कटिहार, बारसोई. एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर बारसोई प्रखंड में कथित तौर पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई का मामला सामने आया है. बारसोई-आबादपुर सड़क पर बीडी कॉलेज और नौरोल के बीच स्थित घने वन क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई किए जाने की बात सामने आयी है. स्थानीय स्तर पर अब तक करीब एक हजार पेड़ काटे जाने का दावा किया जा रहा है, जबकि पूरे क्षेत्र में करीब 3500 पेड़ होने की बात बतायी जा रही है. मामला सामने आने के बाद वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया.
बिना अनुमति पेड़ काटने का आरोप
वन विभाग की अधिकारी वैष्णवी ने बताया कि भू-स्वामी की ओर से पेड़ों की कटाई के संबंध में आवेदन दिया गया था, लेकिन विभाग की ओर से इसकी अनुमति नहीं दी गयी थी. इसके बावजूद पेड़ों की कटाई किया जाना नियमों के विरुद्ध है. उन्होंने बताया कि संबंधित जमीन निजी है, इसलिए मामले में अंचल पदाधिकारी के स्तर से भी कार्रवाई की जानी है.
वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा
पेड़ों की कटाई की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. अधिकारियों ने कटाई वाले क्षेत्र का जायजा लिया और मामले से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटायी. वन विभाग की ओर से कटे हुए पेड़ों की संख्या और कटाई की परिस्थितियों को लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है.
अंचल प्रशासन भी कर रहा मामले की जांच
अंचल पदाधिकारी श्याम सुंदर साह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है. उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जरूरत पड़ने पर सख्त कार्रवाई की जायेगी. इससे अब वन विभाग के साथ अंचल प्रशासन की जांच पर भी लोगों की नजर है.
हरियाली बढ़ाने की मुहिम के बीच उजड़ रहा जंगल
सरकार की ओर से पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए लगातार पौधारोपण अभियान चलाया जा रहा है. वायु संतुलन बनाए रखने, तापमान नियंत्रित करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है. ऐसे में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की बात सामने आने से स्थानीय स्तर पर पर्यावरण को लेकर चिंता बढ़ गयी है.
कितने पेड़ काटे गए, जांच में सामने आना जरूरी
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक पेड़ को तैयार होने में वर्षों लग जाते हैं, लेकिन उसे काटने में कुछ ही समय लगता है. इसलिए मामले की गंभीरता से जांच जरूरी है. लोगों ने मांग की है कि वास्तविक रूप से कितने पेड़ काटे गए, पेड़ों की कौन-कौन सी प्रजातियां थीं, कटाई के लिए अनुमति ली गयी थी या नहीं और काटी गयी लकड़ी को कहां ले जाया गया, इसकी जांच करायी जाए.
जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन तथा वन विभाग से मामले में जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने की मांग की है. साथ ही कटे हुए पेड़ों की वास्तविक संख्या का आकलन कराने और भविष्य में इस तरह की कटाई रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गयी है.
जांच के बाद स्पष्ट होगी पूरी स्थिति
फिलहाल वन विभाग और अंचल प्रशासन की जांच जारी है. संबंधित जमीन निजी होने के बावजूद वन विभाग की अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में पेड़ों की कटाई किए जाने का मामला सामने आया है. अब जांच में कटे पेड़ों की वास्तविक संख्या, कटाई की अनुमति और लकड़ी के परिवहन समेत अन्य बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है.
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