कटिहार का प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर में बुधवार की पूजा और आरती का समय जारी

Durga Mandir: कटिहार शहर के हृदयस्थली कहे जाने वाले दुर्गास्थान चौक स्थित ऐतिहासिक सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में बुधवार को होने वाली विशेष पूजा-अर्चना और महाआरती को लेकर समय सारणी (Timings) जारी कर दी गई है. मान्यता है कि इस मंदिर में संगमरमर से निर्मित मां दुर्गा के अलौकिक स्वरूप के दर्शन मात्र से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

कटिहार से सूरज गुप्ता की रिपोर्ट

Durga Mandir: बिहार के सीमांचल अंतर्गत कटिहार जिले का शहरी क्षेत्र आस्था और भक्ति के रंग में सराबोर है. शहर के सबसे प्रसिद्ध और जन आस्था के मुख्य केंद्र ‘दुर्गास्थान चौक’ के समीप स्थित सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में बुधवार को सुबह से ही भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया है. मंदिर के मुख्य पुजारियों और प्रबंधन समिति के अनुसार, श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पूजा-अर्चना, पट बंद होने और संध्या महाआरती का एक कड़ा समय रोस्टर निर्धारित किया गया है, ताकि दूर-दूर से आने वाले मां के भक्तों को सुलभता से दर्शन लाभ मिल सके और वे सामूहिक आरती का हिस्सा बन सकें.

दो पालियों में होंगे दर्शन; दोपहर में डेढ़ घंटे के लिए बंद रहेगा गर्भगृह

श्रद्धालुओं के लिए कड़ा समय निर्देश: मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोपहर के समय मां के विश्राम और भोग के लिए मंदिर के पट (मुख्य द्वार) कुछ समय के लिए बंद किए जाते हैं. अतः श्रद्धालु समय सारणी को देखकर ही मंदिर परिसर पहुंचें.

बुधवार की विस्तृत समय सारणी नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:

अनुष्ठान / दर्शन का प्रकारनिर्धारित कड़ा समय (बुधवार)श्रद्धालुओं के लिए मुख्य गाइडलाइन
सुबह की महाआरतीसवेरे 07:30 बजेसामूहिक आरती और शंखनाद में शामिल होने का समय.
प्रथम पाली दर्शन व पूजासवेरे 07:30 बजे से दोपहर 01:30 बजे तकजल अर्पण, पुष्प और विशेष पूजा-अर्चना का काल.
विश्राम काल (पट बंद)दोपहर 01:30 बजे से अपराह्न 03:00 बजे तकइस दौरान मंदिर का मुख्य गर्भगृह पूरी तरह बंद रहेगा.
द्वितीय पाली दर्शनअपराह्न 03:00 बजे से रात्रि 09:30 बजे तकसंध्या दर्शन और मन्नत के धागे बांधने का समय.
संध्या महाआरतीशाम 07:30 बजेधूप-दीप और विशेष संगीतमय महाआरती का आयोजन.

संगमरमर की दिव्य प्रतिमा; 4 प्रकांड पंडितों को सौंपी गई जिम्मेदारी

इस ऐतिहासिक सार्वजनिक मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां स्थापित मां दुर्गा की भव्य और विहंगम प्रतिमा है, जो पूरी तरह श्वेत संगमरमर (Marble) से निर्मित है. इसकी अलौकिक आभा भक्तों को अपनी ओर खींचती है.

विशाल भीड़ के प्रबंधन और शास्त्रों के कड़े नियमों के अनुसार निरंतर मंत्रोच्चारण व पूजा संपन्न कराने के लिए मंदिर प्रबंधन ने अलग-अलग प्रहर (समय) के अनुसार चार अनुभवी एवं प्रकांड पंडितों को मुख्य दायित्व सौंपा है, जिनकी सूची निम्नलिखित है:

  1. पंडित अजय मिश्रा
  2. पंडित सच्चिदानंद पाठक
  3. पंडित हीरा झा
  4. पंडित दिलीप झा

मुरादें पूरी होने की धार्मिक मान्यता:

स्थानीय नागरिकों और बुजुर्गों का मानना है कि दुर्गास्थान चौक के इस भव्य मंदिर का इतिहास काफी गौरवशाली है. सच्चे मन से जो भी श्रद्धालु यहाँ आकर मां के चरणों में शीश नवाता है, उसकी हर कड़क मन्नत और मुराद मां अवश्य पूरी करती हैं. यही कारण है कि न केवल कटिहार शहर, बल्कि पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल से भी बड़ी संख्या में लोग हर दिन सुबह-शाम होने वाली महाआरती में भाग लेने यहाँ पहुंचते हैं. मंदिर कमेटी ने भीषण गर्मी को देखते हुए परिसर में ठंडे पानी और छांव की कड़क व्यवस्था की है ताकि कतार में खड़े श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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