रमजानुल मुबारक का अंतिम जुमा अकीदत के साथ की अदा

रमजानुल मुबारक का अंतिम जुमा अकीदत के साथ की अदा

बलिया बेलौन इबादत का महिना रमजानुल मुबारक का 30 वां रोजा एवं अंतिम जुमा अलविदा की नमाज लोगों ने अकीदत के साथ अदा किये. मस्जिदों में लोगों की भीड़ थी. रमजानुल मुबारक का महिना समाप्त होने और ईद उल फितर की खुशी लोगों में देखी गयी. जुमा की नमाज के दौरान तकरीर करते हुए जामे मस्जिद रघुनाथपुर के मौलाना मेराज आलम ने कहा की रमजानुल मुबारक जैसा बाबरकत महिना हम सब से विदा हो रहा है, जिसने भी अकीदत के साथ रोजा रखे बदले अल्लाह रब्बुल इज्जत अपने बंदों को दोजख की आग से हिफाजत फरमाते हैं. रोजेदार को जन्नत नसीब होगी, रोजेदार का इमान ताजा होता है. रोजेदार का गुनाह माफ कर दिया जाता है. मगफिरत होती हे. रोजा रखने से परहेजगारी पैदा होती है. रोजे की फजीलत बताते हुए कहा की रोजा इनसान को तक्वा और परहेज़गार बनाता है. इस माह की इबादत का शवाब कई गुणा बढ़ा दी जाती है. तकरीर में बताये की साहिबे निशाब वाले को फितरा.जकात निकाल कर गरीबों के बीच तकसीम करना वाजिब है. ताके गरीबों को भी ईद की खुशी मिले, जकात का मशला बताते हुए कहा की जिस के पास भी साढ़े बावन तोला चांदी, या साढ़े सात तोला सोना है, या इस की कीमत के बराबर दौलत है तो उस को अपनी आमदनी से जकात निकालना जरूरी बताया. हुड़दंग करने किसी तरह की आपत्ति जनक पोस्ट करने से बचना चाहिए.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By RAJKISHOR K

RAJKISHOR K is a contributor at Prabhat Khabar.

Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >