आवास सहायक ने फूस की झोपड़ी को बता दिया छत का मकान, होगी कार्रवाई

खगड़िया : अभी बेलदौर में बिचौलिया से जियो टैगिंग करवाने के मामले की जांच पूरी भी नहीं हुई कि दूसरे आवास सहायक की काली करतूत सामने आ गयी है. गरीबों को पक्का मकान मुहैया कराने के लिये संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना में आवास सहायक की मनमानी जारी है. पहले बेलदौर प्रखण्ड से चोढ़ली आवास सहायक […]

खगड़िया : अभी बेलदौर में बिचौलिया से जियो टैगिंग करवाने के मामले की जांच पूरी भी नहीं हुई कि दूसरे आवास सहायक की काली करतूत सामने आ गयी है. गरीबों को पक्का मकान मुहैया कराने के लिये संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना में आवास सहायक की मनमानी जारी है.

पहले बेलदौर प्रखण्ड से चोढ़ली आवास सहायक ताहिर हसन की जगह बिचौलिये के माध्यम से लाभार्थियों के जियो-टैगिंग करने के बाद अब सदर प्रखण्ड से ग्रामीण आवास सहायक द्धारा गलत मंशा से योग्य लाभार्थी को अयोग्य बताकर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित रखने का ताजा मामला सामने आया है.
पूरे मामले में अधिकारियों की चौखट से निराश होने के बाद लाभुक ने जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में गुहार लगायी थी. जहां एडीएम भूपेन्द्र प्रसाद यादव ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद डीडीसी राम निरंजन सिंह को उक्त ग्रामीण आवास सहायक पर कार्रवाई करने को कहा है. जांच में आवास सहायक के कारनामें प्रमाणित होने के बाद इनपर कार्रवाई तय मानी जा रही है.
जानकारी के मुताबिक दुर्गापुर की काजल देवी का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रतिक्षा सूची में शामिल था. इन्हें छोड़ बाद वाले लाभार्थी को लाभ दे दिया. जब काजल देवी को जानकारी मिली तो पहले इसकी शिकायत स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा योजना के लाभ से वंचित रखने वाले ग्रामीण आवास सहायक से की गयी.
प्रखण्ड कार्यालय में पीड़ित महिला ने गुहार लगायी. सभी जगह इनकी बातों को अनसूना कर दिया गया. थक हार कर महिला ने सात मार्च 2018 को अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समझ यह मामला उठाया.
यहां से बीडीओ को नोटिस जारी हुआ.बताया जाता है कि बीडीओ ने ग्रामीण आवास सहायक से जांच कराते हुए पीजीआरओ को रिपोर्ट भेज दी. सूत्र बताते हैं कि आवास सहायक ने बीडीओ को यह प्रतिवेदन सौपा था कि काजल देवी को पक्का का मकान है.इसलिये उन्हें पीएम आवास योजना को लाभ नहीं दिया गया. इसी रिपोर्ट के आधार पर अनुमंडल पीजीआरओ ने शिकायतकर्ता के वाद को अस्वीकृत कर दिया.
सदर प्रखंड के रहीमपुर से जुड़ा है मामला : बता दें कि पूरा मामला सदर प्रखण्ड के रहीमपुर मध्य पंचायत का है. पंचायत के दुर्गापुर गांव की काजल देवी बीते कई माह से परेशान थीं. बताया जाता है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से आवास सहायक ने वंचित कर दिया था.
दो महीने से अधिकारियों की चौखट चूमने के बाद थक हार कर व्यवस्था से पीड़ित काजल ने जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में शिकायत कर इंसाफ की गुहार लगायी. यहां दो माह तक चली सुनवाई के दौरान न सिर्फ जांच कराई कराई गई. बल्कि इन्हें योजना का लाभ दिलाने के प्रयास के साथ-साथ पंचायत के ग्रामीण आवास सहायक के विरुद्ध कार्रवाई के भी आदेश दिये हैं.
महिला ने नहीं मानी हार, अब मिला इंसाफ
आवास सहायक की रिपोर्ट के आधार बीडीओ द्वारा सौंपे गये प्रतिवेदन के आधार पर अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने महिला के आवेदन को अस्वीकृत कर दिया. काजल देवी ने हार नहीं मानी. जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में अपील दायर कर इस महिला ने न्याय की गुहार लगाई. फिर से इस मामले की जांच कराई गई.
जानकारी के मुताबिक लोक शिकायत एडीएम ने डीडीसी को नोटिस जारी कर उक्त शिकायतकर्ता की शिकायत के आलोक में रिपोर्ट मांगा. बताया जाता है कि वरीय अधिकारी के पास मामला पहुंचने के बाद दूघ का दूघ और पानी का पानी यानी सच सामने आ गया.
सूत्र के मुताबिक 10 अगस्त को बीडीओ ने जांच जिला स्तर रिपोर्ट भेजी है. जिसमें उन्होंने कहा है कि शिकायतकर्ता का घर फूस का है. ऐसे में आवास सहायक द्वारा फूस के घर को पक्का मकान बताने के पीछे क्या राज है, यह किसी से छिपा हुआ नहीं है.
अब काजल का होगा अपना आशियाना
जांच में महिला का दावा सही व ग्रामीण आवास सहायक द्वारा गलत व भ्रामक रिपोर्ट समर्पित किये जाने की बातें सामने आने के बाद पूर्व में हुई गलती को सुधारा जा रहा है. बीडीओ राजेश कुमार राजन जिला स्तर पर रिपोर्ट भेजकर यह बताया है कि वित्तीय वर्ष 19-20 में उन्हें(शिकायतकर्ता) पीएम आवास का लाभ दिया जा रहा है. बीडीओ ने यह भी कहा है कि इनका रजिस्ट्रेशन करा दिया गया है.
इधर, एडीएम भूपेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि बीडीओ के रिपोर्ट के बाद यह साफ हो गया कि ग्रामीण आवास सहायक के द्वारा किसी गलत मंशा से भ्रामक व गलत प्रतिवेदन दिया गया. जिस कारण उक्त लाभुक को पीएम आवास योजना के लाभ के लिये दो माह तक परेशान होना पड़ा. बताया कि गलत रिपोर्ट देने वाले सहायक पर कार्रवाई को लेकर डीडीसी को लिखा गया है.

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