कदवा में ₹3.33 लाख के सरकारी 'आरओ' पड़े हैं बेकार: 15वीं वित्त आयोग की योजना में भ्रष्टाचार के आरोप

कदवा प्रखंड क्षेत्र में 15वें वित्त आयोग की योजना के तहत लगाए गए आरओ वाटर टैंक खराब गुणवत्ता और प्रशासनिक लापरवाही के कारण महीनों से बंद पड़े हैं. लाखों की लागत से लगे ये टैंक अब कबाड़ बन चुके हैं. ग्रामीणों ने सरकारी राशि के दुरुपयोग और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.

कदवा प्रखंड क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों में पन्द्रहवीं वित्त आयोग की योजना के तहत लगाए गए आरओ (RO) वाटर टैंकों की गुणवत्ता और उनके रखरखाव को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं. जिस योजना का मुख्य उद्देश्य उमस भरी भीषण गर्मी में आम लोगों को स्वच्छ और शीतल पेयजल उपलब्ध कराना था, वह घटिया निर्माण सामग्री और प्रशासनिक उदासीनता के कारण समय से पहले ही दम तोड़ चुकी है. प्रखंड के अधिकांश टैंक लगने के कुछ ही महीनों के भीतर पूरी तरह खराब होकर कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं.

इन पंचायतों में महीनों से बंद पड़े हैं लाखों के वाटर टैंक

ग्रामीणों से मिली शिकायत के अनुसार, क्षेत्र के धार्मिक स्थलों और शैक्षणिक संस्थानों के पास लगाए गए आरओ प्लांट शो-पीस बने हुए हैं:

  • सागरथ पंचायत: इस पंचायत के वार्ड संख्या 8 स्थित दुर्गा मंदिर परिसर, वार्ड संख्या 3 स्थित काली मंदिर परिसर और वार्ड संख्या 7 स्थित नयाटोला चौक के समीप हनुमान मंदिर परिसर में लाखों की लागत से स्थापित किए गए आरओ वाटर टैंक पिछले कई महीनों से पूरी तरह ठप पड़े हैं.
  • परभेली पंचायत: इसी तरह परभेली पंचायत के वार्ड संख्या 11 स्थित रामदयाल उत्क्रमित उच्च विद्यालय परिसर में लगा आरओ वाटर टैंक भी तकनीकी खराबी के कारण लंबे समय से बंद है, जिससे स्कूल आने वाले छात्र-छात्राओं को चापाकल का अशुद्ध पानी पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है.

मानकों की अनदेखी और सरकारी राशि के दुरुपयोग का आरोप

स्थानीय ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रत्येक आरओ वाटर टैंक को चालू करने में सरकारी खजाने से 3 लाख 33 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि का भुगतान संबंधित संवेदक (एजेंसी) को किया गया था.

इस योजना में निर्धारित तकनीकी मानकों और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री की सरेआम अनदेखी की गई है. मुनाफे के चक्कर में घटिया मशीनें लगा दी गईं, जो पहली ही गर्मी का लोड नहीं संभाल सकीं. कई बार प्रखंड मुख्यालय और संबंधित तकनीकी अधिकारियों को लिखित व मौखिक रूप से खराबी की सूचना दी गई, लेकिन आज तक न तो मशीनों को दुरुस्त कराया गया और न ही दोषी ठेकेदार पर कोई जुर्माना या कार्रवाई हुई. यह सीधे तौर पर जनता के पैसे का दुरुपयोग है.

आरटीआई और जिला प्रशासन से जांच की मांग, आंदोलन की सुगबुगाहट

लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी बूंद-बूंद स्वच्छ पानी के लिए तरस रहे कदवा के ग्रामीणों में अब व्यवस्था के खिलाफ भारी आक्रोश है. लोगों का कहना है कि अगर यह योजना सही ढंग से काम करती, तो क्षेत्र में पानी से होने वाली मौसमी बीमारियों पर लगाम लगती. ग्रामीणों ने कटिहार जिला प्रशासन और जिलाधिकारी से मांग की है कि इस पूरी योजना की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, दोषियों पर कानूनी कार्रवाई हो और सभी बंद पड़े आरओ वाटर टैंकों को अविलंब मरम्मत कराकर चालू किया जाए ताकि आम जनता को राहत मिल सके.


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By Prabhat khabar news desk

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