पीड़ित परिवारों को सुखा राशन देते हैं शेख मसौवर | Prabhat Khabar Network

कटिहार: अमदाबाद में गंगा-महानंदा के उफान से त्राहिमाम; जलेबी टोला में सड़क पर बह रहे पानी के ऊपर मचान बनाकर रहने को मजबूर पीड़ित

कटिहार के अमदाबाद में गंगा और महानंदा नदियों का जलस्तर बढ़ने से विकराल बाढ़ आ गई है. कई पंचायतें जलमग्न हो गई हैं, जिससे लोग खाने-पीने और सुरक्षित आश्रय के लिए तरस रहे हैं. सबसे भयावह स्थिति जलेबी टोला की है, जहां ग्रामीण बहते पानी के ऊपर मचान बनाकर जान हथेली पर लिए जी रहे हैं.

कटिहार जिले के अमदाबाद प्रखंड में गंगा और महानंदा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने विकराल रूप ले लिया है. प्रखंड के दर्जन भर पंचायतों में बाढ़ का पानी फैलने से स्थिति अत्यंत भयावह हो चुकी है.

खाने-पीने के सामान की भारी किल्लत, स्वच्छ पेयजल का अभाव और रोजी-रोजगार छिन जाने के कारण सैकड़ों परिवार अपने आशियाने छोड़कर ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हो गए हैं. दुर्गापुर, चौकिया पहाड़पुर, भवानीपुर खट्टी, पार दियारा, बैदा, जंगला टाल, लखनपुर, पूर्वी करीमुल्लापुर, उत्तरी व दक्षिणी करीमुल्लापुर में चारों तरफ सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है.

घर-बार छोड़कर पलायन कर रहे परिवार

बैदा पंचायत के निवासी मोहम्मद जर्जिस अपने पूरे परिवार के साथ गृहस्थी का जरूरी सामान समेटकर सुरक्षित स्थान की तलाश में निकलते मिले. उन्होंने बताया कि घर और आंगन में कई फीट पानी घुस चुका है, जिसके चलते वहां टिके रहना नामुमकिन हो गया है.

दर्जनों गांवों के लोग अपने मवेशियों और बच्चों को लेकर तटबंधों और मुख्य सड़कों की ओर रुख कर रहे हैं.

जलेबी टोला में सांसें अटकाने वाला मंजर: पानी के ऊपर मचान पर जिंदगी

प्रखंड में सबसे ज्यादा संवेदनशील और खौफनाक स्थिति जलेबी टोला की बनी हुई है.

  • यहां के विस्थापित ग्रामीण हरदेव टोला से प्रखंड मुख्यालय को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर शरण लिए हुए थे, लेकिन बीते तीन-चार दिनों से बाढ़ का पानी इस सड़क के ऊपर से भी तेज धार में बहने लगा है.
  • बहाव इतना तीव्र है कि पैर फिसलते ही व्यक्ति गहरे पानी में समा सकता है.
  • इस जानलेवा खतरे के बीच ग्रामीण सड़क पर ही बहते पानी के ऊपर चौकी और लकड़ी के मचान बांधकर रहने को विवश हैं.
  • रात के अंधेरे में चौकी के नीचे से गुजरती तेज धार की आवाज से दहशत का माहौल रहता है. यदि मचान से कोई मासूम बच्चा फिसल जाए तो उसे बचाना लगभग असंभव होगा.

'चार दिन से सोए नहीं, प्रशासन ने छोड़ दिया बेसहारा'

बाढ़ पीड़िता गीतिया देवी, जोखिया देवी और फूलमती देवी ने रोते हुए अपना दर्द साझा किया. उन्होंने बताया कि वे एक सप्ताह से सड़क पर थीं, लेकिन अब सड़क भी डूब गई है.

ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि जिलाधिकारी के आदेश के चार दिन बीत जाने के बाद भी स्थानीय अंचल या प्रखंड प्रशासन का कोई नुमाइंदा उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा. न तो रहने के लिए पॉलिथीन शीट दी गई है, न ही सूखा राशन और न ही सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित करने के लिए सरकारी नावें लगाई गई हैं.

निजी कोष से आगे आए समाजसेवी, 100 परिवारों को बांटी राहत किट

प्रशासनिक उपेक्षा के बीच पूर्वी करीमुल्लापुर पंचायत के समाजसेवी शेख मौसवर ने आगे आकर जलेबी टोला के बाढ़ पीड़ितों का हाथ थामा.

बुधवार को उन्होंने अपनी टीम के साथ पहुंचकर जलमग्न सड़क पर मचानों पर फंसे करीब 100 परिवारों के बीच अपने निजी कोष से सूखे राशन की किट वितरित की. इस किट में चूड़ा, गुड़, मूढ़ी, मोमबत्ती, माचिस और अन्य आवश्यक सामग्री शामिल थी. शेख मौसवर ने बताया कि वे मानवीय आधार पर अमदाबाद प्रखंड के विभिन्न गांवों में अब तक 1,000 से अधिक परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचा चुके हैं.

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By Prabhat khabar news desk

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