कोढ़ा में फर्जी नर्सिंग होम का गंदा खेल, कार्रवाई के बाद नाम बदलकर फिर शुरू हुआ 'मौत का धंधा', बिना बोर्ड के चल रहा अवैध अस्पताल

Fake Nursing Home: कटिहार के कोढ़ा में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई को ठेंगा दिखाकर एक फर्जी नर्सिंग होम दोबारा सक्रिय हो गया है. पहले सील हो चुके इस अवैध अस्पताल का नाम थोड़ा सा बदलकर अब बिना किसी साइनबोर्ड के, एक बंद मकान के भीतर मरीजों की जिंदगी से सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है.

Fake Nursing Home: कटिहार के कोढ़ा से अमीर सोहेल की रिपोर्ट: कटिहार जिले के कोढ़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत अवैध और फर्जी नर्सिंग होम के धड़ल्ले से हो रहे संचालन का एक बेहद संगीन मामला दोबारा सुर्खियों में है. जुराबगंज के समीप संचालित एक ऐसे नर्सिंग होम पर, जिसपर पूर्व में प्रशासन का डंडा चला था, अब कथित रूप से नया नाम देकर चोरी-छिपे दोबारा खोल दिया गया है. स्थानीय ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि कुछ महीने पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जिस “न्यू जीवन ज्योति नर्सिंग होम” को छापेमारी कर बंद कराया था, वही संस्थान अब केवल ‘न्यू’ शब्द हटाकर “जीवन ज्योति नर्सिंग होम” के नाम से दोबारा अवैध चिकित्सीय सेवाएं दे रहा है.

बिना बोर्ड और बिना डॉक्टर के चल रहा अस्पताल, मकान के भीतर छुपाया खेल

ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा नर्सिंग होम बिना किसी वैध सरकारी पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) और स्वास्थ्य विभाग की अनुमति के चलाया जा रहा है. प्रशासनिक कार्रवाई और कानूनी पचड़े से बचने के लिए संचालकों ने एक शातिर तरीका अपनाया है—नर्सिंग होम के बाहर कोई भी साइनबोर्ड या डॉक्टर के नाम की पट्टिका नहीं लगाई गई है. यह पूरा गोरखधंधा एक निजी रिहायशी मकान के भीतर गुप्त रूप से संचालित हो रहा है, जिससे इसकी अवैधता पर मुहर लगती है. स्थानीय निवासियों के अनुसार, यहाँ न तो कोई डिग्रीधारी या योग्य चिकित्सक नियमित रूप से बैठता है और न ही क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के मानकों का पालन किया जा रहा है.

सुदर्शन और उसके भाइयों पर संचालन का आरोप, अवैध अल्ट्रासाउंड भी जारी

सूत्रों और स्थानीय दावों के मुताबिक, इस फर्जी नर्सिंग होम का मुख्य संचालक सुदर्शन नामक व्यक्ति है. आरोप है कि इस अवैध धंधे में उसका भाई सुमन यादव, टिंकू यादव और चांदनी भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं. ग्रामीणों का यह भी दावा है कि इस केंद्र के भीतर बिना किसी वैध लाइसेंस और बिना किसी रेडियोलॉजिस्ट (विशेषज्ञ डॉक्टर) के अवैध रूप से अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) जैसी संवेदनशील जांच सेवाएं भी दी जा रही हैं, जो पीसी-पीएनडीटी (PCPNDT) एक्ट के तहत पूरी तरह गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध है. बिना प्रशिक्षित कर्मियों के ऐसी जांचे मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं.

इलाज के दौरान मरीजों की मौत का भी आरोप, प्रशासनिक चुप्पी से आक्रोश

इलाके के लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि पूर्व में इस नर्सिंग होम में गलत इलाज और अत्यधिक लापरवाही के कारण कई गरीब मरीजों की असमय मौत भी हो चुकी है. हालांकि, इन मौतों की अब तक कोई आधिकारिक या लिखित पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन लगातार आ रही शिकायतें मामले की भयावहता को दर्शाती हैं. ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि बार-बार की लिखित शिकायतों के बावजूद इस गिरोह पर स्थायी रोक नहीं लग पाना कहीं न कहीं प्रशासनिक शिथिलता और स्थानीय सांठगांठ की ओर इशारा करता है.

केवल दिखावे की साबित होती है कार्रवाई, कुछ दिन बाद फिर सजती है दुकान

विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, कुछ महीने पहले स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने इस संस्थान पर धावा बोलकर कई तरह की भारी अनियमितताएं और खामियां पाई थीं, जिसके बाद इसे सील कर बंद करने का आदेश जारी हुआ था. लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद नाम बदलकर उसी जगह पर दोबारा ओपीडी और ऑपरेशन शुरू कर देना पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है. ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग की कार्रवाई केवल खानापूर्ति और दिखावे तक सीमित रह जाती है, जिससे बेखौफ होकर धंधेबाज दोबारा गरीबों का आर्थिक और शारीरिक शोषण करने के लिए सक्रिय हो जाते हैं.

जांच कर की जाएगी सख्त कानूनी कार्रवाई: चिकित्सा पदाधिकारी

इस गंभीर और संवेदनशील मामले पर जब मीडिया ने चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अमित आर्य से जवाब मांगा, तो उन्होंने बताया कि बिहार सरकार के सख्त दिशा-निर्देशों के आलोक में पूरे प्रखंड में अवैध क्लीनिकों, बिना निबंधन के चल रहे अल्ट्रासाउंड सेंटरों, पैथोलॉजी लैब और एक्स-रे सेंटरों के खिलाफ लगातार सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है. समय-समय पर जिला स्वास्थ्य केंद्र की ओर से विशेष टीम गठित कर छापेमारी की जाती है और यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी.

उन्होंने साफ लफ्जों में स्पष्ट किया कि बिना सरकारी निबंधन और आवश्यक मानकों के किसी भी चिकित्सा संस्थान का संचालन पूरी तरह से गैर-कानूनी है. यदि जुराबगंज के इस नर्सिंग होम द्वारा नाम बदलकर दोबारा अवैध संचालन की लिखित या मौखिक शिकायत मिली है, तो इसकी त्वरित दंडाधिकारी स्तर से जांच कराई जाएगी. दोषी पाए जाने पर संचालकों के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

अब देखना यह होगा कि कोढ़ा का स्थानीय प्रशासन और जिला स्वास्थ्य महकमा इस बार कितनी मुस्तैदी दिखाता है. क्या इस बार भी कार्रवाई केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह जाएगी, या फिर गरीब और लाचार मरीजों की जिंदगी से खेले जा रहे इस “मौत के खेल” पर हमेशा के लिए पूर्णविराम लगाया जाएगा.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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