दोषी स्वास्थ्यकर्मी पर कार्रवाई कब

मामला सदर अस्पताल से 15 ऑक्सीजन सिलिंडर गायब होने का जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने सिविल सर्जन की कार्यशैली पर उठाये थे गंभीर सवाल खगड़िया : सदर अस्पताल से 15 ऑक्सीजन सिलिंडर गायब होने के मामले में तत्कालीन भंडारपाल पर कार्रवाई की समय सीमा समाप्त 30 अक्टूबर को समाप्त हो गयी लेकिन अब तक […]

मामला सदर अस्पताल से 15 ऑक्सीजन सिलिंडर गायब होने का

जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने सिविल सर्जन की कार्यशैली पर उठाये थे गंभीर सवाल
खगड़िया : सदर अस्पताल से 15 ऑक्सीजन सिलिंडर गायब होने के मामले में तत्कालीन भंडारपाल पर कार्रवाई की समय सीमा समाप्त 30 अक्टूबर को समाप्त हो गयी लेकिन अब तक सिविल सर्जन को कार्रवाई की फुरसत नहीं मिली है. ऐसे में सवाल उठता है कि जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के आदेश के बावजूद भी सीएस कार्रवाई से क्यों कतरा रहे हैं. जबकि सात वर्ष इस पुराने मामले में कार्रवाई के नाम पर अब तक सिर्फ स्पष्टीकरण किये जाने को लेकर जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी द्वारा सिविल सर्जन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाया जा चुका है.
बता दें कि इस मामले की शिकायत की सुनवाई बाद फैसला देते हुए जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी विजय कुमार सिंह ने सिविल सर्जन को 30 अक्टूबर तक आरोपी भंडारपाल अवधेश यादव पर कार्रवाई कर रिपोर्ट समर्पित करने का निर्देश दिया था. साथ ही सात बरसों में सिर्फ स्पष्टीकरण पूछे जाने पर जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने सिविल सर्जन कड़ी फटकार लगाते हुए उनके कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़ा किया है. पूरे मामले में डीएस ने बताया है कि ऑक्सीजन सिलिंडर गायब करने के आरोपी भंडारपाल पर कार्रवाई करने का अधिकारी सिविल सर्जन को है.
लोक शिकायत अधिनियम के तहत शिकायतकर्ता दीपक कुमार अकेला के द्वारा की गयी शिकायत के बाद हुई सुनवाई में स्वास्थ्य विभाग की इस बड़ी लापरवाही का खुलासा हुआ था. बताया जाता है कि शिकायत नहीं की गयी होती तो यह मामला फाइलों में ही दबा रह जाता. बता दें कि मामला एक बार फिर तूल पकड़ा तो तत्कालीन भंडारपाल अवधेश कुमार से अस्पताल उपाधीक्षक ने 22 जून एवं 31 अगस्त 2017 को स्पष्टीकरण भी पूछा. अस्पताल उपाधीक्षक ने वरीय पदाधिकारी को रिपोर्ट भेज कर भंडारपाल का जबाव तथ्यात्मक नहीं होने की रिपोर्ट देते कार्रवाई की अनुशंसा भी की गयी. लेकिन कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया.
सात बरसों तक दबा रहा मामला: सात वर्ष पूर्व सदर अस्पताल से 15 ऑक्सीजन सिलिंडर गायब होने के मामले में दोषियों पर कार्रवाई तो दूर स्वास्थ्य विभाग के बड़े साहबों ने गायब करने के आरोपी भंडारपाल से इसका जबाव तक नहीं मांगा. हां आरोपी भंडारपाल से तब जबाव मांगा गया है. जब इस मामले की शिकायत लोक शिकायत अधिनियम के तहत दर्ज करायी गयी. जहां से सिविल सर्जन को नोटिस जारी कर ऑक्सीजन सिलिंडर चोरी/गायब होने के मामले में जबाव व उनके स्तर से कार्रवाई के संबंध में रिपोर्ट तलब किया गया.
जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी विजय कुमार सिंह के द्वारा जारी किये गए नोटिस व मांगे जबाव के दबाव में अरोपी भंडारपाल से स्पष्टीकरण तो पूछा गया. लेकिन कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गयी. ऐसे में सवाल उठता है कि इतने गंभीर मामले में स्वास्थ्य विभाग के बाबू सहित सिविल सर्जन क्यों उदासीन बने रहे? पूरे मामले को सात बरसों तक फाइलों में दबा कर रखने के पीछे कहीं माल की महिमा तो नहीं.
42 की जगह 24 सिलिंडर का प्रभार सौंपा
सदर अस्पताल उपाधीक्षक ने 9 सितम्बर 2017 को सीएस को यह रिपोर्ट भेजी कि तत्कालीन भंडारपाल ने 42 की जगह 24 सिलिंडर का ही प्रभार सौंपा गया है. सदर अस्पताल 15 ऑक्सीजन सिलिंडर गायब होने का मामला वर्ष 2010 के पूर्व का है. स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार 14 अगस्त 2009 को स्वास्थ्य कर्मी अवधेश कुमार को भंडारपाल का प्रभार प्राप्त हुआ था. तब उन्हें 22 ऑक्सीजन सिलिंडर का प्रभार सौंपा गया था. इसके बाद दो फरवरी 2010 को 20 नए ऑक्सीजन सिलिंडर की खरीद की गयी. जिसे भंडारपाल श्री यादव को प्रभार दिया गया. इस तरह सिलिंडर की संख्या बढ़कर 42 हो गयी. लेकिन अपने स्थानांतारण के बाद तत्कालीन भंडारपाल श्री यादव ने वर्ष 2010 में मात्र 27 सिलिंडर का ही प्रभार नए भंडारपाल को सौंपा. हालांकि तब से यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा. अब जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के द्वारा कार्रवाई के आदेश बाद यह मामला फिर से गरमा गया है.
सात वर्ष पहले सदर अस्पताल से ऑक्सीजन सिलिण्डर गायब होने के मामले में अब तक कार्रवाई नहीं हो पाना यह बताता है कि सिविल सर्जन द्वारा लापरवाही बरती गयी है. मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा होने के कारण ऐसे मामलों की अनदेखी नहीं की जा सकती. सिविल सर्जन को उक्त भंडारपाल से स्पष्टीकरण पूछते हुए कठोर कार्रवाई कर 30 अक्टूबर तक करने का निर्देश दिया गया था.
विजय कुमार सिंह, जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी.
ऑक्सीजन सिलिंडर गायब होने के मामले की पुन: जांच कराई जा रही है. अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी मीरा सिंह के नेतृत्व में फोर मेन जांच टीम का गठन किया गया है. जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद इस मामले में दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी.
डाॅ अरूण कुमार सिन्हा, सिविल सर्जन खगड़िया.
तत्कालीन भंडारपाल को बचाने के लिये मुझे फंसाया जा रहा है. इस साजिश में सदर अस्पताल के कई बाबू शामिल हैं. हमने सभी ऑक्सीजन सिलिंडर का प्रभार तत्कालीन भंडारपाल को सौंप दिया है. मुझ पर लगाये जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं.
अवधेश यादव, तत्कालीन भंडारपाल.
जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के आदेश की अनदेखी किये जाने से सरकार की यह महत्वाकांक्षी कदम पर बट्टा लग रहा है. लोक प्राधिकार द्वारा आदेश के अनुपालन में आनाकानी से लोक शिकायत अधिनियम को लागू करने के औचित्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है. कार्रवाई नहीं होने पर मुंगेर आयुक्त के यहां अपील की गयी है.
दीपक कुमार अकेला, शिकायतकर्ता.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >