कटिहार जिले के प्राणपुर प्रखंड अंतर्गत रोशना बाजार की मुख्य सड़क इस मानसूनी बारिश में बदहाली के चरम पर पहुंच चुकी है. जलनिकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण यह व्यस्त मुख्य मार्ग पूरी तरह जलमग्न होकर तालाब में तब्दील हो चुका है.
सड़क पर जमा घुटने भर गंदे पानी और कीचड़ ने न केवल स्थानीय दुकानदारों का व्यापार ठप कर दिया है, बल्कि राहगीरों, मरीजों और स्कूली बच्चों का पैदल चलना भी दूभर कर दिया है. प्रशासनिक उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी के खिलाफ अब स्थानीय ग्रामीणों और व्यापारियों का आक्रोश फूट पड़ा है.
घुटने भर पानी में गिरकर चोटिल हो रहे लोग और स्कूली बच्चे
रोशना बाजार की सड़क की स्थिति बेहद खतरनाक बन चुकी है:
- दैनिक हादसे: सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे गंदे पानी में छिप गए हैं, जिसके कारण आए दिन बाइक सवार, साइकिल चालक और ई-रिक्शा (टोटो) पलट रहे हैं. कई लोग गिरकर चोटिल हो चुके हैं और कपड़े कीचड़ से सन जाते हैं.
- स्कूली बच्चों की फजीहत: ड्रेस और जूते हाथ में लेकर बच्चे पानी में से गुजरने को मजबूर हैं, जिससे उनके अभिभावकों में भारी नाराजगी है.
- बाजार का कारोबार प्रभावित: दुकानों के ठीक सामने नाबदान और बारिश का गंदा पानी जमा रहने से ग्राहकों ने बाजार आना कम कर दिया है, जिससे व्यापारी वर्ग को सीधा आर्थिक नुकसान हो रहा है.
अमदाबाद और लाभा को जोड़ने वाली मुख्य लाइफलाइन की उपेक्षा
यह सड़क केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि सामरिक और यातायात की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है:
- चार प्रखंडों का संपर्क मार्ग: इसी मार्ग से होकर अमदाबाद जाने वाली महत्वपूर्ण बांध वाली सड़क गुजरती है.
- जिला मुख्यालय का रास्ता: यह सड़क लाभा और प्राणपुर होते हुए सीधे जिला मुख्यालय कटिहार को जोड़ती है.
- हजारों का आवागमन: प्रतिदिन हजारों की आबादी इस सड़क से सफर करती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र के विधायक, कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी इसी रास्ते से अपने काफिले के साथ गुजरते हैं, लेकिन किसी ने भी इस नारकीय स्थिति को सुधारने की जहमत नहीं उठाई.
जल्द बने नाला और सड़क, वरना होगा उग्र चक्का जाम
समस्या से त्रस्त नागरिकों ने प्रशासन से आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है:
- प्रमुख मांगें: ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है कि सड़क के दोनों किनारों पर तत्काल पक्के नाले (ड्रेनेज) का निर्माण कराया जाए और गड्ढों को भरकर सड़क का पुनर्निर्माण किया जाए.
- आंदोलन का अल्टीमेटम: स्थानीय समाजसेवियों और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क की मरम्मत और जलजमाव की निकासी के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे सड़क पर उतरकर जोरदार धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम आंदोलन करने को विवश होंगे.