सदर अस्पताल का डायलिसिस सेंटर गरीब मरीजों के लिए बना जीवन रक्षक

सदर अस्पताल का डायलिसिस सेंटर गरीब मरीजों के लिए बना जीवन रक्षक

By RAJKISHOR K | January 16, 2026 6:38 PM

– मुफ्त सेवा से सैकड़ों को राहत कटिहार सदर अस्पताल में संचालित डायलिसिस सेंटर गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है. जहां निजी अस्पतालों या बाहर के डायलिसिस सेंटरों में एक बार डायलिसिस कराने पर लगभग 2500 रुपये तक खर्च करना पड़ता है. सदर अस्पताल में यह सेवा पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है. खास बात यह है कि इस सुविधा का लाभ केवल कटिहार जिले के ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के मरीज भी उठा रहे हैं. पूर्णिया समेत कई जिलों से मरीज नियमित रूप से कटिहार पहुंचकर डायलिसिस करा रहे हैं. सदर अस्पताल के डायलिसिस सेंटर पर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. हालत यह है कि यहां रोज इतनी भीड़ हो रही है कि डायलिसिस बेड की संख्या बढ़ाने की मांग जोर पकड़ने लगी है. फिलहाल अस्पताल में कुल पांच डायलिसिस बेड उपलब्ध हैं. सुबह सात बजे से डायलिसिस की प्रक्रिया शुरू होती है, जो शाम सात से आठ बजे तक लगातार चलती रहती है. डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम पूरे समर्पण के साथ मरीजों की सेवा में जुटे हुए है. अगर दिसंबर माह के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल 326 मरीजों का डायलिसिस किया गया. इनमें से 292 मरीजों को निशुल्क सेवा दी गई. जबकि 34 मरीज कैश श्रेणी में शामिल रहे. यह आंकड़ा अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजना के तहत संचालित यह डायलिसिस सेंटर गरीब मरीजों के लिए कितना महत्वपूर्ण साबित हो रहा है. कई ऐसे मरीज हैं, जिनके लिए नियमित डायलिसिस कराना जीवन और मृत्यु का सवाल होता है. इस मुफ्त सुविधा ने उन्हें नई जिंदगी दी है. राशन कार्ड धारकों को एक रुपये का भी खर्च नहीं सरकार की डायलिसिस योजना के तहत जिन मरीजों के पास राशन कार्ड है. उन्हें डायलिसिस कराने में एक रुपये का भी खर्च नहीं उठाना पड़ता है. ऐसे मरीजों का पूरा इलाज और डायलिसिस पूरी तरह निशुल्क किया जाता है. जिन मरीजों के राशन कार्ड में नाम दर्ज नहीं है. उन्हें डायलिसिस के लिए 1797 रुपये अदा करने पड़ते हैं. हालांकि इस राशि में ईपीओ और आयरन प्री जैसी जरूरी इंजेक्शन भी शामिल होती हैं. जिनकी बाजार में कीमत लगभग 1200 से 1500 रुपये तक होती है. इस तरह देखा जाए तो यह शुल्क भी निजी अस्पतालों की तुलना में काफी कम है. क्या है डायलिसिस डायलिसिस एक चिकित्सीय प्रक्रिया है. जिसके जरिए खून को साफ किया जाता है. जब किसी व्यक्ति की किडनी ठीक से काम करना बंद कर देती है या उसकी कार्यक्षमता काफी कम हो जाती है. तब शरीर से विषैले तत्व, अतिरिक्त पानी और अपशिष्ट पदार्थ बाहर नहीं निकल पाते. ऐसे में मशीन की मदद से खून को साफ करने की प्रक्रिया को डायलिसिस कहा जाता है. यह किडनी फेल मरीजों के लिए जीवन रक्षक उपचार है. क्यों कराना पड़ता है डायलिसिस जब किडनी 85 से 90 प्रतिशत तक खराब हो जाती है. तब मरीज को डायलिसिस की जरूरत पड़ती है. किडनी का मुख्य काम खून को साफ करना और शरीर में संतुलन बनाए रखना होता है. किडनी फेल होने पर शरीर में जहरीले तत्व जमा होने लगते हैं. जिससे मरीज की हालत गंभीर हो सकती है. ऐसे में डायलिसिस के जरिए किडनी का काम अस्थायी रूप से मशीन द्वारा किया जाता है. महीने में कम से कम पांच बार करानी पड़ती है डायलिसिस आमतौर पर एक किडनी मरीज को सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस करानी पड़ती है. यानी महीने में लगभग आठ से 12 बार डायलिसिस जरूरी होती है. मरीज की हालत और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इसकी संख्या घट-बढ़ भी सकती है. कुल मिलाकर कटिहार सदर अस्पताल का डायलिसिस सेंटर गरीब मरीजों के लिए संजीवनी साबित हो रहा है. जरूरत है कि बढ़ती मांग को देखते हुए यहां बेड और संसाधनों की संख्या बढ़ाई जाय. ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीजों को समय पर जीवन रक्षक सेवा मिल सके.

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