कोढ़ा प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों में धान की कटाई का समय है. खेतों में फसल पूरी तरह पक चुकी है. लेकिन खेत सुने पड़े हैं. कारण है मजदूरों की कमी. गांवों में अब पहले जैसे श्रमिक नहीं बचे. क्योंकि बड़ी संख्या में ग्रामीण मजदूर रोज़गार की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं. इससे किसानों के सामने नई मुश्किलें खड़ी हो गयी हैं. धान की फसल तैयार है. लेकिन मज़दूर नहीं मिलने से कटाई का काम शुरू नहीं हो पा रहा है. जो कुछ श्रमिक गांव में हैं. वे बहुत महंगी मजदूरी मांग रहे हैं. जिसे छोटे और सीमांत किसान वहन नहीं कर पा रहे. स्थानीय किसान विजय कुशवाहा, रोहित लाल के साथ अन्य किसानों ने बताया की पिछले साल जितनी मज़दूरी में काम हो जाता था. इस बार उससे दोगुनी मजदूरी मांगी जा रही है. हम मशीन भी नहीं ले सकते. मज़दूर भी नहीं मिल रहे. फसल खेत में ही सड़ जायेगी. गांव के कई युवा और परिवार दिल्ली, मुंबई, पंजाब, लुधियाना, सूरत जैसे शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं. कुछ लोग ईंट-भट्टों पर काम कर रहे हैं, तो कुछ निर्माण कार्यों में उनका कहना है कि गांव में सिर्फ कुछ महीनों का ही काम है. जबकि शहरों में सालभर काम मिलता है. भले ही जीवन कठिन हो. किसानों और जानकारों का कहना है कि मनरेगा जैसी योजनाएं भी मजदूरों को गांव में रोकने में विफल साबित हो रही हैं. क्योंकि भुगतान में देरी और काम की आज के मौसम में अनुपलब्धता जैसी समस्याएं बनी हुई हैं. यदि अगले कुछ दिनों में श्रमिकों की व्यवस्था नहीं हुई तो तैयार फसल बर्बाद हो सकती है. जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. अपने फसल को बचने के लिए कैंपेन जैसी बड़ी यंत्र से अपने धन की कटाई करने में जुटे हैं. आये दिन बरसात के कारण किसने की धान की फसल भी क्षति के कगार पर पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. इसके साथ ही आने वाले समय में अनाज की कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है.
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