीं कर सकता. गुरू मात्र परमात्मा शिव है इन्हें आदि गुरू व जगत गुरू भी कहा गया है. गुरू शिवदाता गुरू हैं और जितने भी तथा – कथित शरीर धारी गुरू है.
वे प्रदाता गुरू के श्रेणी में आते है. जब दाता गुरू संभव है तो क्यों नहीं हम उनसे शिष्य के रूप में जुड़कर मानवीय गुण प्राप्त कर शिव के जैसा कार्य करें. वहीं शिव गुरू भाई गणेश ने उपस्थित भक्तों को बताया कि शिष्य भाव का जगना ही शिष्य होना है. और उन शिष्य का संबंध गुरू से होना ही जीवन का आधार हैं.
उन्होंने पहला सूत्र दया मांगना बताते हुए कहा कि शिव आप मेरे गुरू है ,मैं आपका शिष्य हूं, मुझ शिष्य पर दया कर दीजिए. दूसरा सूत्र चर्चा करना बताया इसके माध्यम से उन्होने चर्चा करने का रूपान्तरण करते हुए बताया कि शिव मेरे गुरू हैं आपके भी हो सकते हैं इन्हें अपना गुरू बनाकर अपना सर्वाथ सिद्ध करें.
तीसरा सूत्र नमन करना बताते हुए कहा कि ”नम: शिवाय” पंचाक्षर मंत्र से अपने गुरू शिव को मन ही मन एक दीवा रात्रि में कम से कम 108 बार प्रणाम करने के रहस्य को बताया ताकि इनके करने से अच्छे परिणाम मिलते है. मौके पर अरुण कुमार, सोनी देवी,राजकुमारी देवी, किरण देवी, मंजू देवी आदि मौजूद थे.