कटिहार : पुनर्वास संघर्ष समिति के तत्वाधान में विस्थापित परिवारों को बसाने को लेकर शहर के निगम परिसर पुराना बस स्टैंड में अनिश्चित कालीन सत्याग्रह आमरण-अनशन बुधवार को भी दूसरे दिन जारी रहा. लोक गायक छैला बिहारी ने दूसरे दिन भी विस्थापित परिवारों को लोक संगीत से मनोबल बढ़ा रहे थे. विक्टर झा ने विस्थापित परिवारों को संबोधित करते हुए कहा कि इस बार आर पार की लड़ाई है. या तो विस्थापित परिवार को जिला प्रशासन पुनर्वास कराये, अन्यथा एक बड़े आंदोलन के लिए जिला प्रशासन तैयार रहे. श्री झा ने कहा कि कुरसेला से लेकर अमदाबाद तक कटाव की समस्या नित्य वर्ष बरकरार रहती है. राज्य सरकार व जिला प्रशासन बाढ़ कटाव को लेकर महज खानापूर्ति करता है. इसका खामियाजा कटिहार की जनता को भुगतना पड़ता है.
पुनर्वास की मांग को लेकर दूसरे दिन भी जारी रहा अनशन
कटिहार : पुनर्वास संघर्ष समिति के तत्वाधान में विस्थापित परिवारों को बसाने को लेकर शहर के निगम परिसर पुराना बस स्टैंड में अनिश्चित कालीन सत्याग्रह आमरण-अनशन बुधवार को भी दूसरे दिन जारी रहा. लोक गायक छैला बिहारी ने दूसरे दिन भी विस्थापित परिवारों को लोक संगीत से मनोबल बढ़ा रहे थे. विक्टर झा ने विस्थापित […]

चूड़ा व सत्तू खाकर दे रहे सहयोग : विस्थापित परिवार के लिए विक्टर झा आमरण अनशन पर बैठे हैं, तो सैकड़ों परिवार चूड़ा व सत्तू खाकर इस आंदोलन को सफल बनाने में जुटे हैं. मंगलवार की रात कार्यक्रम स्थल पर कुछ ऐसा लगा कि मानों सभा चल रही हो. खाना में चूड़ा खाये और कंबल चादर तानकर सो गये. सुबह फिर आमरण अनशन को सभा में तब्दील करने में अपना सहयोग दिये. दूसरे दिन भी जिला प्रशासन की ओर से किसी प्रकार का प्रयास आमरण अनशन पर बैठे आंदोलनकारी को मनाने को लेकर नहीं किया गया.
पुनर्वास नहीं, तो होगा उग्र आंदोलन
वर्षों से जिले के विस्थापित परिवाराें को अबतक सरकार पुनर्वास नहीं करा पायी है. इसे लेकर पुनर्वास संघर्ष समिति के संस्थापक मंगलवार से आमरण अनशन पर हैं. अनशन पर बैठे श्री झा ने कहा कि जिले के 40 हजार विस्थापित परिवार वर्षो से इधर उधर भटक रहे हैं. कोई सड़क किनारे, तो कोई बांध किनारे पनाह ले रहा है. राज्य सरकार विस्थापित परिवारों को बसाने के लिए भूमि अधिग्रहण कर पुनर्वास करा रही है, लेकिन इस मामले में भी महज खानापूर्ति हो रही है. पांच दिनों के अंदर अगर जिला प्रशासन विस्थापित परिवार को बसाने में कोई सही निर्णय नहीं लेता है, तो जिले में उग्र आंदोलन होगा. इसमें सड़क, रेलमार्ग, बाजार, राज्य व केंद्र सरकार के अधीनस्थ चलने वाले सभी कार्यालय को ठप कर दिया जायेगा.
बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलतीं
सड़क किनारे व तटबंधों पर लिये हुए हैं शरण
जिले के कदवा, प्राणपुर, मनिहारी, अमदाबाद, कुरसेला, बरारी आदि प्रखंडों में हजारों लोग विस्थापन का दंश झेल रहे हैं. कदवा प्रखंड के महानंदा तटबंध के भीतर सात से आठ पंचायत की आबादी भी परेशानी में है. दूसरी तरफ बरारी के गंगा दार्जिलिंग पथ सहित अमदाबाद में तटबंध पर लोग शरण लिये हुये हैं. कई प्रमुख पथों के किनारे व तटबंध पर भी वर्षो से बाढ़ व कटाव से विस्थापित परिवार गुजर बसर कर रहे हैं. ऐसे परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, सड़क, आवास जैसी बुनियादी सुविधा भी मयस्सर नहीं है. ऐसे परिवार इसे नियति मानकर किसी तरह जिंदगी गुजार रहे हैं.