कटिहार से राणा सिंह की रिपोर्ट
DRM: पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के अंतर्गत आने वाले कटिहार रेल मंडल कार्यालय में मंगलवार को क्षेत्रीय विकास और यात्री सुविधाओं को लेकर हलचल तेज रही. अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के राष्ट्रीय सचिव सह पश्चिम बंगाल एवं असम राज्य के प्रभारी अजय कुमार साह के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने डीआरएम से मुलाकात की. इस दौरान संगठन ने स्थानीय बेरोजगार युवाओं के रोजगार, नई ट्रेनों के परिचालन, वेंडर स्टॉलों में बिचौलियों के बोलबाले और स्टेशन के आधुनिकीकरण से जुड़ी पांच सूत्री महत्वपूर्ण मांगों का एक ज्ञापन सौंपा और जनहित में इन पर त्वरित सकारात्मक कार्रवाई करने का आग्रह किया.
रेलवे में रिक्त पदों पर बहाली और दक्षिण भारत के लिए नई ट्रेनों की मांग
प्रतिनिधिमंडल द्वारा सौंपे गए पांच सूत्री मांगपत्र के मुख्य एजेंडे और बिंदु निम्नलिखित प्रकार से हैं:
- बेरोजगार युवाओं को रोजगार: मांगपत्र के जरिए एनएफ रेलवे के अंतर्गत लंबे समय से रिक्त पड़े चतुर्थ वर्गीय कर्मियों (Group D), सहायक लोको पायलट (ALP), तकनीशियन (Technician) और रेलवे कंट्रोलर के पदों पर अविलंब नई बहाली प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई है, ताकि सीमांचल और आसपास के जिलों के शिक्षित व बेरोजगार युवाओं को रोजगार का उचित अवसर मिल सके.
- नई ट्रेनों का परिचालन: रेल यात्रियों की सहूलियत के लिए कटिहार जंक्शन से रांची, सूरत तथा दक्षिण भारत के प्रमुख औद्योगिक शहरों के लिए सीधी और नई ट्रेनों के परिचालन की रूपरेखा रखने को कहा गया है. साथ ही, मुजफ्फरपुर-यशवंतपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन की अत्यधिक लोकप्रियता और भीड़ को देखते हुए इसे प्रतिदिन (Daily) चलाने का पुरजोर आग्रह किया गया है.
वेंडर स्टॉलों पर बिचौलियों का कब्जा, एक ही शख्स चला रहा कई दुकानें
भ्रष्टाचार और सिंडिकेट का आरोप: संगठन ने डीआरएम के समक्ष रेलवे प्लेटफॉर्मों पर चल रहे एक बड़े आर्थिक खेल का पर्दाफाश किया. मांगपत्र में आरोप लगाया गया है कि प्लेटफॉर्म संख्या 1 से 8 तक संचालित हो रहे वेंडर स्टॉलों में दलालों और बिचौलियों का पूरी तरह कब्जा है. नियमों को ताक पर रखकर एक-एक रसूखदार वेंडर पांच से सात स्टॉल अवैध रूप से संचालित कर रहा है, जबकि स्थानीय गरीब, भूमिहीन और जरूरतमंद वेंडरशिप के अधिकार से पूरी तरह वंचित हैं. संगठन ने इन स्टॉलों के आवंटन और वर्तमान संचालन की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक जरूरतमंदों को नए सिरे से लाइसेंस देने की मांग की है.
जंक्शन का सौंदर्यीकरण: बजट होटल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और मधुबनी पेंटिंग
स्टेशन के आधुनिक कायाकल्प का खाका:
इसके अतिरिक्त, मांगपत्र में कटिहार जंक्शन के पुराने मॉडल स्टेशन परिसर और रेलवे की सैकड़ों एकड़ खाली पड़ी रेल भूमि के सौंदर्यीकरण और व्यावसायिक उपयोग का एक खाका पेश किया गया है. इसके तहत स्टेशन परिसर में आकर्षक उद्यान (पार्क), फव्वारे, यात्रियों के बैठने की आधुनिक व्यवस्था, और बिहार की सांस्कृतिक धरोहर ‘मधुबनी पेंटिंग’ जैसी स्थानीय लोक-कला का भव्य प्रदर्शन करने का प्रस्ताव दिया गया है. साथ ही, राजस्व बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक फूड प्लाजा, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, बजट होटल और एक मल्टी लेवल कार पार्किंग (Multi-Level Car Parking) विकसित करने की बात कही गई है.
जोगबनी पैसेंजर में बोगियां बढ़ाने की मांग, महिलाएं और बुजुर्ग परेशान
भीड़ से मिलेगी राहत:
अंत में, संगठन ने स्थानीय यात्रियों की सबसे बड़ी समस्या को उठाते हुए कटिहार-जोगबनी डीएमयू (DMU) पैसेंजर ट्रेनों में प्रतिदिन होने वाली अमानवीय भीड़ का जिक्र किया. यात्रियों, विशेषकर महिला रेल यात्रियों, स्तनपान कराने वाली माताओं, बुजुर्गों, बच्चों और नेपाल जाने वाले गंभीर मरीजों की सुरक्षा व सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस ट्रेन में तत्काल 4 से 5 अतिरिक्त कोच (बोगियां) जोड़ने की मांग की गई है.
डीआरएम ने सभी मांगों को गंभीरता से सुनते हुए संगठन को आश्वस्त किया कि वे अपने स्तर के मामलों पर त्वरित निर्णय लेंगे और बोर्ड स्तर के प्रस्तावों को महाप्रबंधक (GM) कार्यालय भेजेंगे. इस महत्वपूर्ण अवसर पर संगठन के प्रदेश मीडिया प्रभारी अमित नारायण, जिला अध्यक्ष चंद्रभूषण सिंह, प्रदीप अग्रवाल, दिनेश शर्मा, आशेश्वर गुप्ता, शंकर पोद्दार, अमितेश महतो, मुन्ना सिंह, सचिन कुमार, रोहित कुमार, बिट्टू कुमार सहित दर्जनों पदाधिकारी और रेल उपभोक्ता उपस्थित रहे.
