फलका में सुहागिनों ने आस्था के साथ मनाया वट सावित्री व्रत

प्रखंड मुख्यालय स्थित शिव मंदिर के पुजारी ने बताया कि वट सावित्री व्रत में महिलाएं उपवास रखकर वट वृक्ष की पूजा करती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है, और यह वृक्ष दीर्घायु एवं पवित्रता का प्रतीक है.

कटिहार के फलका से अली अहमद की रिपोर्ट:

कटिहार: प्रखंड क्षेत्र में वट सावित्री व्रत का पर्व गुरुवार को आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया गया. सुहागिन महिलाओं ने बड़ी संख्या में प्रखंड मुख्यालय के समीप स्थित बरगद के पेड़ (वट वृक्ष) पर कच्चा धागा बांधकर विधिवत पूजा-अर्चना की और अपने पति की दीर्घायु के लिए भगवान से प्रार्थना की.

इसके अलावा प्रखंड के विभिन्न गांवों में भी सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर वट वृक्ष के समीप पूजा-अर्चना की.

प्रखंड मुख्यालय स्थित शिव मंदिर के पुजारी ने बताया कि वट सावित्री व्रत में महिलाएं उपवास रखकर वट वृक्ष की पूजा करती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है, और यह वृक्ष दीर्घायु एवं पवित्रता का प्रतीक है.

पौराणिक कथा के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या के दिन सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस प्राप्त किए थे. इसी कारण इस दिन वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है. महिलाएं इस दिन यह कामना करती हैं कि जैसे वट वृक्ष दीर्घायु और सदैव हरा-भरा रहता है, वैसे ही उनके पति का जीवन भी लंबा और सुखमय रहे.

व्रत की पूजा थाली में चावल (अक्षत), श्रृंगार का सामान, आम, लीची, मौसमी फल, मिठाई, बतासा, मौली, रोली, कच्चा धागा, लाल कपड़ा, नारियल, इत्र, पान, सिंदूर, दूर्वा घास, सुपारी, हाथ का पंखा और जल जैसी सामग्री शामिल होती है.

हालांकि इस बार सूर्य ग्रहण के बावजूद सुहागिन महिलाओं ने पूरे उत्साह और आस्था के साथ वट सावित्री व्रत की पूजा-अर्चना संपन्न की.

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Published by: Shruti Kumari

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