निर्मला सीतारमण के दौरे से मखाना विकास बोर्ड की स्थापना को ले जगी उम्मीद

अब तो वैश्विक स्तर पर मखाना की पहचान बनने लगी है. यूं तो पिछले कुछ वर्षों से मखाना उत्पादन के मामले में कटिहार अव्वल स्थान पर रहा है.

वैश्विक स्तर पर पहुंचा है कटिहार के मखाना का स्वाद

कटिहार. अब तो वैश्विक स्तर पर मखाना की पहचान बनने लगी है. यूं तो पिछले कुछ वर्षों से मखाना उत्पादन के मामले में कटिहार अव्वल स्थान पर रहा है. पर वोटर अधिकार यात्रा के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जिस कटिहार के कोढ़ा में तालाब में घुसकर मखाना की गुड़िया निकालने वाले मजदूरों से मिलकर मखाना फोड़ी मजदूरों से मुलाकात की थी. साथ ही मखाना फोड़ी की प्रक्रिया में शामिल होकर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपने अनुभव व मजदूरों की स्थिति को साझा किया. अब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बुधवार को एक दिवसीय दौरे पर कटिहार आ रही हैं. और हसनगंज प्रखंड के कालसर पंचायत में मखाना खेती के बारे में जानकारी लेंगी तथा उससे जुड़े किसानों से संवाद करेगी. उनके इस दौरे से लोगों को उम्मीद है कि कटिहार को बड़ी सौगात मिल सकती है. उल्लेखनीय है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से बजट सत्र के दौरान बिहार में मखाना विकास बोर्ड की स्थापना की घोषणा किये जाने के बाद मखाना के विकास को लेकर लोगों में उम्मीद जगी है. इस बीच बिहार में मखाना विकास बोर्ड की स्थापना को लेकर पिछले कुछ दिनों से सियासत गरमा गयी है. कोई जनप्रतिनिधि मखाना बोर्ड की स्थापना दरभंगा में करना चाहते हैं तो कोई पूर्णिया में स्थापना करने की मांग कर रहे हैं. इस बीच कटिहार के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भी कटिहार में मखाना विकास बोर्ड की स्थापना की मांग की है. यहां के लोगों का कहना है कि बिहार में सर्वाधिक मखाना उत्पादन कटिहार में होता है. स्थानीय विशेषज्ञों एवं जनप्रतिनिधियों व आम किसानों की मानें तो कटिहार जिले में तीन-तीन राष्ट्रीय उच्च पथ है. साथ ही जिले के कई क्षेत्रों में राज्य उच्च पथ भी है. बिहार का सबसे बड़ा रेलवे जंक्शन कटिहार है. कटिहार पूर्वोत्तर भारत का मुख्य द्वार माना जाता है. साथ ही पश्चिम बंगाल एवं झारखंड सहित अन्य राज्यों की ओर जाने के लिए कटिहार सुगम सड़क मार्ग उपलब्ध है. इसलिए कटिहार मखाना विकास बोर्ड की स्थापना के लिए न केवल उपयुक्त है, बल्कि हर दृष्टिकोण से उचित है.

कटिहार में हो मखाना बोर्ड की स्थापना : सांसद

सांसद तारिक अनवर ने प्रभात खबर के साथ बातचीत में कहा कि मखाना का मुख्य रूप से उत्पादन बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में किया जाता है. विशेष रूप से बिहार देश के कुल मखाना उत्पादन में 85 प्रतिशत से अधिक योगदान देता है. मिथिला और सीमांचल क्षेत्र इस उत्पादन में अग्रणी हैं. जिनमें से कटिहार एवं इसके आसपास के सीमांचल क्षेत्र के जिले लगभग 62 प्रतिशत मखाना के उत्पादन करता है. पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के कार्यकाल में आईसीएआर-नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर मखाना दरभंगा को आईसीएआर-रिसर्च कॉम्प्लेक्स फॉर ईस्टर्न रीजन (पटना) के प्रशासनिक नियंत्रण में लाया गया था. इसलिए बिहार के सभी क्षेत्रों तथा देश के तमाम अन्य राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए बिहार में मखाना बोर्ड की स्थापना व इसका मुख्यालय कटिहार में स्थापित किया जाना चाहिए. इसके लिए उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र भी लिखा है.

मखाना बोर्ड के लिए कटिहार उपयुक्त : भुवन

चैंबर ऑफ कॉमर्स के महासचिव भुवन अग्रवाल ने बातचीत में कहा कि उत्तर-पूर्वी राज्यों और पश्चिम बंगाल के लिए संपर्क कटिहार न केवल बिहार, बल्कि असम, पश्चिम बंगाल और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों के लिए भी एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र है. यहां मखाना विकास बोर्ड की स्थापना होने से बिहार के अन्य जिलों के साथ पड़ोसी राज्य झारखंड, पश्चिम बंगाल व दूसरे देशों के के लिए फायदेमंद है.

कटिहार में रेलवे व रोड की बेहतर कनेक्टिविटी: रईस

मखाना व्यवसायी रईस ने कहा कि कटिहार एक प्रमुख रेलवे जंक्शन है और यहां से देश के विभिन्न हिस्सों तक आवागमन की सुविधा उपलब्ध है, जिससे मखाना उद्योग के विकास को बल मिलेगा. कटिहार में राष्ट्रीय उच्च पथ 31, राष्ट्रीय उच्च पथ 81 व राष्ट्रीय उच्च पथ 1231 ए (फोरलेन) है. साथ ही जिले के कई हिस्सों में राज्य उच्च पथ भी है. ऐसे में मखाना विकास बोर्ड की स्थापना कटिहार में होनी चाहिए. इसके लिए यहां के जनप्रतिनिधियों को भी आवाज उठाना चाहिए. साथ ही प्रधानमंत्री व अन्य सक्षम प्राधिकार को पत्र लिखना चाहिए.

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By RAJKISHOR K

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