कटिहार के गांधी हाईस्कूल में साइबर मंगलवार, DSP ने छात्रों को समझाया ऑनलाइन ठगी से बचने का तरीका

कटिहार के गांधी उच्च विद्यालय में साइबर मंगलवार का आयोजन हुआ। डीएसपी आसिफ आलम ने छात्रों को ओटीपी और पिन सुरक्षित रखने व साइबर अपराध से बचने के उपाय बताए।

कटिहार. स्थानीय पीएम श्री प्लस टू गांधी उच्च विद्यालय, न्यू कॉलोनी में मंगलवार को साइबर अपराध के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से साइबर मंगलवार कार्यक्रम का आयोजन किया गया. प्राचार्य डॉ. उमेश कुमार के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन ठगी, OTP और ATM से जुड़ी धोखाधड़ी समेत सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी. कार्यक्रम के दौरान छात्रों को बताया गया कि साइबर अपराधी लोगों के डर और जल्दबाजी का फायदा उठाकर उनके बैंक खातों तक पहुंच बना लेते हैं.

दीप प्रज्वलित कर हुआ साइबर जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत मंच पर मौजूद DSP आसिफ आलम, सब इंस्पेक्टर विनय कुमार सिंह, विमल कुमार मंडल, संगीत शिक्षिका डॉ. कंचन प्रिया और रजनीश कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर की. मंच संचालन करते हुए डॉ. कंचन प्रिया ने कहा कि आज के समय में मोबाइल, कंप्यूटर और इंटरनेट से दूरी बनाना संभव नहीं है. इनका इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन इसके लिए सोच और समझ के साथ सावधानी बरतना भी उतना ही जरूरी है.

डर दिखाकर साइबर अपराधी खाली कर देते हैं बैंक अकाउंट

साइबर अपराध को लेकर चर्चा करते हुए DSP आसिफ आलम ने विद्यार्थियों को ठगी के सामान्य तरीकों के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी अक्सर लोगों के डर का फायदा उठाते हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि किसी व्यक्ति को फोन कर कहा जाता है कि उसका ATM लॉक हो गया है और उसे अनलॉक कराने के लिए PIN या OTP बताना होगा. ऐसे फोन आने पर लोग घबरा जाते हैं और बिना सोचे-समझे अपनी गोपनीय जानकारी साझा कर देते हैं. इसके बाद उनके बैंक खाते से पैसे निकाल लिए जाते हैं. DSP ने विद्यार्थियों से कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति के फोन या संदेश से घबराने के बजाय पहले उसकी सत्यता की जांच करनी चाहिए. OTP, ATM PIN या अन्य बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए.

सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने से बचें

DSP आसिफ आलम ने बच्चों को सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में भी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी अत्यधिक जानकारी और तस्वीरें साझा करने से बचना चाहिए. उन्होंने विद्यार्थियों को ऑनलाइन गतिविधियों में सावधानी बरतने की सलाह देते हुए साइबर अपराध से बचाव के कई महत्वपूर्ण तरीके बताए. उन्होंने कहा कि किसी भी संदिग्ध लिंक, फोन कॉल या ऑनलाइन ऑफर पर तत्काल भरोसा नहीं करना चाहिए.

ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए सतर्कता जरूरी

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को समझाया गया कि साइबर अपराध से बचने का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता और सतर्कता है. अनजान व्यक्ति को व्यक्तिगत जानकारी देने, संदिग्ध लिंक खोलने या किसी के कहने पर OTP साझा करने से बचना चाहिए. पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों से कहा कि वे खुद भी जागरूक रहें और अपने परिवार के सदस्यों को भी साइबर ठगी के प्रति सावधान करें. खासकर बुजुर्ग और कम तकनीकी जानकारी रखने वाले लोगों को साइबर अपराधियों से बचाने में बच्चे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

शिक्षकों और कर्मियों ने भी लिया हिस्सा

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के शिक्षक रजनीश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया और कार्यक्रम के समापन की घोषणा की. मौके पर विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं और कर्मी मौजूद रहे. कार्यक्रम में सुमन कुमार, याकूब, प्रियंका कुमारी, स्वीटी कुमारी, सबीहा नजमीन, मीनू कुमारी, टुसी रानी, सिमरन कौर, अभिनंदन कुमार, अमित कुमार सहित अन्य शिक्षक और कर्मियों की मौजूदगी रही.


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लेखक के बारे में

By सूरज कुमार गुप्ता

सूरज कुमार गुप्ता पिछले 25 वर्षों से प्रिंट मीडिया में एक्टिव है. वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत की. राजनीतिक व सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों पर पत्रकारिता करना इनकी रुचि में शामिल है. सामाजिक कार्यो में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2007 में इन्हें भारत सरकार की ओर से तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित किया था.

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