Shamsherganj Ward 2 Waterlogging: कटिहार से सरोज कुमार की रिपोर्ट: कटिहार नगर निगम के वार्ड नंबर दो अंतर्गत शमशेरगंज मोहल्ले के निवासी वर्षों से स्थानीय जनप्रतिनिधियों और निगम प्रशासन की घोर उदासीनता का शिकार हैं. इस मोहल्ले में एक ही वर्ग की करीब पन्द्रह सौ (1500) से अधिक की घनी आबादी बसती है. इस पूरे मोहल्ले के प्रवेश और निकास के लिए ‘लाइफलाइन’ मानी जाने वाली एकमात्र मुख्य खड़ंजा सड़क पिछले 28 वर्षों से मरम्मत और देखरेख के अभाव में बदहाली के आंसू रो रही है. सड़क की ईंटें गायब हो चुकी हैं, जिसके कारण हल्की बारिश होते ही यह मार्ग झील में तब्दील हो जाता है.
1998 में बना था ढाई किलोमीटर का खड़ंजा, अब तक नहीं हुआ जीर्णोद्धार
मोहल्ले के प्रबुद्ध नागरिक मो. मोबारक, मो. तबारक, मो. असफर और मो. हबीबुर्रहमान सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1998 में तत्कालीन पंचायत मुखिया द्वारा इस ढाई किलोमीटर लंबी खड़ंजा सड़क का निर्माण कराया गया था, ताकि ग्रामीणों का आवागमन सुचारू रह सके. इसके बाद यह इलाका नगर निगम में शामिल हो गया. निगम द्वारा नियमित रूप से होल्डिंग टैक्स समेत कई अन्य तरह के टैक्स की वसूली तो की जाती है, लेकिन सड़क की सुध लेने वाला कोई नहीं है. खड़ंजा पूरी तरह टूट चुका है और सड़क के बीचो-बीच जानलेवा गड्ढे बन गए हैं.
अधूरे पीसीसी निर्माण से बढ़ी मुश्किलें, गलियों से गुजरने की मजबूरी
वार्ड वासियों के अनुसार, इस ढाई किलोमीटर लंबी सड़क को पीसीसी (पक्का) सड़क में तब्दील करने का कार्य शुरू तो किया गया था. मोहल्ले के साइड से दो चरणों में कुछ हिस्से का पीसीसी निर्माण पूरा भी कर लिया गया, लेकिन बीच का एक बड़ा हिस्सा आज भी अधूरा और खड़ंजा ही छोड़ दिया गया है.
देर रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद इस अधूरे मार्ग की स्थिति इस कदर खराब हो गई है कि लोगों का मुख्य पथ तक पहुंचना नासूर बन गया है. लोग किसी तरह काम-धंधे और स्कूल जाने के लिए मुख्य सड़क पर आने को लेकर गंदे पानी से सराबोर तंग गलियों और कूचियों से होकर गुजरने को मजबूर हैं.
पंप से पानी निकालकर सिर्फ कोरम पूरा करता है नगर निगम
स्थानीय समाजसेवी सूरज कुमार, संजय ठाकुर, रमण सिंह, मो. तौसीफ, मो. इद्रीश, मो. तजमूल, मो. आसिफ और सन्नी कुमार चौहान ने निगम की कार्यशैली पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि जलजमाव वाले स्थानों पर मिट्टी या राविश (ईंट का चूरा) गिराने के लिए वार्ड पार्षद से लेकर निगम के आला अधिकारियों तक बार-बार लिखित आवेदन दिए गए, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती.
तीन-चार दिन पूर्व जब भयंकर जलजमाव हुआ, तो निगम ने स्थायी समाधान करने के बजाय महज़ एक पंपिंग सेट वाहन भेजकर पानी खिंचवा दिया और अपना कोरम पूरा कर लिया. बीती रात हुई दोबारा बारिश से स्थिति फिर जस की तस हो गई है और पूरी सड़क पानी में डूब गई है.
शेष कार्य का टेंडर प्रक्रियाधीन, निगम नहीं दे रहा ध्यान: वार्ड पार्षद
इस पूरे मामले पर अपनी लाचारी व्यक्त करते हुए वार्ड नंबर दो की स्थानीय पार्षद मुसर्रत जहां ने बताया कि उक्त खड़ंजा सड़क को पीसीसी में तब्दील करने का प्रयास किया जा रहा है. वर्तमान में करीब एक सौ फीट सड़क का निर्माण कार्य पूरा करा लिया गया है. सड़क की लंबाई (ढाई किलोमीटर) अधिक होने के कारण इस कार्य को कई चरणों में किया जाना तय हुआ है. शेष बचे हुए भाग के निर्माण के लिए कागजी प्रक्रिया और टेंडर फिलहाल प्रक्रियाधीन (Under Tender Process) है.
पार्षद ने स्वीकारा कि उन्होंने खुद जलजमाव वाले गड्ढों को भरने और तात्कालिक राहत के लिए राविश गिराने को लेकर नगर निगम प्रशासन को कई बार लिखित अनुरोध किया है, लेकिन निगम स्तर से ध्यान नहीं दिए जाने के कारण आज शमशेरगंज मोहल्ले की जनता इस नारकीय स्थिति को झेलने के लिए विवश है. मोहल्ले वासियों ने जिला अधिकारी से मामले में हस्तक्षेप कर अविलंब सड़क निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है.
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