मोहनिया में संगीता,गीता व रविशंकर के बीच मुकाबला

KAIMUR NEWS.मोहनिया विधानसभा क्षेत्र का चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प और अप्रत्याशित समीकरणों से भरा रहा. जिले की राजनीति में मोहनिया सीट हमेशा सुर्खियों में रही है. यहां हर चुनाव में दल-बदल, जातीय समीकरण सियासी दिशा तय करते हैं.

हर चुनाव में बदलता है यहां सत्ता का गणित, 1952 से अब तक हर दल ने जीता जनता का भरोसा

मोहनिया शहर.

मोहनिया विधानसभा क्षेत्र का चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प और अप्रत्याशित समीकरणों से भरा रहा. जिले की राजनीति में मोहनिया सीट हमेशा सुर्खियों में रही है. यहां हर चुनाव में दल-बदल, जातीय समीकरण सियासी दिशा तय करते हैं. बता दें कि आजादी के बाद से अब तक कांग्रेस, जनता दल, बसपा, राजद और भाजपा सभी ने इस सीट पर जनता का भरोसा जीतने की कोशिश की है. यह सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है. यहां का जनादेश अक्सर सत्ता परिवर्तन का संकेत देता रहा है, कभी कांग्रेस तो कभी जनता दल, राजद या भाजपा को जनता ने मौका दिया है. इस बार का चुनाव भी कुछ वैसा ही रहा त्रिकोणीय मुकाबले ने पूरी तस्वीर बदल दी है. मालूम हो कि मोहनिया से भाजपा प्रत्याशी संगीता कुमारी को भले ही स्थानीय स्तर पर नाराजगी रही हो, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर हुए वोटों के ध्रुवीकरण ने हालात बदल दिया है, जहां भाजपा का कोर वोट बैंक और महिला मतदाता उनके साथ मजबूती से खड़े रहे. वहीं जन सुराज पार्टी की प्रत्याशी गीता देवी मुकाबले को और रोचक बना रही हैं. उन्हें हर वर्ग से थोड़ा-थोड़ा समर्थन मिला है. जबकि सभी पार्टियों के कोर वोट से भी मत हासिल की है. हालांकि, अपने ही जातीय वोटरों में कुछ बिखराव जरूर रहा, परंतु समाजसेवा और व्यक्तिगत सम्पर्क के कारण वे साइलेंट फैक्टर के रूप में उभर रही हैं. जबकि निर्दलीय राजद समर्थित प्रत्याशी रविशंकर पासवान ने अपने पारंपरिक पासवान मतदाताओं के साथ-साथ राजद के वोट बैंक को भी साधे रखा है. जबकि पूर्व सांसद छेदी पासवान के पुत्र होने का भी अच्छा लाभ मिला है. यही कारण है कि रविशंकर भी इस चुनावी जंग में मजबूती से डटे हैं. इधर, बसपा के पारंपरिक दलित वोटरों में इस बार कुछ ही बिखराव देखा गया, जिसमे अधिकांश वोट अब भी बसपा प्रत्याशी ओमप्रकाश नारायण के साथ हैं. इस बिखराव का असर अन्य प्रत्याशियों के समीकरणों पर पड़ा है. कुल मिलाकर, मोहनिया की लड़ाई इस बार दलगत समीकरण, जातीय संतुलन के बीच फंसी रही. भाजपा की संगीता कुमारी संगठन और मोदी फैक्टर के सहारे आगे दिख रही हैं तो रविशंकर पासवान जातीय एकता,राजद कोर वोटर व पिता का आशीर्वाद के भरोसे मैदान में टिके हैं,जबकि गीता देवी व्यक्तिगत लगाव व सभी दलों में सेंध के माध्यम से मुकाबले की निर्णायक ताकत बनकर उभरी हैं. गौरतलब है कि मोहनिया बाजार समिति परिसर के स्ट्रॉंग रूम में जिले की चारों विधानसभा क्षेत्रों की इवीएम मशीनें सुरक्षित रखी गयी हैं, जहां कड़ी सुरक्षा के बीच 14 नवंबर को मतगणना होगी. इसी दिन मोहनिया के 12 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा.

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Author: Vikash Kumar

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