Maize Drying: कटिहार के कदवा से अर्चना राय की रिपोर्ट: कटिहार जिले के कदवा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत चपरघट-कुर्सेल-झौवा मुख्य संपर्क पथ पर इन दिनों राहगीरों और वाहन चालकों के लिए सफर करना किसी खतरे से खाली नहीं रह गया है. क्षेत्र में मक्के की कटनी और थ्रेसिंग का काम पूरा होते ही किसानों ने अपनी फसलों को सुखाने के लिए मुख्य पिचों (सड़कों) और ऊंचे पुलों को अपना निजी खलिहान बना लिया है. पक्की सड़कों पर मीलों तक बिखरे मक्के के दानों के कारण वाहनों के टायर तेजी से स्लिप (फिसल) कर रहे हैं, जिससे इस मार्ग पर हर दिन ‘मौत का खेल’ चल रहा है. स्थानीय प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी मूकदर्शक बना हुआ है.
फिसल रहे दोपहिया वाहनों के टायर, पुल के नीचे नदी होने से बड़ा खतरा
स्थानीय ग्रामीणों और नियमित रूप से सफर करने वाले राहगीरों के अनुसार, तेज रफ्तार से आने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों के टायर जैसे ही सड़क पर फैले मक्के के गोल दानों पर चढ़ते हैं, गाड़ियां पूरी तरह अनियंत्रित हो जाती हैं.
इस मार्ग पर रोजाना दर्जनों छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं होना आम बात बन चुकी है. भुक्तभोगी एक मोटरसाइकिल सवार ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि कल दोपहर मक्के के ऊपर अचानक ब्रेक लगाने से उनकी बाइक बुरी तरह फिसल गई, जिससे उन्हें हाथों और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं. सबसे भयावह स्थिति नदियों पर बने ऊंचे पुलों (Bridges) की है, जहाँ दोनों तरफ मक्का सुखाया जा रहा है. यहाँ तनिक भी संतुलन बिगड़ने पर गाड़ी सीधे नीचे उफनती नदी में गिर सकती है, जिससे किसी दिन भारी जानमाल का नुकसान तय है.
पिछले साल के खौफनाक हादसों से भी नहीं लिया सबक
ग्रामीणों की चेतावनी: क्षेत्र के बुजुर्गों ने बताया कि पिछले वर्ष (पिछले सीजन) में भी इसी घोर लापरवाही के कारण इस रूट पर दर्जनों गंभीर सड़क हादसे हुए थे. कई ट्रैक्टर, पिकअप वैन और दर्जनों बाइक सवार गंभीर रूप से घायल होकर महीनों अस्पताल में भर्ती रहे थे. कई परिवारों के चिराग बुझते-बुझते बचे थे. बेहद अफसोस की बात है कि पिछले साल के खौफनाक मंजर से न तो स्थानीय किसानों ने कोई सबक लिया और न ही स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षात्मक कदम उठाए.
एम्बुलेंस और स्कूली बच्चे हो रहे परेशान, वैकल्पिक जगह की मांग
सड़क को खलिहान बना देने से न केवल सामान्य ट्रैफिक प्रभावित हो रहा है, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं (एम्बुलेंस) और धूप में आने-जाने वाले स्कूली बच्चों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय निवासी सुनील मंडल ने बताया: “हमने कई बार किसानों को सड़क के बीच मक्का फैलाने से मना किया, लेकिन वे झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं. इसकी लिखित और मौखिक सूचना स्थानीय अंचल प्रशासन और थाने को भी दी गई है, लेकिन अब तक अधिकारियों ने क्षेत्र का दौरा तक नहीं किया है.”
कदवा के जागरूक नागरिकों ने जिला पदाधिकारी (DM) से मांग की है कि:
- मुख्य सड़कों और पुल-पुलियों पर मक्का या अन्य फसलें सुखाने पर तुरंत आधिकारिक रोक लगाई जाए.
- नियमों का उल्लंघन करने वाले दबंग किसानों पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाया जाए.
- किसानों की सहूलियत के लिए पंचायत स्तर पर खाली पड़े सरकारी मैदानों या ऊंचे स्थानों को ‘सामुदायिक खलिहान’ के रूप में चिह्नित किया जाए.
क्या कहते हैं कानूनी नियम? (Motor Vehicles Act)
यातायात नियमों के विशेषज्ञ और अधिवक्ताओं के अनुसार, मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) और भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत किसी भी सार्वजनिक सड़क, हाईवे या संपर्क मार्ग को बाधित करना, उस पर अतिक्रमण करना या उसे असुरक्षित बनाना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है. ऐसा करने पर दोषी व्यक्ति के खिलाफ 500 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक का आर्थिक जुर्माना और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोप में कानूनी जेल की सजा का स्पष्ट प्रावधान है. अब देखना यह है कि कदवा प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद जागता है या समय रहते इन सड़कों को अतिक्रमण मुक्त कराता है.
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