कटिहार जिले में गाय व भैंस जाति के मवेशियों को खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) बीमारी से बचाने के लिए व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है. जिला पशुपालन विभाग की ओर से सात फरवरी से शुरू हुए इस अभियान के तहत गांव-गांव व घर-घर जाकर मवेशियों का टीकाकरण किया जा रहा है. पशुधन सुरक्षा व दुग्ध उत्पादन को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ प्रमोद कुमार मेहता ने जानकारी देते हुए बताया कि खुरपका-मुंहपका एक संक्रामक वायरल बीमारी है. जो मुख्य रूप से गाय, भैंस पशुओं को प्रभावित करती है. इस बीमारी में पशुओं के मुंह व खुर में छाले पड़ जाते हैं. तेज बुखार आता है तथा पशु खाना-पीना छोड़ देते हैं. दूध उत्पादन में भारी कमी आती है. आर्थिक नुकसान होता है. समय पर टीकाकरण से इस बीमारी की रोकथाम संभव है. जिले में सात लाख 30 हजार गाय और भैंस जाति के मवेशियों को प्राइमरी डोज देने का लक्ष्य निर्धारित किया है. 81 हजार 100 मवेशियों को बूस्टर डोज लगाया जायेगा. 254 वैक्सीनेटरों की टीम गठित की गई है. जो अलग-अलग प्रखंडों और पंचायतों में जाकर डोर-टू-डोर टीकाकरण कर रही है. अभियान में पशुपालकों को बीमारी के लक्षण, बचाव और पशु स्वास्थ्य प्रबंधन के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है. जिला पशुपालन पदाधिकारी ने पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने मवेशियों को समय पर टीका अवश्य लगवायें और टीम को सहयोग दें. टीकाकरण पूरी तरह सुरक्षित और निःशुल्क है. अभियान के सफल संचालन के लिए नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है. प्रतिदिन टीकाकरण की प्रगति की समीक्षा भी की जा रही है. यदि किसी पशु में खुर या मुंह में घाव, लंगड़ापन, बुखार या दूध में अचानक कमी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक को सूचना दें. अभियान के माध्यम से जिले को खुरपका-मुंहपका मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे पशुपालकों की आय सुरक्षित रह सके और पशुधन स्वस्थ बना रहे.
एफएमडी टीकाकरण, 7.30 लाख मवेशियों को लगेगा टीका
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