सदर अस्पताल में बने शौचालय क्षतिग्रस्त, फैली है गंदगी, आ रही दुर्गंध

KAIMUR NEWS.स्वच्छ भारत अभियान के तहत नगर पर्षद भभुआ की तरफ से लाखों रुपये खर्च कर शहर के अलावा सदर अस्पताल में भी मरीज और उनके परिजनों के लिए जगह- जगह शौचालय व यूरिनल बनाये गये हैं. लेकिन, नगर पर्षद की अनदेखी और रखरखाव के अभाव में सभी शौचालय व यूरिनल क्षतिग्रस्त होकर बदहाल पड़े हैं.

नगर पर्षद के बनाये गये शौचालयों में नही है पानी की सुविधा, साफ-सफाई की चिंताअस्पताल प्रशासन परिसर से शौचालय हटाने का कर चुका है अनुरोध, नप नहीं दे रही ध्यान

प्रतिनिधि, भभुआ सदर.

स्वच्छ भारत अभियान के तहत नगर पर्षद भभुआ की तरफ से लाखों रुपये खर्च कर शहर के अलावा सदर अस्पताल में भी मरीज और उनके परिजनों के लिए जगह- जगह शौचालय व यूरिनल बनाये गये हैं. लेकिन, नगर पर्षद की अनदेखी और रखरखाव के अभाव में सभी शौचालय व यूरिनल क्षतिग्रस्त होकर बदहाल पड़े हैं. खासकर सदर अस्पताल में जो शौचालय बनाया गया है, वह साफ- सफाई के अभाव में गंदगी और दुर्गंध फैला रहा है. हालांकि, सदर अस्पताल प्रशासन ने कई माह पहले ही अस्पताल परिसर में क्षतिग्रस्त हो चुके शौचालय को हटा लेने को लेकर नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी से आग्रह किया है. लेकिन, नप के अधिकारी इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. ऐेसे में इनकी उपयोगिता सिद्ध नहीं हो पा रही है. कहीं यूरिनल के पास कूड़े का ढ़ेर लगा है, तो कहीं आवारा पशुओं के आराम फरमाने का घर बना हुआ है. सबसे बड़ी बिडंबना यह है कि लगभग सभी यूरिनल टूट-फूट चुके हैं.

वर्ष 2018 में लाखों रुपये खर्च कर कराया गया था निर्माण

गौरतलब है कि नगर पर्षद की तरफ से वर्ष 2018 में शहर के अधिकतर वार्डों, मलिन बस्तियों और सार्वजनिक जगहों पर लाखों रुपये खर्च करके दर्जनों जगहों पर शौचालय व यूरिनल बनाया गया था. लेकिन, रखरखाव व वाटर स्टोर करने की सुविधा के अभाव में कुछ ही दिन के बाद इनकी हालत बिगड़ने लगी.जबकि अधिकतर शौचालयों का स्थापित होने के बाद से शायद ही उपयोग किया गया हो. भले ही नगर पर्षद पूरे भभुआ शहर को खुले में शौच मुक्त करने का दावा करती हो. लेकिन, इसकी हकीकत सार्वजनिक स्थलों व वार्डों में खराब है.

भभुआ शहर घोषित है ओडीएफ फ्री जोन

बता दें कि भभुआ शहर को नगर पर्षद ने वर्ष 2018 के सितंबर माह में ही ओडीएफ फ्री घोषित करने की फाइल नगर विकास विभाग को भिजवा दी थी. भभुआ नगर पर्षद क्षेत्र में लगभग 10 हजार से अधिक मकान हैं. आबादी भी एक लाख के करीब है. इसके बाद भी झुग्गी झोपड़ियों के समीप मोबाइल टॉयलेट लगाये हैं. लेकिन, रखरखाव के अभाव में इनकी हालत दयनीय हो चली है. वार्डों के मलिन बस्ती में रहनेवाले लोगों का कहना था कि, मोबाइल टॉयलेट रखे जाने के बाद से ही इनमें पानी की व्यवस्था नहीं की गयी है. सफाई भी समय पर नहीं हो पा रही है. लोगों का कहना था कि, मोबाइल टॉयलेट के रखरखाव के प्रति नगर पर्षद तो ध्यान नहीं ही दे रहा है, वार्ड के पार्षद भी इस मामले में संजीदा नहीं है.

केवल दिखावे के लिए रह गये हैं शौचालय

शहर के कुछ लोगों का कहना था कि सरकारी राशि के लूटखसोट के लिए शहर के दर्जनों स्थलों पर सार्वजनिक शौचालय बनाये गये थे. लेकिन, खरीद के बाद से ही आज तक न तो इसमें पानी की व्यवस्था की गयी और न ही साफ- सफाई की, जिसके चलते अब ये कबाड़ बन कर गंदगी व दुर्गंध फैलाते नजर आ रहे हैं.

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Author: VIKASH KUMAR

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