गंगा व महानंदा नदी के कटाव पर नहीं लगी रोक

गंगा व महानंदा नदी के कटाव पर नहीं लगी रोक

अमदाबाद प्रखंड क्षेत्र में गंगा, महानंदा नदी से कटाव व बाढ़ यहां के लोगों की गंभीर समस्या है. कटाव को रोने के लिए करोड़ों रूपये खर्च किये गये पर इसका खास लाभ नहीं मिल रहा है. बड़ी आबादी कटाव से प्रभावित होकर विस्थापित हो चुकी है. कई गांव का अस्तित्व गंगा नदी के कटाव के कारण मिट चुके है. आधा दर्जन सरकारी विद्यालय भी गंगा व महानंदा नदी के गर्भ में समा चुकी है. 40 वर्ष से अधिक समय से गंगा एवं महानंदा नदी से हो रहे कटाव का दंश यहां के लोग झेल रहे हैं. 1980 से 1990 के बीच भीषण कटा हुआ. जिसके जद में आकर नवरसिया, रामायणपुर, कुकड़िया दियारा, गुआगाछी गांव कट कर गंगा नदी के गर्भ में समा गया. 1990 से 2000 के बीच महानंदा नदी से बालमुकुंद टोला, छबिलाल टोला एवं बहरसाल गांव कटकर महानंदा नदी में विलीन हो गया. 2000 से 2010 बीच कोशी जल्ली टोला, जमुनतल्ला, गोलाघाट, गांव गंगा नदी के कटाव के चपेट में आकर गंगा नदी में विलीन हो चुका है. 2010 से 2020 के बीच खट्टी किशनपुर, खट्टी टोला, धन्नी टोला इत्यादि गांव कटकर गंगा नदी के गर्भ में समा गया. एक दर्जन से अधिक गांवों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है. मवि नवरसिया, प्रावि कुकड़िया, उमवि धन्नी टोला, उमवि बंकू टोला, प्रावि खट्टी किशनपुर, मवि खट्टी टोला, प्रावि खट्टी पार दियारा, प्रावि युसूफ टोला, उमवि बबला बन्ना, प्रावि बबला बन्ना उत्तर भाग आदि कटकर गंगा एवं महानंदा नदी में विलीन हो चुका है. कुछ विद्यालयों का निर्माण अन्य स्थानों पर कराया गया. कई विद्यालय दूसरे विद्यालयों में मर्ज कर दिया गया. हरदेव टोला, मेघु टोला, सूबेदार टोला, कीर्ति टोला, युसूफ टोला, बबला बन्ना इत्यादि गांव में कटाव हुई है. आंशिक रूप से गांव भी बचा हुआ है. उक्त गांव तटवर्ती इलाकों में बसे हैं. गंगा नदी में जलस्तर बढ़ने के साथ ही पानी की धार तेज होने पर यह गांव कटाव से प्रभावित होते हैं. खासकर मेघु टोला व बबला बन्ना गांव के बीच कटाव से ग्रामीण अत्यधिक प्रभावित होते हैं. गंगा नदी के कटाव से कीर्ति टोला, सूबेदार टोला, युसूफ टोला, भादु टोला, मेघु टोला गांव के सैकड़ों परिवार कटाव से विस्थापित हो चुके हैं. कई विस्थापित परिवार कटाव से विस्थापित होकर समीपवर्ती राज्य पश्चिम बंगाल एवं झारखंड सहित अन्य स्थानों पर पलायन कर चुके हैं. कटाव निरोधात्मक कार्य किया था लेकिन गंगा एवं महानंदा नदी के कटाव के आगे यह कार्य बौने साबित हुई है. पूर्व में गंगा नदी के कटाव पर अंकुश लगाने के लिए हरदेव टोला से पार दियारा तक में 67 करोड़ की लागत राशि से बोल्डर क्रेटिंग किया था. बाद में मेघु टोला से बबला बन्ना तक में 14 करोड़ की लागत राशि से बल्ला पाईलिंग एवं गेबियन व जियोबेग क्रेटिंग का कार्य कराया था. बोल्डर क्रेटिंग एवं गेबियन व बल्ला पाईलिंग के कार्य से कुछ स्थानों पर कटाव तो रुक गया. कटाव पर रोक लगाने को लिए बोल्डर क्रेटिंग का कार्य कराया है. पार दियारा से 15 करोड़ से 550 मीटर एवं बबला बन्ना गांव के निकट 16 करोड़ से 500 मीटर एवं 130 मीटर में बोल्डर क्रेटिंग का कार्य कराया है. हाल के महीनों में पार दियारा के भादू टोला गांव के लोग कटाव से करीब 20 परिवारों बेघर हो गये थे. यहां के लोगों के मन में यक्ष प्रश्न है कि आखिर अमदाबाद से होकर बहने वाली गंगा एवं महानंदा नदी के कटाव पर कब अंकुश लगेगा.

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By RAJKISHOR K

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