45 अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्रों में हैं तैनात
30 में दे रहे हैं सेवा
कटिहार : जिले में आयुष चिकित्सक एलोपैथ की दवा लिख रहे हैं. यह खेल जिले में सभी अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्रों में चल रहा है. इसे विडंबना नहीं तो और क्या कहा जायेगा कि अयुष चिकित्सक बगैर डिग्री के एलोपैथिक पद्धति से इलाज के साथ दवा भी लिख रहे हैं. इसे मरीज की जान से खिलवाड़ किया जाना ही कहा जा सकता है. दरअसल आयुष की दवा काफी कम मात्रा में अस्पतालों में पहुंच रही है. इसके कारण आयुष चिकित्सक नियमों काे ताक पर रखकर एलोपैथिक पद्धति से इलाज के साथ दवा भी लिख रहे हैं. प्रभात खबर ने सोमवार को यह जानने का प्रयास किया कि जिले में आयुष चिकित्सक कैसे इलाज कर रहे हैं.
चूंकि इनकी नियुक्ति 2010 में बिहार सरकार ने की है. जिले के 45 अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्रों में इनकी नियुक्ति की गयी है, लेकिन 30 आयुष चिकित्सकों के द्वारा इलाज किया जा रहा है. शेष 15 अस्पताल भवनहीन रहने के कारण वहां इलाज नहीं हो रहा है. अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र में आयुर्वेद, होमियाेपैथ की दवा आधे से कम मात्रा में आपूर्ति की जा रही है. इसके कारण मरीजों को बाजार से दवा खरीदनी पड़ रही है. ग्रामीण क्षेत्र के बाजारों में आयुर्वेद, होमियाेपैथ की दवा नहीं मिलने के कारण मरीजों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है.
मरीज की सलाह पर लिखते हैं एलोपैथ की दवा: आयुष चिकित्सक
आयुष चिकित्सकों का कहना है कि मरीज ही एलोपैथ की दवा लिखने की सलाह देते हैं. मरीजों की सलाह पर आयुष चिकित्सक एलोपैथ की दवा लिखते हैं. बड़ा सवाल यह है कि क्याें मरीज के आग्रह करने भर से आयुष चिकित्सक मरीज को एलोपैथ की दवा लिखने को बाध्य हो जाते हैं. ऐसे में कभी भी मरीज के जान पर आफत आ सकती है. स्वास्थ्य विभाग के वरीय पदाधिकारियों के द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. इससे मरीजों का सरकारी अस्पताल से मोहभंग हो रहा है. लोग निजी अस्पताल पर निर्भर हो रहे हैं. यदि दवा आयुष की उपलब्ध नहीं है तो चिकित्सक दवा ही नहीं लिखें. विभाग को सूचना देकर दवा उपलब्ध कराने का दवाब बनाया जा सकता है, लेकिन यहां नियमों को ताक पर रखकर मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है. जिसे देखने वाला कोई नहीं है. आयुष चिकित्सक का कहना है कि आयुर्वेदिक की दवा अस्पताल तक पहुंचने में छह माह लग जाता है. इन अस्पतालों में सात वर्षों के दौरान दो या तीन बार ही सरकारी दवा पहुंच पायी है. इसके कारण अस्पताल में आयुर्वेद की दवा उपलब्ध नहीं रहती है. समय पर दवा की आपूर्ति नहीं होने से आयुष चिकित्सकों को परेशानी हो रही है.
कहते हैं आयुष चिकित्सक
समान काम समान वेतन नहीं मिलता है, जबकि अस्पताल में एमबीबीएस चिकित्सक की तरह आयुष चिकित्सक भी समान रूप से काम करते हैं. एमबीबीएस चिकित्सक को 50 से 70000 प्रतिमाह मिलता है. जबकि आयुष चिकित्सक का मात्र 24000 रुपये वेतनमान है. अस्पताल में जूनियर कर्मी का वेतन आयुष चिकित्सक से अधिक है. सरकार आयुष चिकित्सकों की उपेक्षा कर रही है. आयुष चिकित्सा से संबंधित दवा सात वर्षों में मात्र दो या तीन बार ही अस्पताल को मिली है. यह दवा पटना से सप्लाई की जाती है और पटना से अस्पताल तक दवा पहुंचने में समय लग जाता है. इसके कारण अधिक दवा रास्ते में ही एक्सपायर हो जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों के बाजारों में आयुर्वेद की दवा उपलब्ध नहीं है, केवल जिला मुख्यालय में यह दवा मिलती है. मरीजों की परेशानी को देखते हुए अंग्रेजी दवा लिखने को बाध्य हो जाते हैं.
डॉ शाहनवाज, आयुष चिकित्सक
कहते हैं डीपीएम
कटिहार जिले में 45 अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र हैं. इसमें 30 आयुष चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति है. 2010 में सभी आयुष चिकित्सकों को जिले के विभिन्न अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिनियुक्ति किया गयाहै. जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अनुमंडलीय अस्पताल व सदर अस्पताल में आयुष चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति नहीं की गयी है. न ही आयुष चिकित्सा से संबंधित दवा की आपूर्ति की जाती है, यह केवल अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र में ही उपलब्ध कराया जाता है.
निलेश कुमार, डीपीएम
कहते हैं सिविल सर्जन
सदर अस्पताल में आयुष चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति नहीं की गयी है. न ही यहां आयुर्वेदिक दवा उपलब्ध है. इसके कारण आयुष चिकित्सक अंग्रेजी दवा मरीजों को लिखते हैं. वैसे चिकित्सकों की काफी कमी है.
आरएन सिंह, सिविल सर्जन
