हल्की बारिश में कच्ची सड़क पर चलना हो जाता दूभर
हल्की बारिश में कच्ची सड़क पर चलना हो जाता दूभर
– छह दशक बाद भी सड़क को टोलेवासी कर रहे जद्दोजहद, आवागमन में परेशानी – मापी के बाद भी नहीं बन पा रही है सड़क कटिहार छह दशक बीत जाने के बाद भी पूरब पंचायत के पुआरी टोला वार्ड नंबर दो में विकास की समुचित लौ नहीं पहुंची है. शिक्षा को लेकर भले ही पुआरी टोला से सटे इंटर तक विद्यालय का निर्माण किया गया है. लेकिन पक्की सड़क के लिए आज भी उक्त टोला मोहल्ला के करीब दो सौ की आबादी किसी रहनुमा का बाट जोह रही है. पंचायत स्तर पर प्रयास किया गया लेकिन जमीन की जिच में फंस कर दलन पूरब पंचायत का पुआरी टोला का चालीस घर रह गया है. साठ वर्ष बाद के बाद भी उक्त टोले मोहल्ले के लोग कच्ची सड़क के नाम पर पगडंडी के सहारे ही आवागमन करने को विवश हो रहे हैं. उक्त टोला में यादव व मंडल की संख्या अधिक है. उक्त टोले के लोगों का कहना है, दलन पूरब पंचायत का यह टोला काफी पुराना है. पंचायत के लोगों का कहना है कि करीब बारह फीट सड़क के लिए जमीन दिया गया है. जमींदारी की रार में आज तक इसे पीसीसी कौन पूछे खरंजा में तब्दील नहीं किया जा सका है. उनलोगों को मुख्य सड़क पर जाने के लिए पगडंडी के सहारे ही पहुंचना पड़ता है. उस मोहल्ले में प्रवेश के लिए जिस रास्ते का उपयोग टोलावासी करते हैं. उसकी लम्बाई करीब चार सौ मीटर है. बार- बार मुखिया व विभाग को शिकायत दर्ज कराने के बाद भी उनलोगों के आवागमन के लिए सड़क तक नसीब नहीं हो पायी है. जिसका नतीजा है कि बरसात के मौसम में जलजमाव की होने वाली समस्या की संभावना से अभी से ही भयभीत हो जाते हैं. उनलोगों का कहना है कि दोनों जमींदार के बीच रार के कारण आज तक उनलोगों को एक सड़क तक नसीब नहीं हो पायी है. दोनों अगर कुछ जमीन दे दिया जाये तो सड़क करीब बारह फीट से ऊपर की बन सकती है. 40 घरों के करीब दो सौ लोग हैं प्रभावित सड़क निर्माण की आस में दलन पंचायत के पुआरी टोला के यादव व मंडल टोला के करीब चालीस घर की दो सौ आबादी प्रभावित है. उनलोगों की माने तो कच्ची सड़क के नाम पर पगडंडी के सहारे अपने घर आवागमन करते हैं. ऐसा नहीं कि केवल उनलोगों को परेशानी होती है. उक्त रास्ता ही दोनों जमींदारों के लिए घर जाने के लिए है. दोनों के जिच में टोला के अन्य लोग परेशान हैं. बारिश के दिनों में कीचड़मय हो जाने की वजह से घरों से निकलना मुश्किल साबित हो जाता है. सड़क निर्माण को लेकर कई बार पंचायती भी हुई. लेकिन आज तक ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका है. थोड़ी सी जमीन उपलब्ध होने से मनरेगा के तहत भरायी जा सकती है मिट्टी पूर्व में मापी करायी गयी है. उक्त टोले के लिए जाने के लिए एकमात्र कच्ची सड़क है. एक के द्वारा जमीन उपलब्ध कराया जाता है तो दूसरे द्वारा विरोध शुरू कर दिया जाता है. ऐसे में सड़क निर्माण पर ग्रहण लग जाता है. थोड़ी सी जमीन उपलब्ध करा दिया जाता तो मनरेगा के तहत सड़क पर मिट्टी भराई कार्य कर चलने योग्य बनाया जा सकता है. रास्ते की करीब चार सौ मीटर लम्बाई है. एक दूसरे के सहयोग से उक्त रास्ते का कायाकल्प संभव है. नैमूल हक, मुखिया, दलन पूरब पंचायत
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