नाकामयाबी . अब तक नहीं सुलझी चर्चित दर्ज मामलों की मिस्ट्री
अपराध मामलों का उद्दभेदन करने में पुलिस नकाम साबित हुई है. ऐसे में पीड़त पक्ष को जहां न्याय नहीं मिल पाता है वही अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं.
आजमनगर : आजमनगर थाना में दर्ज कई मामलों का उद्दभेदन करने में पुलिस नकाम साबित हुई है. ऐसे में पीड़त पक्ष को जहां न्याय नहीं मिल पाता है वही अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं. यही नहीं कांड का उद्भेदन नहीं होने व अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं होने से पुलिस का खौफ अपराधियों में कम हो गया है. अपराधी कहीं भी दिनदहाड़े घटना को अंजाम देकर निकल जाते हैं. ऐसे ही कुछ मामलों पर प्रभात खबर ने प्रड़ताल की है. जिनमें पुलिस को कहीं सफलता तो कहीं असफलता हाथ लगी.
जो बेहतर पुलिसिंग पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है. जबकि जिले के पुलिस कप्तान समय-समय पर थानेदारों के साथ क्राइम मीटिंग भी करते हैं. बावजूद कई मामले आज भी पूरी तरह उद्भेदित नहीं हो पाया है. आजमनगर थाने में दर्ज चर्चित हत्याकांड, गोली कांड और अपहरण के कई मामले दर्ज हुए हैं. जिसको सुलझा पाने में पुलिस वर्षों बाद भी नाकाम दिख रही है. कांड के उद्भेदन के लिए तैनात पुलिस पदाधिकारी घटना में शामिल हत्यारों के सत्यापन और गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई किये जाने का दम भरते हैं. लेकिन पुलिस की सक्रियता की स्थिति देख पीड़ितों की आस दम तोड़ती नजर आ रही है. कई पीड़ित परिवार तो अब इस मामले में कुछ कहने के बजाय चुप रहना ही बेहतर समझने लग गये हैं. जिसे अब अपनी नियति मान बैठे हैं. न्याय के लिए पुलिस अधिकारियों की चौखट पर कदम रखना भी अब ऐसे पीड़ित समय की बर्बादी समझने लग गये हैं.
केश स्टडी-1
पुजारी हत्या कांड फाइलों में दब गया
वर्ष 2016 में आजमनगर थाना क्षेत्र के दुर्गा भिट्टा स्थित दुर्गा मंदिर के पुजारी बालक बाबा की अज्ञात लोगों द्वारा ईंट से थकुच-थकुच कर हत्या कर दी गयी थी. घटना के बाद लोगों का आक्रोश चरम पर पहुंच चुका था. पुलिस ने 24 घंटे के अंदर मामले को सुलझाने का दावा किया था. एक साल बीत गये अब तक मामले का उद्दभेदन नहीं हो सका है. तत्कालीन एसडीपीओ चंद्रिका प्रसाद यादव ने आक्रोशित लोगों को अज्ञात हत्यारों की शिनाख्त कर गिरफ्तारी करने का आश्वासन भी दिया. लेकिन बदलते समय के साथ वो महकमे से रिटायर्ड हो गये. मामले का उद्भेदन कर पाने में पुलिस अब तक नाकाम है. जिसके हत्यारे आज भी पुलिस की पकड़ में नहीं है. लोग कई मौके पर सवाल उठाते हैं. इसे पुलिस की नकामी बताते हैं.
पीड़त पक्ष को नहीं मिल पाता है न्याय, अपराधियों के हौसले हैं बुलंद
केश स्टडी-2
विपिन पाल हत्या कांड
वर्ष 2016 में हीं आजमनगर थाना क्षेत्र के महेशपुर पंचायत स्थित विपिन पाल नामक गरीब मजदूर तबके के व्यक्ति की हत्या गला रेत कर दी गयी थी. मामले में लगभग आधे दर्जन लोग नामजद किये गये थे. हालांकि मामले में थानध्यक्ष शंकर शरण दास ने नामजदों को गिरफ्तार कर जेल भेजने की बात कही है. लेकिन हत्या के कारणों का खुलासा पुलिस अब तक नहीं कर सकी है. पुलिस ने इस मामले में भी मृतक के परिजनों सहित ग्रामीणों को आश्वस्त किया था. मामले का स्टेटस फिलहाल क्या है. इसकी पड़ताल दर्ज मामलों से हीं लगा पाना संभव है.
केश स्टडी-3
लूट कांड के आरोपित पकड़ से बाहर
आजमनगर थाना क्षेत्र के झिल्लीपाड़ा में कुछ दिन पूर्व मवेशी व्यवसायी अब्दुल रशीद को पैर में गोली मार ₹2.50 लाख लूट की वारदात को अपराधियों ने अंजाम दिया था. मामले में पुलिस ने ग्रामीणों के सहयोग से एक लुटेरे को पकड़ जेल भेजने में कामयाबी हासिल की है. दर्ज मामले में और फरार चल रहे अज्ञात अभियुक्तों की गिरफ्तारी करने में नकाम साबित हुई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस यदि चाह ले तो अपराध को रोका जा सकता है. कांड में संलप्ति अपराधियों को गिरफ्तार कराकर सजा दिलाने से अपराध का ग्राफ गिरेगा.
केश स्टडी-4
व्यवसायी पुत्री अपहरण कांड का नहीं हुआ उद्दभेदन
8 मार्च 2015 को सालमारी ओपी में एक प्रतिष्ठित व्यवसायी ने अपने पुत्री के अपहरण का मामला दर्ज कराते हुए बरामदगी की गुहार पुलिस से लगायी थी. जिसका थाना कांड संख्या 35/15 है. मामले के दो वर्ष आठ माह गुजरने के बाद भी पुलिस इस मामले का उद्भेदन नहीं कर पायी है. परिजनों का पुलिस से विश्वास टूट चुका है. मामले दर्ज होने के बाद कई ओपी अध्यक्ष बदले गये. लेकिन अपहृता को ढूंढ निकालने में कामयाबी हासिल नहीं हुई. परिजनों की माने तो पुलिस का शुरुआती अनुसंधान दिशाहीन होने की वजह से आज तक मामले का उद्भेदन नहीं हो सका. जबकि मामले को लेकर एसपी ने कई बार समीक्षा भी की. बावजूद इसके मामला सिफर रहा.
केश स्टडी-4
व्यवसायी पुत्री अपहरण कांड का नहीं हुआ उद्दभेदन
8 मार्च 2015 को सालमारी ओपी में एक प्रतिष्ठित व्यवसायी ने अपने पुत्री के अपहरण का मामला दर्ज कराते हुए बरामदगी की गुहार पुलिस से लगायी थी. जिसका थाना कांड संख्या 35/15 है. मामले के दो वर्ष आठ माह गुजरने के बाद भी पुलिस इस मामले का उद्भेदन नहीं कर पायी है. परिजनों का पुलिस से विश्वास टूट चुका है. मामले दर्ज होने के बाद कई ओपी अध्यक्ष बदले गये. लेकिन अपहृता को ढूंढ निकालने में कामयाबी हासिल नहीं हुई. परिजनों की माने तो पुलिस का शुरुआती अनुसंधान दिशाहीन होने की वजह से आज तक मामले का उद्भेदन नहीं हो सका. जबकि मामले को लेकर एसपी ने कई बार समीक्षा भी की. बावजूद इसके मामला सिफर रहा.
