बिहार के छात्र अब नहीं होंगे परीक्षा के दबाव से परेशान, शिक्षा विभाग करने जा रहा है यह बड़ा बदलाव; जानें क्या है 'ब्रेन मैपिंग'

बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शिक्षा विभाग में बड़े बदलावों की घोषणा की है. 'रिफॉर्म से परफॉर्म' की ओर बढ़ते हुए, विभाग 'ब्रेन मैपिंग' जैसी नई पहलों पर विचार कर रहा है ताकि छात्रों की रुचियों को पहचाना जा सके और उन्हें सही करियर पथ पर मार्गदर्शन मिल सके. इसका उद्देश्य परीक्षा के दबाव को कम करना और बच्चों को उनकी क्षमता के अनुसार विकसित होने के अवसर देना है.

कटिहार. शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने एक दिवसीय प्रवास के क्रम में शनिवार को स्थानीय जिला अतिथि गृह में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. जिला पदाधिकारी आशुतोष द्विवेदी की मौजूदगी में हुई बैठक में जिले की शिक्षा व्यवस्था और विभाग की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की अद्यतन जानकारी ली गयी. मंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर जोर दिया. बैठक में शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गयी.

बोले- रिफॉर्म से परफॉर्म की दिशा में आगे बढ़ेगा विभाग

बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि बिहार का शिक्षा विभाग अब "रिफॉर्म से परफॉर्म" की दिशा में आगे बढ़ेगा. सरकार का उद्देश्य बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाना, उनकी प्रतिभा को पहचानना और उनकी रुचि के अनुरूप भविष्य के लिए तैयार करना है. उन्होंने कहा कि बच्चों की क्षमता और रुचि की समय रहते पहचान करना आवश्यक है, ताकि उन्हें आगे बढ़ने के लिए सही दिशा और अवसर मिल सके.

असफलता से बच्चों में न आए नकारात्मक सोच

शिक्षा मंत्री ने कहा कि कई बार परीक्षा में असफल होने के बाद बच्चों के मन में नकारात्मक भावना पैदा हो जाती है और वे यह सोचने लगते हैं कि उनका जीवन समाप्त हो गया है. ऐसी मानसिकता को बदलने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि सरकार बच्चों को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने की दिशा में काम कर रही है. शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल परीक्षा में सफलता या असफलता तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि बच्चों की क्षमता को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना भी जरूरी है.

एलिजिबल फॉर स्किल व्यवस्था का किया उल्लेख

मंत्री ने "एलिजिबल फॉर स्किल" जैसी व्यवस्था का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि प्रमाणपत्र में ऐसी व्यवस्था किए जाने पर विचार किया जा रहा है, जिससे बच्चे को अपनी शैक्षणिक स्थिति की जानकारी मिल सके, लेकिन असफलता के कारण उसके मन में नकारात्मक भावना पैदा नहीं हो. इस तरह की व्यवस्था के माध्यम से बच्चों को उनकी क्षमता और आगे उपलब्ध संभावनाओं के प्रति जागरूक करने की दिशा में काम किया जा सकता है.

कक्षा नौ से ब्रेन मैपिंग कराने की दिशा में काम

शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार कक्षा नौ से बच्चों की "ब्रेन मैपिंग" कराने की दिशा में भी काम करेगी. इससे यह जानने में मदद मिल सकती है कि किसी बच्चे की रुचि किस क्षेत्र में अधिक है और उसकी क्षमता किस तरह के कार्य या करियर के लिए अधिक उपयुक्त है. उन्होंने कहा कि बच्चों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि वे अपने पसंदीदा क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकें और भविष्य में अपनी प्रतिभा का बेहतर उपयोग कर सकें.

कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, विधायक दुलालचंद गोस्वामी, विधायक संगीता देवी, विधान पार्षद अशोक अग्रवाल, जिला कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष मनोज राय, जिला पदाधिकारी आशुतोष द्विवेदी, उपविकास आयुक्त, जिला शिक्षा पदाधिकारी समेत शिक्षा विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे.


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लेखक के बारे में

By सूरज कुमार गुप्ता

सूरज कुमार गुप्ता पिछले 25 वर्षों से प्रिंट मीडिया में एक्टिव है. वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत की. राजनीतिक व सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों पर पत्रकारिता करना इनकी रुचि में शामिल है. सामाजिक कार्यो में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2007 में इन्हें भारत सरकार की ओर से तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित किया था.

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