चौथम बीडीओ आये लपेटे में

खगड़िया : चौथम प्रखंड के बीडीओ मंजू कुमारी कणकण पर विभागीय कार्रवाई चलेगी. जिले में करोड़ों रुपये की लागत से सोलर लाइट लगाये गये थे. लेकिन इसमें अनियमितता एवं मनमानी की गई थी. विभागीय नियम निर्देशों को ताक पर रखकर पंचायत सचिवों एवं मुखिया ने चयनित कंपनी की जगह घटिया कंपनी के सोलर लाइट लगाये […]

खगड़िया : चौथम प्रखंड के बीडीओ मंजू कुमारी कणकण पर विभागीय कार्रवाई चलेगी. जिले में करोड़ों रुपये की लागत से सोलर लाइट लगाये गये थे. लेकिन इसमें अनियमितता एवं मनमानी की गई थी. विभागीय नियम निर्देशों को ताक पर रखकर पंचायत सचिवों एवं मुखिया ने चयनित कंपनी की जगह घटिया कंपनी के सोलर लाइट लगाये थे.

इस मामले में बीडीओ पर अप्रत्यक्ष रूप कार्रवाई नहीं करने का आरोप है. इतना ही नहीं बीडीओ ने राज्य सूचना आयोग सहित डीएम के आदेश की लगातार अनदेखी करते रहे. जिसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी जय सिंह ने अब चौथम बीडीओ पर कार्रवाई के आदेश जारी करते हुए सदर एसडीओ को पत्र लिखा है.

विभागीय सूत्र के मुताबिक जिलाधिकारी ने एसडीओ को बीडीओ पर प्रपत्र क गठित करने तथा उसे जिला स्तर पर अविलंब भेजने को कहा है. उल्लेखनीय है आरोप गठित होने के बाद इसे राज्य स्तर पर भेजा जाएगा. फिर इनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई आरंभ की जाएगी.
क्यों हुई कार्रवाई
बीडीओ पर यूं ही नहीं आरोप पत्र गठित करने के आदेश दिये गए है. सूत्र बताते है कि भ्रष्टाचार के एक महत्वपूर्ण मामले में उन्होंने (बीडीओ) लगातार अपने वरीय पदाधिकारी के आदेश की अनदेखी की. कई बार जिला स्तर से उन्हें पत्र लिखा गया. हिदायत व चेतावनी तक दी गई .लेकिन उन्होंने आदेश का अनुपालन कराना मुनासिब नहीं समझा. बताया जाता है कि डीएम ने राज्य सूचना आयोग के आदेश का अनुपालन कराने के लिए चौथम बीडीओ को कई बार पत्र लिखा. लेकिन हर बार उन्होंने डीएम के आदेश की अनदेखी की.
वेतन भी रुका फिर भी अनुपालन नहीं
विभागीय जानकारी के मुताबिक राज्य सूचना आयोग के आदेश के आलोक में डीएम बीते करीब 21 माह से लगातार बीडीओ को पत्र लिखते आ रहे है. 3 फरवरी 2016 को डीएम ने गड़बड़ी करने वाले कर्मियों पर कार्रवाई करते हुए एक सप्ताह में बीडीओ से मांगी थी. रिपोर्ट अप्राप्त रहने के कारण 5 मार्च, 9 अप्रैल, 9 जून 2016 को भी जिला स्तर से बीडीओ को पत्र लिखकर स्मारित किया गया था. लेकिन उन पर डीएम के पत्र/निर्देश का कोई असर नहीं हुआ. विभागीय सूत्र बताते हैं कि 16 जून 2017 को डीएम ने कार्रवाई रिपोर्ट अप्राप्त रहने के कारण बीडीओ से स्पष्टीकरण पूछा था तथा 24 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा था.
लेकिन डीएम के इस आदेश को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. सूत्र बताते है कि बीडीओ ने जिला स्तर पर न तो कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट भेजी और न ही पूछे गए स्पष्टीकरण का जवाब दिया. बताया जाता है कि 21 जुलाई को फिर से बीडीओ को पत्र लिखा गया. फिर से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई. स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देने के कारण फिर से पूछा गया और लगातार आदेश की अनदेखी किये जाने के कारण डीएम ने बीडीओ के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी. जिला पंचायती राज पदाधिकारी के द्वारा भी बीडीओ को 4 अप्रैल व 21अगस्त 2017 को पत्र लिखकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए जिला स्तर पर रिपोर्ट भेजने को कहा गया था. लेकिन बार-बार आदेश जारी होने, स्पष्टीकरण पूछे जाने एवं वेतन रोके जाने के बाद भी बीडीओ ने कार्रवाई करते हुए जिला स्तर पर रिपोर्ट नहीं भेजी.
30 को होनी है सुनवाई, डीडीसी किये गए तलब
सोलर लाइट अनियमितता के मामले में भले ही अबतक पूरी कार्रवाई नहीं की गई हो लेकिन मामला यह पुराना होने चला है. करीब 4 वर्ष पूर्व जिले के आरटीआइ कार्यकर्ता शैलेन्द्र सिंह तरकर सूचना प्राप्त करने के आयोग गए थे. तब से अबतक कई बार इस मामले की सुनवाई हो चुकी है. सुनवाई में भाग लेने स्वयं डीडीसी आयोग जा चुके है. 30 नवंबर को भी सुनवाई होनी है. जिसमें सूचना आयुक्त बीके वर्मा स्वयं सूचना के साथ डीडीसी बुलाया है.
करना था आरोप गठित
उल्लेखनीय है यह मामला सोलर लाइट से जुड़ा हुआ है. वर्ष 2010 के पूर्व जिले में करोड़ों रुपये की लागत से सोलर लाइट लगाये गय थे. लेकिन इसमें अनियमितता एवं मनमानी की गई थी. विभागीय नियम निर्देशों को ताक पर रखकर पंचायत सचिवों एवं मुखिया ने चयनित कंपनी की जगह घटिया कंपनी के सोलर लाइट लगाये थे.
मामले का खुलासा होने के बाद दोषी लोगों के विरुद्ध योजना की राशि वसूली के लिए सार्टिफिकेट केस करने एवं पंचायत सचिव पर प्रपत्र क गठित करने का आदेश जारी हुआ था. सभी बीडीओ के साथ -साथ चौथम बीडीओ को भी निर्देश जारी हुआ था. उन्हें करीब 21 माह से कई पत्र लिखा जा रहा है. अब इनपर ही कार्रवाई की तलवार लटक गई है.

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