अवकाश ग्रहण करने के बाद भी डाॅ अामोद बच्चों को दे रहे हैं मुफ्त शिक्षा का दान

खगड़िया : शिक्षा व्यक्तित्व को गढ़ती है. शिक्षक दिवस के अवसर पर ऐसे शिक्षकों के व्यक्तित्व को जिले के लोग हमेशा याद करते हैं. वास्तविक शिक्षा सोचने की कला प्रदान करती है. परिस्थिति की पाठशाला ही इंसान को वास्तविक शिक्षा देती है. शिक्षा मानक को चरितार्थ करते हुये समाज उत्थान के लिए समर्पित व्यक्तित्व के […]

खगड़िया : शिक्षा व्यक्तित्व को गढ़ती है. शिक्षक दिवस के अवसर पर ऐसे शिक्षकों के व्यक्तित्व को जिले के लोग हमेशा याद करते हैं. वास्तविक शिक्षा सोचने की कला प्रदान करती है. परिस्थिति की पाठशाला ही इंसान को वास्तविक शिक्षा देती है.

शिक्षा मानक को चरितार्थ करते हुये समाज उत्थान के लिए समर्पित व्यक्तित्व के रूप में राष्ट्रपति पुरस्कार व अन्य पुरस्कारों से सम्मानित आर्दश शिक्षक के रूप में ख्यातिप्राप्त डा. आमोद कुमार के शैक्षणिक योगदान को लेाग सदैव याद करते हैं. डा. आमोद कुमार जेएनकेटी इंटर विद्यालय से प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत के बाद भी शैक्षणिक गतिविधियां जारी रखे हुये हैं.
वे आरंभिक काल 1985 से ही समाज के ना सिर्फ निचले पायदान तक शिक्षा को पहुंचाने का कार्य किये हैं. बल्कि उंचे पायदान पर रहने वालों में नैतिकता, आध्यात्मिक का बीजारोपण कर अभिनव निर्माण में सदैव लगे रहते हैं. यही कारण है कि डा. आमोद को नई और पूरानी पीढ़ियों में समन्वयक का दर्जा प्राप्त है. डा. आमोद विज्ञान और आध्यात्म के माध्यम से इंसान को सर्वोच्च उंचाई का रास्ता दिखाने का काम हर मंच से करते रहते हैं.
डा. आमोद अपने अथक प्रयास से बाल संस्कार, परिचर्चाओं, सकारात्मक विषयगत चिंतन, छोट छोट समुहों के बीच सदैव शैक्षणिक विकास के लिए चिंतन करते रहते हैं. डा. आमोद मानव के लिए शिक्षा, मानव को सर्मिपित शिक्षा, मानव के परिवेश के साथ राष्ट्रहित व समाजहित के संवेदानाओं के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं. डा. आमोद छात्रों के साथ अभिभावकों के बीच अनुशासन का प्रेरणा स्त्रोत रहे हैं.
समाज में शिक्षा का दीप जला रहे शिक्षाविद् जर्नादन राय
परबत्ता. प्रखंड क्षेत्र के कवेला पंचायत अन्तर्गत डुमरिया खुर्द गांव निवासी साहित्यकार सेवानिवृत्त शिक्षाविद् जनार्दन राय आज के शिक्षकों के बीच अनुशासन का प्रेरणा स्रोत हैं. अपनी सारी उम्र साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में समर्पण करने वाले श्री राय की पहचान शिक्षकों के बीच में अलग है. आज के शिक्षक शायद इतनी अनुशासन रुप से कार्य करने में सक्षम नहीं है.
जिले हीं नहीं राज्य स्तर पर शिक्षाविद् में इनकी पहचान हैं. डुमरिया खुर्द गांव निवासी साहित्यकार सेवानिवृत्त शिक्षाविद् जनार्दन राय अनुशासन के प्रति काफी गंभीर हैं. पूरे अध्यापन काल के दौरान कभी भी अपने कक्षा में कुर्सी पर बैठकर नहीं पढाए. यहां तक ही नहीं छात्रों की उपस्थिति पंजी भी खड़े होकर भी बनाते थे.
साहित्यकार सेवानिवृत्त शिक्षाविद् की प्रमुख कृतियों पाठ्य पुस्तक के अलावा गीत अगीत, देवाधीदेव, प्ररेणा प्रदीप, रीत पूनीत आदि हैं. ओर कई शैक्षणिक पुस्तक भी लिखे हैं. इसके अलावा नाटककार भी इनकी प्रमुख उपलब्धि हैं. सेवानिवृत्त के 37 वर्ष बीत जाने के बाद भी श्री राय आज भी 94 वर्ष की आयु में पठन- पाठन का कार्य बरकरार रखें हैं ओर समाज में शिक्षा का दीप जला रहे हैं.
राज्य सरकार से मांगी मुफ्त शिक्षा दान के लिए अनुमति
गोगरी. शिक्षा जगत में अगर जिले में किसी शिक्षक की चर्चा होती है तो लोग गोगरी जमालपुर नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड नंबर 15 निवासी इंद्रदेव ठाकुर का नाम लेने से नहीं चूकते हैं. शिक्षा के प्रति उनका लगाव ही ऐसा है कि 31 मई 2011 को कन्या मध्य विद्यालय जमालपुर से अवकाश करने के बाद भी अभी तक सरकारी अनुमति से शिक्षक बने हुए हैं. वे मुफ्त शिक्षा का दान दे रहे हैं. अवकाश ग्रहण करने के बाद उन्हें अचानक शिक्षा से विमुख होना नागवार गुजरा.
बच्चों के बीच एक शिक्षक के रूप में हमेशा से चर्चित रहने वाले व्यक्ति अचानक बच्चों को शिक्षा नहीं दे पाने के कारण विचलित होने लगे थे. उन्होंने राज्य सरकार को मुफ्त शिक्षा देने के लिए अनुमति मांगी. राज्य सरकार ने जिले को निर्देश दिया कि शिक्षक इंद्रदेव ठाकुर आजीवन किसी भी विद्यालय में जाकर क्लास ले सकते हैं और बच्चों को शिक्षा का दान दे सकते हैं.
बस क्या था शिक्षक इंद्रदेव ठाकुर ने जिले के विभिन्न विद्यालयों में प्रतिदिन पहुंचकर क्लास लेना शुरू कर दिया. यह उनकी दिनचर्या में शामिल है. वे विद्यालय के अलावे मकतब में भी अपने शिक्षा का मुफ्त दान देते हैं. संयोगवश जिले से बाहर रहने पर भी सरकारी विद्यालयों में जाकर बच्चों को शिक्षा बांटते हैं. ऐसे शिक्षकों को जिले के लेाग हमेशा नमन करते हैं.

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