खगड़िया : मानसी प्रखंड के अमनी निवासी रंजीत सिंह व अखिलेश सिंह जमीन के मुआवजे के लिये करीब दो दशक से भू-अर्जन तथा बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-टू के दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं. बताया जाता है कि साल 1992-93 में बदला-कराचीन बांध के निर्माण के लिये विभाग के द्वारा इन दोनों भूधारियों से जमीन लिये गये थे.
जमीन अधिग्रहण के दौरान इन्हें जमीन के एवज में मुआवजा देने का भरोसा दिलाया गया था. 25 साल बीत जाने के बाद भी इन्हें जमीन का मुआवजा नहीं मिल पाया. मुआवजे की राशि नहीं मिलने से ये परेशान हैं, बीते कई साल से ये दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं. लेकिन इन्हें जमीन का मुआवजा नहीं मिल पाया है.
जमीन मुआवजे की राशि नहीं मिल पाने से नाराज भू-धारी रंजीत व अखिलेश ने कुछ दिन पूर्व ही जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में अर्जी देकर मुआवजे दिलाने की मांग की थी. बताया जाता है यहां इन्हें मुआवजे की राशि तो नहीं दिलाई जा सकी. लेकिन मुआवजा भुगतान को लंबित रखने वाले भू-अर्जन/बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल-टू के पदाधिकारियों व कर्मियों पर कार्रवाई करने की अनुशंसा लोक शिकायत एडीएम भूपेन्द्र प्रसाद यादव ने डीएम से की है.
दोनों विभागों ने झाड़ा पल्ला : जानकारी के मुताबिक शिकायतकर्ता की शिकायत के बाद जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय के द्वारा जिला भू-अर्जन पदाधिकारी तथा बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल-टू के कार्यपालक अभियंता को नोटिस जारी कर इनसे रिपोर्ट मांगी गई थी.
सूत्र बताते हैं कि इन दोनों विभागों ने अब तक मुआवजा भुगतान नहीं होने के लिये खुद को कसूरबार नहीं माना है. दोनों विभागों ने एक दूसरे को जिम्मेवार बताते हुए पल्ला झाड़ लिया है. ऐसे में अब यह सवाल उठ रहे हैं कि अगर लापरवाही विभाग ने नहीं की तो क्या गलती भू-धारियों ने जमीन देकर कर दी.
बाढ़ नियंत्रण विभाग का ये रहा जवाब
वहीं बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल टू के कार्यपालक अभियंता ने भू-अर्जन विभाग को उक्त परियोजना के लिये जमीन अर्जन के प्रस्ताव के बाद 74 लाख 40 हजार 104 रुपये आवंटित किये जाने की जानकारी दी है. साथ ही यह बताया है कि जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के द्वारा अर्जित भूमि का भुगतान करते हुए भूमि के रकवा की सूचना उनके कार्यालय को नहीं दी गई.
कार्यपालक अभियंता ने एडीएम को भेजे प्रतिवेदन में यह कहा है कि 15 मई 2014 को जल संसाधन विभाग के द्वारा भू-अर्जन से संबंधित कार्य विशेष भू-अर्जन पदाधिकारी भागलपुर से कराने के आदेश जारी किये गए थे. इसके बावजूद जिला-भू-अर्जन पदाधिकारी के द्वारा न तो दी राशि वापस की गई और न ही उक्त परियोजना से जुड़े अभिलेख ही वापस किये.
यानी जिला भू-अर्जन विभाग की ही तरह बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल टू ने भी सारा दोष दूसरे विभाग (भू-अर्जन)पर ही डाल दिया. ऐसे में यह सवाल उठना भी लाजमी है कि अगर जिला भू-अर्जन विभाग ने राशि व अभिलेख वापस नहीं लौटाया तो अधियाची विभाग (बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल टू) ने 2009 से 2014 तक, फिर उसके बाद यानी आज तक कितनी बार अभिलेख व राशि की मांग भू-अर्जन विभाग से की.
भुगतान के साथ-साथ दोषियों पर कार्रवाई की अनुशंसा
दो माह तक चली सुनवाई के बाद इस मामले में लोक शिकायत एडीएम भूपेन्द्र प्रसाद यादव ने भू-धारी को मुआवजे दिलाने की दिशा में बाढ़ नियंत्रण विभाग-टू के कार्यपालक अभियंता को साकारात्मक दृष्टिकोण से त्वरित कार्रवाई करने को कहा है. साथ ही मुआवजा भुगतान में शिथिलता बरतने वाले पदाधिकारीयों व कर्मियों को चिन्हित कर उनके विरुद्व कार्रवाई की अनुशंसा डीएम से की है.
एडीएम ने जारी आदेश में कहा है कि 25 साल बीत जाने के बाद भी भू-धारी को मुआवजा का भुगतान नहीं किया जाना खेद का विषय है. निश्चित रुप से यह विभागीय उदासीनता का अद्वितीय उदाहरण है. इन्होंने यह भी कहा है कि अगर समय पर निर्धारित मुआवजा का भुगतान कर दिया जाता तो एक बड़ी राशि की बचत होती, क्योंकि वर्तमान परिस्थिति में काफी बढ़े हुए दर पर संबंधित भू-धारियों को मुआवजे का भुगतान करना पड़ेगा. जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा.
भू-अर्जन विभाग ने कहा समय पर नहीं मिला आवंटन
जानकारी के मुताबिक लोक शिकायत एडीएम को प्रतिवेदन सौंप कर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने यह बताया है कि भू-अर्जन वाद संख्या-08/1992-93 एवं 01/2009-10 के माध्यम से कार्यपालक अभियंता बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल टू से बदला-नगरपाड़ा तटबंध के निर्माण के लिये 33.25 एकड़ जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव प्राप्त हुआ था.
लेकिन अधियाचना के साथ आवंटन प्राप्त नहीं हुआ. बताया कि अधियाची विभाग को राशि आवंटन के लिये वर्ष 2006 एवं 2007 में पत्राचार किया गया. राशि आवंटन के अभाव में यह परियोजना व्ययगत हो गई. जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने यह भी बताया है कि अधियाची विभाग के द्वारा 16 मार्च 2009 को 74 लाख 40 हजार 104 रुपये का आवंटन भेजा गया था.
लेकिन परियोजना पूर्व में ही व्ययगत हो जाने के कारण भू-अर्जन की कार्रवाई पुनः प्रारम्भ नहीं की जा सकी. इन्होंने पीडी खाते में राशि जमा होने की बातें कही है. ऐसे में यह सबाल उठ रहे हैं कि वर्ष 2009 में आवंटन प्राप्त होने के बाद जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने भू-अर्जन की कार्रवाई पुनःआरंभ करने को लेकर क्यों नहीं आगे की कार्रवाई आरंभ की.
