पवित्र सावन महीना शुरू होते ही कटिहार जिले के कुरसेला में राष्ट्रीय राजमार्ग 31 (NH-31) के किनारे बसा पूरा बाजार भक्तिमय और केसरिया रंग में रंगा नजर आ रहा है. सड़क के दोनों किनारों पर शिव भक्ति का प्रतीक केसरिया ध्वज, बोल-बम के वस्त्र, कांवर और पूजन सामग्रियां सज चुकी हैं. देवघर (बाबाधाम) जाने वाले कांवरियों के स्वागत और सुविधा के लिए स्थानीय दुकानदारों ने एनएच किनारे अपनी दुकानें विशेष रूप से सजाई हैं.
सात्विक हुईं भोजन-नाश्ते की दुकानें, लहरा रहा केसरिया झंडा
सावन महीने की पवित्रता को देखते हुए एनएच-31 किनारे स्थित होटल, रेस्टोरेंट और चाय-नाश्ते की दुकानें पूरी तरह सात्विक हो गई हैं:
- सात्विक भोजन की पहचान: दुकानदारों ने अपनी दुकानों के ऊपर केसरिया झंडे लगाकर यह संकेत दिया है कि यहां कांवरियों और श्रद्धालुओं के लिए बिना लहसुन-प्याज का शुद्ध सात्विक भोजन उपलब्ध है.
- दूसरे राज्यों से पहुंच रहे श्रद्धालु: स्थानीय निवासियों के अनुसार, असम, पश्चिम बंगाल, मेघालय, त्रिपुरा और पड़ोसी देश नेपाल से बाबाधाम जाने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों का आवागमन सावन शुरू होने से एक सप्ताह पहले से ही जारी है. पहली सोमवारी नजदीक आते ही कांवरिया वाहनों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है.
वापसी में रुकते हैं कांवरिया वाहन
एनएच-31 से गुजरने वाले अधिकतर कांवरिया वाहन जाते समय बहुत कम समय के लिए रुकते हैं.
हालांकि, बाबाधाम से जल चढ़ाकर वापसी के दौरान अधिकांश गाड़ियां भोजन, नाश्ता और विश्राम के लिए कुरसेला बाजार में रुकती हैं, जिससे स्थानीय कारोबारियों की अच्छी बिक्री होती है. दुकानदारों का कहना है कि यह सिलसिला सावन के बाद पूरे भादो महीने तक लगातार बना रहता है.
सेवा समितियों ने लगाए शिविर, बांटे जा रहे फल व दवाइयां
कांवरियों की सेवा के लिए स्थानीय स्तर पर विभिन्न बोल-बम सेवा समितियां भी पूरी तरह सक्रिय हो गई हैं:
- नि:शुल्क सेवा: एनएच किनारे लगाए गए राहत शिविरों में श्रद्धालुओं के लिए नि:शुल्क शरबत, गरम खीर, हलवा, चाय और प्राथमिक चिकित्सा (दवाइयों) की व्यवस्था की गई है.
केसरिया झंडों, बोल-बम के जयकारों और सेवा भावना से गूंजता कुरसेला बाजार इन दिनों देवघर जाने वाले शिवभक्तों के लिए आस्था, विश्राम और ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.
