नाद व फर्श का होगा निर्माण

राहत. मनरेगा योजना से मवेशियों का होगा कल्याण खगाड़िया : इनसान की जिंदगी में खुशियां लाने वाला मनरेगा अब मवेशियों की जिंदगी को भी संवारेगा. अब पशुपालन से जुड़े किसानों के लिये खुशखबरी है. सरकार के निर्देशानुसार अब मनरेगा योजना के पैसे से पशुओं के लिये नाद व फर्श आदि जैसे काम किये जा सकेंगे. […]

राहत. मनरेगा योजना से मवेशियों का होगा कल्याण

खगाड़िया : इनसान की जिंदगी में खुशियां लाने वाला मनरेगा अब मवेशियों की जिंदगी को भी संवारेगा. अब पशुपालन से जुड़े किसानों के लिये खुशखबरी है. सरकार के निर्देशानुसार अब मनरेगा योजना के पैसे से पशुओं के लिये नाद व फर्श आदि जैसे काम किये जा सकेंगे. जिले की एक बड़ी आबादी पशुओं पर निर्भर करती है. पशुपालन कर राज्य के लाखों व जिले के हजारों लोग अपने परिवार का भरण-पोषण करते है. लेकिन सरकारी आंकड़ा बताता है कि पशु बदहाल है. इस बात में काफी सच्चाई भी नजर आती है. हजारों/लाखों परिवारों के जीविकोपॉर्जन करने वाली पशु को बैठने तक की व्यवस्था नहीं हो पाती है. खाने के लिए पक्के नाद नहीं है.
पशुओं के साथ पशुपालकों को मिलेगी राहत : अब पशुओं के साथ पशुपालकों को भी राहत मिलने वाली है. पशुपालकों एवं पशुओं को राहत देने के उद्देश्य से व्यापक पैमाने पर पक्के फर्श,नाद व यूरिन टैंक बनवाने का निर्णय लिया गया है. वो भी सरकारी राशि से. अबतक मिट्टी वर्क के लिए मशहूर रहे मनरेगा योजना के तहत पक्के काम भी होंगे. राज्य सरकार ने मनरेगा योजना के तहत पशुओं के लिए पक्के फर्श, नाद एवं यूरीन टैंक बनवाने का आदेश जारी किया है. डीडीसी अब्दुल बहाव अंसारी के अनुसार मवेशियों के लिए बनने वाले पक्के फर्श,नाद एवं यूरीन टैंक के लिए कोई टारगेट नहीं है. यानी पात्रता रखने वाले सभी पशुपालको का इसका
लाभ मिलेगा.
प्रदेशभर में 65 लाख है दुधारू पशु
सरकारी आंकड़े के मुताबिक राज्यभर में दुधारू पशु की संख्या 65 लाख के करीब है. जिसमें गाय की संख्या 43 लाख जबकि 22 लाख भैंस है. इस पशुधन का लगभग 53 प्रतिशत स्वामित्व गांव में रहने वाले 37 प्रतिशत भूमिहीन एवं लघु सीमान्त किसान के पास है. डीडीसी श्री अंसारी ने बताया कि पूंजी के अभाव में एक बड़ी संख्या में पशुपालक अपने मवेशियों को खाने के लिए पक्का नाद व आराम से बैठने के लिए फर्श का निर्माण नहीं करा पाते है. कच्चे फर्श मवेशियों के मल-मूत्र से गीला एवं कीचड़मय हो जाता है. बरसात के दिनों में तो स्थिति और बदतर हो जाती है. कीचड़ व गंदगी के कारण पशु बीमार भी पड़ जाते है. दुग्ध उत्पादन पर भी असर पड़ता है. जिससे पशुपालक को नुकसान होता है. कच्चे फर्श के कारण गोबर ब मल-मूत्र भी बेकार हो जाते है. जबकि गोबर-गैस एवं वर्मी कंपोस्ट का निर्माण इसी से होता है.

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