कटिहार, हसनगंज. जगरनाथपुर पंचायत के नयाटोला गांव के समीप दो लोकसभा, दो विधानसभा और दो प्रखंड क्षेत्रों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क करीब नौ वर्षों से खाई में तब्दील है. वर्ष 2017 में आयी प्रलयंकारी बाढ़ में सड़क बीचोंबीच ध्वस्त हो गयी थी. इसके बाद से अब तक न तो सड़क की मरम्मत करायी गयी और न ही इसका पुनर्निर्माण हुआ. शनिवार को लंबे समय से सड़क की बदहाली झेल रहे ग्रामीणों और राहगीरों का आक्रोश फूट पड़ा. दर्जनों लोगों ने मौके पर एकत्र होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और प्रदर्शन करते हुए जल्द सड़क निर्माण की मांग की.
2017 की बाढ़ में ध्वस्त हुई सड़क, नौ साल बाद भी नहीं हुआ निर्माण
ग्रामीणों ने बताया कि अगस्त 2017 में आयी भीषण बाढ़ के दौरान नयाटोला गांव के समीप सड़क का बड़ा हिस्सा बह गया था. सड़क के बीचोंबीच बनी खाई आज भी जस की तस है. करीब नौ साल बीतने के बावजूद इस हिस्से में न तो पर्याप्त मिट्टी भरायी गयी और न ही स्थायी पुल-पुलिया का निर्माण कराया गया. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को सड़क की स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला. धरातल पर अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है.
हसनगंज और कोढ़ा प्रखंड को जोड़ती है मुख्य सड़क
यह सड़क हसनगंज और कोढ़ा प्रखंड क्षेत्र को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क है. इसके अलावा सड़क से आसपास के कई गांवों के लोगों की आवाजाही होती है. ग्रामीणों के अनुसार यह मार्ग दो लोकसभा और दो विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े इलाकों के लोगों के लिए भी आवागमन का महत्वपूर्ण माध्यम है.
सड़क के क्षतिग्रस्त होने के कारण ग्रामीणों, किसानों, विद्यार्थियों और रोजाना आने-जाने वाले राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. बरसात के दिनों में समस्या और गंभीर हो जाती है.
बालू के डायवर्सन और बांस की चाचरी के सहारे आवाजाही
ग्रामीणों के अनुसार सड़क के टूटे हिस्से के बगल से किसी तरह बालू डालकर डायवर्सन बनाया गया है. बरसात में इस डायवर्सन पर पानी भर जाने के बाद आवागमन मुश्किल हो जाता है. ऐसी स्थिति में बांस की चाचरी का पुल ही लोगों के लिए आवाजाही का सहारा रह जाता है.
ग्रामीणों ने कहा कि सूखे के मौसम में भी समस्या खत्म नहीं होती. बालू से बने डायवर्सन के कारण किसानों को खेतों तक आने-जाने और कृषि कार्य करने में परेशानी होती है. भारी वाहन और अन्य साधनों से आवागमन भी जोखिम भरा बना रहता है.
विकास के दावों के बीच सड़क की बदहाली पर सवाल
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने कहा कि एक तरफ क्षेत्र में करोड़ों रुपये खर्च कर नई सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है, वहीं वर्षों से खाई में तब्दील इस सड़क पर किसी का ध्यान नहीं है. लोगों ने कहा कि विकास के नाम पर उन्हें अपनी जान हथेली पर रखकर आवाजाही करने को मजबूर होना पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के टूटे हिस्से के आसपास सुरक्षा की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. खासकर बारिश और जलजमाव के दौरान दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है.
कई बार प्रदर्शन के बाद भी नहीं निकला समाधान
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर इससे पहले भी कई बार प्रदर्शन और अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है. इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ. लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से लगातार आश्वासन मिलने के बाद भी सड़क का निर्माण नहीं कराया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है.
जल्द सड़क निर्माण की मांग
ग्रामीणों और राहगीरों ने प्रशासन से सड़क की तत्काल जांच कर स्थायी निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि सड़क के टूटे हिस्से में सिर्फ अस्थायी डायवर्सन बनाने के बजाय पुल-पुलिया और सड़क का स्थायी पुनर्निर्माण कराया जाए, ताकि बारिश के दिनों में भी सुरक्षित आवागमन बना रहे.
