बरारी रेफरल अस्पताल को 37 साल से नए भवन की आस: जर्जर इमारत में हो रहा इलाज

Infrastructure News: कटिहार जिले के बरारी प्रखंड का एकमात्र 30 शय्या (बेड) का रेफरल अस्पताल खुद 'बीमार' हो चुका है. पिछले 37 वर्षों से एक बेहद जर्जर और पुरानी इमारत में संचालित इस अस्पताल को आज तक नया भवन नसीब नहीं हो सका, जिसके कारण लाखों की आबादी को अपनी जान जोखिम में डालकर इलाज कराने को मजबूर होना पड़ रहा है.

कटिहार के बरारी से हरजीत सिंह की रिपोर्ट

Infrastructure News: कटिहार जिला अंतर्गत बरारी प्रखंड क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की लाइफलाइन माना जाने वाला 30 शय्या का रेफरल अस्पताल अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक उदासीनता के कारण पिछले 37 सालों से इस अस्पताल का कायाकल्प नहीं हो सका है. अस्पताल परिसर के भीतर ही एक बड़े आधुनिक अस्पताल के निर्माण के लिए पर्याप्त खाली जमीन उपलब्ध होने के बावजूद, आज तक नए भवन की नींव नहीं रखी जा सकी. नतीजा यह है कि इस गंभीर बुनियादी कमी की वजह से बरारी प्रखंड की लाखों गरीब जनता को बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य लाभ पाने के अधिकार से वंचित होना पड़ रहा है.

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के कार्यकाल में हुआ था निर्माण; अब छत से टपकता है पानी

इस अस्पताल के ऐतिहासिक और वर्तमान ढांचागत पहलुओं की बात करें तो स्थिति बेहद चिंताजनक है:

  • गौरवशाली अतीत: इस 30 शय्या रेफरल अस्पताल का निर्माण 37 वर्ष पूर्व सूबे के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री दिनेश कुमार सिंह के कार्यकाल और बरारी के पूर्व विधायक करुणेश्वर सिंह के विशेष प्रयासों से कराया गया था. शुरुआती दौर में यहां योग्य एमबीबीएस (MBBS) डॉक्टरों की मुस्तैदी और अच्छी व्यवस्था के कारण दूर-दराज के मरीजों को उच्च स्तरीय निशुल्क इलाज मिलता था.
  • वर्तमान बदहाली: समय बीतने के साथ रखरखाव के अभाव में यह पूरी इमारत अब जमींदोज होने की कगार पर पहुंच चुकी है. अस्पताल की छतें मौसम की पहली बारिश में ही टपकने लगती हैं, दीवारों में खतरनाक दरारें आ चुकी हैं और बिजली-पानी की बुनियादी आपूर्ति भी अक्सर ठप रहती है.

खाली पड़ी 15 एकड़ जमीन पर नया भवन बनाने की मांग

विगत 15 वर्षों से स्थानीय जनता, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विधानसभा से लेकर सचिवालय तक अस्पताल के नए भवन के निर्माण के लिए कई बार पत्राचार किया और आवाज उठाई है. वर्तमान स्थिति को लेकर जिला पार्षद गुणसागर पासवान, प्रियंका देवी के पति बहादुर सिंह और शारीब खां ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. इन नेताओं का कहना है कि बरारी की लाइफलाइन बन चुके इस अस्पताल परिसर के सामने ही करोड़ों की सरकारी भूमि खाली पड़ी है. जनहित को सर्वोपरि रखते हुए स्वास्थ्य विभाग को अविलंब इस रिक्त स्थान पर एक सर्वसुविधाजनक नए अस्पताल भवन की स्वीकृति देनी चाहिए, ताकि मरीजों को सम्मानजनक इलाज मिल सके.

जर्जर छत के नीचे प्रसव कराने की मजबूरी

इमारत की इस खतरनाक स्थिति के बीच भी इसी जर्जर भवन के भीतर प्रसव कक्ष (लेबर रूम) का संचालन किया जा रहा है, जहां नवजात शिशुओं और प्रसूति माताओं की जान हमेशा खतरे में बनी रहती है. इस बुनियादी संकट के अलावा, अस्पताल के भीतर फैले भ्रष्टाचार ने मरीजों की कमर तोड़ दी है.

प्रसव प्रभारी जीएनएम पर अवैध उगाही का गंभीर आरोप

स्थानीय ग्रामीणों ने लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए प्रसव कक्ष की प्रभारी जीएनएम (GNM) पूनम पर प्रसव के नाम पर गरीब तीमारदारों से मोटी अवैध राशि वसूलने का गंभीर आरोप लगाया है. ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य प्रबंधक भी इस मनमानी और भ्रष्टाचार पर पूरी तरह आंखें मूंदे हुए हैं, जिससे स्वास्थ्य कर्मियों के हौसले बुलंद हैं.

विभागीय जांच की मांग

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप से कटिहार के जिला पदाधिकारी (डीएम) और राज्य स्वास्थ्य समिति से मांग की है कि गरीबों का शोषण करने वाली उक्त स्वास्थ्य कर्मी को तत्काल प्रभाव से हटाकर विभागीय जांच शुरू की जाए. इसके साथ ही वहां किसी ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ स्वास्थ्य कर्मी को पदस्थापित किया जाए. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही नए भवन के निर्माण और अस्पताल के प्रशासनिक सुधार को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे चरणबद्ध तरीके से अस्पताल परिसर में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू करेंगे.

कटिहार की ख़बरों को पढने के लिए क्लिक करें !

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >