सूरत-ए-हाल. शहर में नहीं है यात्रियों के लिए शेड की व्यवस्था

चिलचिलाती धूप कर रही परेशान शहर में ऑटो स्टैंड कहीं नहीं हैं. बस स्टैंड पहले शहीद चौक पर था. एक अप्रैल से उसे हटाकर मिरचाईबाड़ी में नया बस स्टैंड बना दिया गया है, जहां यात्री सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है. जबकि ऑटो स्टैंड तो पहले से ही नहीं हैं. कटिहार : शहर […]

चिलचिलाती धूप कर रही परेशान

शहर में ऑटो स्टैंड कहीं नहीं हैं. बस स्टैंड पहले शहीद चौक पर था. एक अप्रैल से उसे हटाकर मिरचाईबाड़ी में नया बस स्टैंड बना दिया गया है, जहां यात्री सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है. जबकि ऑटो स्टैंड तो पहले से ही नहीं हैं.
कटिहार : शहर में यात्रियों को इस कड़ी धूप में छांव तक नसीब नहीं हो रही है. आग उगलती धूप व गरमी के बीच यात्री सड़क किनारे खड़े रहकर बस व ऑटो का इंतजार करते हैं. इससे बच्चों व महिलाओं को घोर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. दरअसल शहर में ऑटो स्टैंड कहीं नहीं हैं. बस स्टैंड पहले शहीद चौक पर था.
एक अप्रैल से उसे हटाकर मिरचाईबाड़ी में नया बस स्टैंड बना दिया गया है, जहां यात्री सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है. जबकि ऑटो स्टैंड तो पहले से ही नहीं हैं. जगह-जगह रुकने वाले ऑटो के लिए जगह का चयन नहीं किया गया है. जहां ऑटो चालकों को मन होता है वहीं पर ऑटो को खड़ा कर यात्रियों को बैठाते और उतरारते हैं.
उन जगहों पर यात्रियों को धूप से बचने के लिए छांव तक की कोई व्यवस्था नहीं है. पेयजल के लिए यात्री भटकते हैं. प्रभात खबर ने आग उगलती धूप के बीच यात्रियों को हो रही परेशानी का बुधवार को जायजा लिया और जानने का प्रयास किया कि किन-किन परेशानियों के बीच यात्री यात्रा करने को विवश हो रहे हैं.
केस स्टडी 01 : शहीद चौक से बड़ी संख्या में ऑटो का परिचा
लन होता है. यहां से मिरचाईबाड़ी, मनिहारी, मनसाही, कोलासी, कोढ़ा, पूर्णिया रोड सहित कई स्थानों के लिए ऑटो का परिचालन होता है. पर, ऑटो पूरे दिन धूप में ही सड़क किनारे लगते हैं. यात्री भी धूप में ही खड़े होकर ऑटो की सवारी करने को मजबूर होते हैं. बुधवार को दर्जनों यात्री मिरचाईबाड़ी जाने के लिए ऑटो के खुलने का इंतजार कर रहे थे.
कड़ी धूप की वजह से यात्री परेशान हो रहे थे. खासकर महिलाओं एवं बच्चों को धूप से बुरा हाल हो रहा था. यहां पर नगर निगम या जिला प्रशासन की ओर से धूप व बरसात से बचने के लिए किसी तरह की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है. इससे यात्री परेशान होने के लिए मजबूर होते है.
केस स्टडी-02 : रेलवे स्टेशन के नजदीक जीआरपी चौक पर भी बड़ी संख्या में ऑटो लगते हैं. ऑटो स्टैंड की सुविधा नहीं होने की वजह से सभी ऑटो सड़क किनारे ही लगते हैं. रेलवे स्टेशन आने-जाने वाले यात्रियों को ऑटो ही एक मात्र सहारा है. जायजा लेने के क्रम पाया गया कि दर्जनों ऑटो सड़क के दोनों ओर कड़ी धूप में खड़े हैं. काफी संख्या में यात्री भी वहां मौजूद थे.
किसी को मिरचाईबाड़ी बस स्टैंड जाना था तो किसी को मनिहारी, कोढ़ा आदि स्थानों पर, लेकिन वहां कड़ी धूप से बचने के लिए कोई व्यवस्था नहीं होने की वजह से यात्री परेशान हो रहे थे. मनिहारी के सुबोध मंडल प्यास से परेशान थे. उन्हें न पानी मिल रहा थी न ही छांव. इससे वे काफी विचलित हो रहे थे. इसी तरह बस स्टैंड जा रहे एक परिवार को भी परेशानियों से जूझते देखा गया. ऐसे में लोग प्रशासन को कोसने के सिवा कुछ नहीं कर पा रहे थे.
केस स्टडी 03 : मिरचाईबाड़ी सहायक थाना के निकट एक अप्रैल से बस स्टैंड का संचालन शुरू हो गया है. ऐसे में बड़ी बस के अलावा बड़ी संख्या में ऑटो का भी परिचालन होता है. चूंकि बस में सवार होने एवं बस से उतरने वाले लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए ऑटो की ही सवारी करते हैं. बस स्टैंड होने के बावजूद यहां न यात्री शेड की कोई व्यवस्था है न ही पेयजल की कोई व्यवस्था है.
ऐसे में आग उगलती धूप के बीच यात्री मनमसोस कर कड़ी धूप में ही खड़े रहने को विवश होते हैं. यहां पर देखा गया कि प्राणपुर के शकील अहमद अपने तीन बच्चों व पत्नी के साथ भागलपुर जाने के लिए ऑटो से पहुंचे. बडी मुश्किल से पेड़ के नीचे छांव मिली, लेकिन बैठने की व्यवस्था नहीं होने की वजह से जमीन पर ही सभी लोगों को बैठा दिया. उड़ती धूल, तेज धूप व गरमी से बच्चे परेशान हो रहे थे. यहां की स्थिति सबसे खराब देखने को मिली. यात्री सुविधा के नाम पर यहां कुछ भी नहीं होने से प्रतिदिन यात्रा करने वाले हजारों लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
सब देखकर भी प्रशासन व जनप्रतिनिधि उदासीन बने हुए हैं.
केस स्टडी-04 : यहां से आगे बढ़ने पर अंबेडकर चौक पर भी यही स्थिति देखने को मिली. यहां भी पूर्णिया सहित अन्य जगहों पर जाने के लिए ऑटो बड़ी संख्या में खड़े रहते हैं, लेकिन धूप से बचने के लिए यात्री शेड की कोई व्यवस्था नहीं है. यात्रियों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं होने की वजह से यात्री किसी दुकान के बेंच पर बैठे थे,
तो कोई जमीन पर बैठ कर बस, ऑटो का इंतजार कर रहा था. पूर्णिया जा रहे कमल किशोर ने बताया कि प्रशासन को इस दिशा में ध्यान देना चाहिए. चूंकि यात्रियों में काफी संख्या में महिला, बच्चे, वृद्ध भी होते हैं, जिन्हें धूप से बचाना जरूरी है. अन्यथा लू लगने का खतरा होता है. बैठने, शेड की व्यवस्था, पानी की व्यवस्था होनी चाहिए पर कुछ भी नहीं है.

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