कटिहार जिले के कुरसेला प्रखंड के गोबराही दियारा क्षेत्र के हजारों ग्रामीण आज भी गंगा नदी पार करने के लिए निजी नावों पर निर्भर हैं. सरकारी नाव की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है. इससे किसानों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
खेती-बाड़ी और रोजमर्रा के काम पर पड़ रहा असर
प्रखंड के तीनघरिया, खेरिया, बालूटोला, बसुहार, मजदिया और कमलाकान्ही गांवों के किसानों की बड़ी संख्या में कृषि भूमि गंगा के उस पार गोबराही दियारा में स्थित है. खेती-किसानी के कार्य, पशुपालन और अन्य जरूरी कामों के लिए उन्हें रोजाना नदी पार करनी पड़ती है. निजी नावों का कोई निर्धारित समय नहीं होने और मनमाना किराया वसूले जाने से लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं.
शिक्षकों को भी हो रही परेशानी
गोबराही दियारा स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक अखिलेश राम ने बताया कि सरकारी नाव की सुविधा नहीं होने से शिक्षकों को समय पर विद्यालय पहुंचने में कठिनाई होती है. कई बार उन्हें मजबूरी में दियारा क्षेत्र में ही रुकना पड़ता है, जिससे व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन भी प्रभावित होता है.
बाढ़ के मौसम में बढ़ जाता है खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से नाव से आवागमन और अधिक जोखिम भरा हो जाता है. कई नावों पर क्षमता से अधिक सवारियां और सामान ढोया जाता है. अधिकांश नावों में सुरक्षा जैकेट या अन्य सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध नहीं रहते, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.
सरकारी नाव और सुरक्षा व्यवस्था की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गोबराही दियारा के लिए अविलंब सरकारी नाव की व्यवस्था करने की मांग की है. साथ ही निजी नावों के संचालन पर निगरानी, लाइसेंस की जांच और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने की भी मांग उठाई है, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके.
यह भी पढ़ें : कटिहार में आज दिनभर बदला रहेगा मौसम, शाम में तेज बारिश और वज्रपात के आसार
