कटिहार के डंडखोरा से संजय सिंह की रिपोर्ट
Electricity Crisis: बिहार सरकार जहां एक तरफ ‘हर खेत तक बिजली’ योजना के तहत अन्नदाताओं को सिंचाई के लिए सुलभ और सुरक्षित बिजली देने के बड़े-बड़े विज्ञापन जारी कर रही है, वहीं कटिहार जिले के डंडखोरा प्रखंड से बिजली विभाग की एक बेहद डरावनी और लापरवाह तस्वीर सामने आई है. प्रखंड की डंडखोरा पंचायत अंतर्गत इटवा घाट और हनुमान मंदिर के समीप कृषि कार्य और सिंचाई को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभाग ने तीन ट्रांसफार्मर तो ऊंचे खंभों पर इंस्टॉल कर दिए, लेकिन विडंबना देखिए कि आज तक किसानों के खेतों तक न तो पक्के बिजली के पोल (खंभे) पहुंचे और न ही मानक एलटी तार. नतीजतन, किसान मजबूरी में सैकड़ों मीटर दूर से बांस-बल्ले के सहारे खेतों तक हाईवोल्टेज तार खींच कर ले गए हैं, जो मौत को सीधे आमंत्रण दे रहा है.
तीन में से एक ट्रांसफार्मर महीनों से फूका; बांस के सहारे झूल रहे हैं मौत के तार
- शोभा की वस्तु बने ट्रांसफार्मर: बिजली विभाग ने इटवा घाट और हनुमान मंदिर के पास लगभग 600 मीटर के कृषि दायरे को कवर करने के लिए तीन अलग-अलग ट्रांसफार्मर लगाए थे. इसका उद्देश्य किसानों को कम लागत में पटवन की सुविधा देना था, लेकिन बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर (पोल और केबल) के अभाव में यह पूरी सरकारी योजना फाइलों में ही दम तोड़ रही है.
- फूका पड़ा है ट्रांसफार्मर: स्थानीय किसानों के अनुसार, इन तीन ट्रांसफार्मरों में से एक मुख्य कृषि ट्रांसफार्मर पिछले काफी लंबे समय से पूरी तरह जलकर (खराब) पड़ा हुआ है. इसकी शिकायत कनीय अभियंता (JE) से कई बार की गई, लेकिन इसे बदलने के लिए कोई मिस्त्री आज तक गांव नहीं पहुंचा.
- बांस-बल्ले का खतरनाक जुगाड़: बिजली आपूर्ति न होने और रबी-खरीफ फसलों को सूखने से बचाने के लिए मजबूर किसानों ने अपने खर्च पर बांस के खंभे गाड़कर उस पर से एलटी लाइन के नंगे तार खेतों तक पहुंचाए हैं. तेज हवा चलने या बारिश होने पर ये बांस झुक जाते हैं और तार हरी फसलों को छूने लगते हैं, जिससे पूरे खेत में करंट दौड़ने और मवेशियों व किसानों की जान जाने का खतरा 24 घंटे बना रहता है.
सरकारी तंत्र की लापरवाही से अधूरा रहा योजना का उद्देश्य; आर्थिक तबाही की कगार पर अन्नदाता
करोड़ों का बजट पर धरातल पर शून्य: गांव के पीड़ित किसान दिलीप सोरेन, हरदेव सोरेन, ताल्लु हांसदा, सुरेंद्र सोरेन, सुभाष सिंह और श्रीनाथ ठाकुर ने सामूहिक रूप से विभाग के खिलाफ कड़ा रोष व्यक्त किया है. किसानों का कहना है कि सरकार की इस घोर प्रशासनिक लापरवाही के कारण उन्हें कृषि कार्यों के लिए निजी डीजल पंपसेट्स का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत तीन गुना बढ़ गई है और उनकी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा तेल खरीदने में ही बर्बाद हो रहा है.
किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी:
प्रभावित क्षेत्र के किसानों ने उत्तर बिहार बिजली वितरण कंपनी (NBPDLS) के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि खरीफ सीजन की मुख्य फसलों (धान की रोपनी) की शुरुआत से पहले जले हुए ट्रांसफार्मर को अविलंब बदला जाए. साथ ही पूरे 600 मीटर के दायरे में कंक्रीट के पोल गाड़कर इंसुलेटेड केबल (तार) बिछाई जाए ताकि खेतों तक निर्बाध और सुरक्षित बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके. किसानों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि समय रहते विभाग की नींद नहीं खुली और फसलों को नुकसान हुआ, तो वे बिजली कार्यालय का घेराव करने को बाध्य होंगे.
